नोएडा। उत्तर प्रदेश के नोएडा में एनआरआई (अनिवासी भारतीय) के नाम पर हाउसिंग लोन लेने में कथित अनियमितताओं के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई शहरों में तलाशी अभियान चलाया है। शुक्रवार को ईडी के दिल्ली जोनल ऑफिस-II की टीम ने नोएडा, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और चंडीगढ़ में कुल 13 ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई के दायरे में रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़ी दो कंपनियां अंतरिक्ष प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और सनशाइन इन्फ्रावेल प्राइवेट लिमिटेड भी शामिल हैं। एजेंसी की यह कार्रवाई कथित तौर पर एनआरआई के नाम पर लिए गए आवासीय ऋण और उससे जुड़ी वित्तीय गतिविधियों की जांच के तहत की गई है।
चार शहरों में एक साथ तलाशी अभियान
जानकारी के मुताबिक, ईडी की टीम ने शुक्रवार को अलग-अलग स्थानों पर पहुंचकर तलाशी ली। जांच का दायरा नोएडा और दिल्ली-एनसीआर के अलावा बेंगलुरु तथा चंडीगढ़ तक फैला हुआ है। कुल 13 ठिकानों पर की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच करना बताया जा रहा है।
हालांकि, तलाशी के दौरान क्या-क्या मिला, कितने दस्तावेज जब्त किए गए या किसी व्यक्ति से पूछताछ की गई अथवा नहीं, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। जांच एजेंसी की ओर से बरामदगी या आगे की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक विवरण उपलब्ध होने पर मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।
दो रियल एस्टेट कंपनियां जांच के दायरे में
इस कार्रवाई में नोएडा की दो रियल एस्टेट कंपनियों के नाम सामने आए हैं। इनमें अंतरिक्ष प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड और सनशाइन इन्फ्रावेल प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। ईडी की तलाशी इन कंपनियों से जुड़े परिसरों सहित अन्य ठिकानों पर की गई।
रियल एस्टेट क्षेत्र में आवासीय परियोजनाओं के लिए बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लिया जाता है। ऐसे मामलों में ऋण आवेदन, लाभार्थियों की पहचान, संपत्ति से संबंधित दस्तावेज और धन के लेन-देन की जानकारी महत्वपूर्ण होती है। यदि किसी ऋण में गलत पहचान, कथित तौर पर भ्रामक दस्तावेज या किसी अन्य प्रकार की वित्तीय अनियमितता का संदेह हो, तो जांच एजेंसियां संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती हैं।
हालांकि, मौजूदा मामले में कथित गड़बड़ी का सटीक तरीका क्या था, कितने ऋणों की जांच की जा रही है और इसमें कितनी धनराशि शामिल होने का संदेह है, इन सवालों पर फिलहाल विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए जांच के निष्कर्ष आने से पहले किसी कंपनी या व्यक्ति को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा।
एनआरआई हाउसिंग लोन में क्या जांच सकती है एजेंसी?
एनआरआई यानी अनिवासी भारतीय वे भारतीय नागरिक होते हैं जो रोजगार, कारोबार या अन्य कारणों से भारत के बाहर रहते हैं। एनआरआई के लिए भारत में संपत्ति खरीदने और आवासीय ऋण लेने की व्यवस्था मौजूद है। ऐसे ऋणों में आवेदक की पहचान, विदेश में निवास की स्थिति, आय के प्रमाण, बैंकिंग रिकॉर्ड और संपत्ति के दस्तावेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
यदि किसी मामले में इन जानकारियों को लेकर संदेह सामने आता है, तो जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन का मिलान किया जा सकता है। एजेंसी यह भी देख सकती है कि ऋण लेने की प्रक्रिया में किन लोगों या कंपनियों की भूमिका रही और धन का इस्तेमाल किस तरह किया गया। हालांकि, इस मामले में ईडी किन विशेष पहलुओं पर ध्यान दे रही है, इसका स्पष्ट विवरण सामने आना बाकी है।
जांच के बाद सामने आ सकती हैं अहम जानकारियां
नोएडा, दिल्ली-एनसीआर, बेंगलुरु और चंडीगढ़ में एक साथ की गई तलाशी से संकेत मिलता है कि जांच का दायरा कई स्थानों तक फैला हुआ है। अलग-अलग ठिकानों से मिलने वाले रिकॉर्ड का आपस में मिलान कर एजेंसी कथित अनियमितताओं से जुड़ी कड़ियों की पड़ताल कर सकती है। जरूरत पड़ने पर संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ और वित्तीय दस्तावेजों की आगे जांच भी की जा सकती है।
फिलहाल इस कार्रवाई में किसी की गिरफ्तारी, जब्ती या आगे की कानूनी कार्रवाई की पुष्टि करने वाली विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। ईडी की जांच पूरी होने और आधिकारिक बयान आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित हाउसिंग लोन गड़बड़ी में किन लोगों की भूमिका सामने आई और मामले में आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
इस मामले में फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि ईडी ने एनआरआई के नाम पर हाउसिंग लोन लेने में कथित गड़बड़ी की जांच के सिलसिले में चार शहरों में 13 ठिकानों पर तलाशी ली है। जांच अभी जारी है और अंतिम निष्कर्ष संबंधित साक्ष्यों तथा आधिकारिक जांच के आधार पर ही सामने आएंगे।
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