लखनऊ की गिलौरी से जौनपुर की जलेबी तक, ODOC का बड़ा प्लान
मॉल में भी मिलेगा देसी स्वाद
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को अब नई पहचान और बड़ा बाजार दिलाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार की ‘एक जिला-एक व्यंजन’ (ODOC) पहल के तहत लखनऊ की गिलौरी, जौनपुर की जलेबी और इमरती, आगरा का पेठा तथा गोरखपुर के लिट्टी-चोखा जैसे प्रसिद्ध पकवानों को आधुनिक ब्रांडिंग और पैकेजिंग के साथ देश-दुनिया तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का उद्देश्य इन व्यंजनों को केवल उनके गृह जिलों तक सीमित रखने के बजाय बड़े बाजारों, मॉल, रिटेल स्टोर और अन्य बिक्री केंद्रों तक पहुंचाना है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार, 5 नवंबर को लखनऊ में आयोजित ‘एक जिला-एक व्यंजन’ समारोह के दौरान इस पहल को और व्यापक बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के हर जिले की अपनी विशिष्ट खानपान परंपरा है। कई ऐसे व्यंजन हैं, जिनकी पहचान अभी स्थानीय बाजारों तक सीमित है। इन्हें बेहतर गुणवत्ता, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के माध्यम से बड़े बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ODOC अभियान को जिला स्तर से आगे बढ़ाकर तहसील, ब्लॉक और गांवों तक विस्तार दिया जाएगा। इससे उन पारंपरिक पकवानों को भी पहचान मिल सकेगी, जो वर्षों से स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय हैं, लेकिन बड़े बाजारों तक नहीं पहुंच पाए हैं।
उत्तर प्रदेश की खानपान संस्कृति बेहद समृद्ध मानी जाती है। लखनऊ की मलाई गिलौरी और मक्खन मलाई, जौनपुर की इमरती, मुरादाबाद की दाल, आगरा का पेठा, बलिया का बाटी-चोखा, गोरखपुर का लिट्टी-चोखा और कालपी की गुझिया अपनी अलग पहचान रखते हैं। ऐसे व्यंजनों को ODOC के माध्यम से संगठित बाजार से जोड़ने की तैयारी है।
इस पहल का एक प्रमुख उद्देश्य स्थानीय हलवाइयों, पारंपरिक खाद्य कारोबारियों, छोटे उद्यमियों और महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। यदि इन उत्पादों की बिक्री बड़े पैमाने पर बढ़ती है, तो उत्पादन, पैकेजिंग, परिवहन और विपणन से जुड़े लोगों को भी लाभ मिल सकता है।
राज्य सरकार पारंपरिक व्यंजनों को आधुनिक खाद्य कारोबार की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दे रही है। इसके लिए गुणवत्ता, स्वच्छता, सुरक्षित पैकेजिंग और उत्पाद की पहचान महत्वपूर्ण होगी। जिन खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है, उनके लिए उपयुक्त पैकेजिंग और भंडारण व्यवस्था विकसित करने की जरूरत होगी। वहीं ताजा तैयार होने वाले व्यंजनों के लिए बिक्री और आपूर्ति का अलग मॉडल अपनाना पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समारोह में खाद्य उद्योग की आर्थिक संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब बड़ी खाद्य कंपनियां विशाल कारोबार खड़ा कर सकती हैं, तो उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों को भी बड़े ब्रांड के रूप में विकसित किया जा सकता है।
प्रदेश के सभी 75 जिलों के पारंपरिक पकवानों को पहचान दिलाने के उद्देश्य से लखनऊ में 4 और 5 नवंबर को ‘टेस्ट ऑफ उत्तर प्रदेश’ प्रदर्शनी भी आयोजित की गई। इस आयोजन में ODOC और ‘एक जिला-एक उत्पाद’ (ODOP) पहल से जुड़े उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी के माध्यम से स्थानीय व्यंजनों, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को एक साझा मंच मिला। इस तरह के आयोजनों से छोटे कारोबारियों को ग्राहकों की पसंद समझने और अपने उत्पादों के लिए नए कारोबारी संपर्क विकसित करने में मदद मिल सकती है। स्थानीय स्तर पर प्रसिद्ध व्यंजनों को बड़े शहरों में पहचान मिलने से उनकी मांग बढ़ने की संभावना है।
ODOC पहल का असर पर्यटन क्षेत्र पर भी पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश आने वाले पर्यटक ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक स्थलों के साथ स्थानीय खानपान में भी रुचि रखते हैं। यदि अलग-अलग जिलों के व्यंजन एक ही स्थान पर उपलब्ध हों, तो पर्यटकों के लिए प्रदेश की विविध खाद्य संस्कृति का अनुभव करना आसान हो जाएगा।
योजना के अंतर्गत पारंपरिक व्यंजनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की संभावनाएं भी तलाश की जा रही हैं। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी होगा। मुख्यमंत्री ने स्थानीय व्यंजनों की पहचान और बाजार विस्तार के साथ उनके भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग की संभावनाओं पर भी जोर दिया है। सभी प्रमुख व्यंजनों की प्रत्येक मॉल और बाजार में बिक्री कब से शुरू होगी, इस संबंध में अभी कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है। फिलहाल सरकार का जोर स्थानीय उत्पादों की पहचान, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर है। उत्तर प्रदेश की यह पहल सफल होती है तो लखनऊ की गिलौरी, जौनपुर की इमरती, आगरा का पेठा और अन्य जिलों के व्यंजन अपने पारंपरिक बाजारों से निकलकर बड़े कारोबारी केंद्रों तक पहुंच सकेंगे। इससे प्रदेश की खानपान विरासत को पहचान मिलने के साथ स्थानीय कारोबार और रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।