नाग पंचमी पर शिवभक्ति में डूबी अयोध्या नागेश्वरनाथ में उमड़ी भारी भीड़
रामनगरी में महादेव की भक्ति का रंग नागेश्वरनाथ में श्रद्धालुओं की भीड़
अयोध्या: सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के दुर्लभ संयोग पर रामनगरी अयोध्या सोमवार को पूरी तरह शिवमय नजर आई। भोर से ही भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिरों में पहुंचने लगी। अयोध्या के प्रसिद्ध नागेश्वरनाथ मंदिर में सबसे ज्यादा उत्साह देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की।
सुबह से ही नागेश्वरनाथ मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दीं। हाथों में जल, बेलपत्र और पूजा सामग्री लेकर भक्त अपनी बारी का इंतजार करते रहे। मंदिर परिसर भगवान शिव के जयकारों से गूंजता रहा।
इस बार सावन के सोमवार के साथ नाग पंचमी पड़ने से धार्मिक महत्व और बढ़ गया। सनातन परंपरा में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। वहीं नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा की जाती है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान होने के कारण दोनों पर्वों का एक ही दिन होना श्रद्धालुओं के लिए विशेष माना जा रहा है। नागेश्वरनाथ मंदिर अयोध्या के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। भगवान राम की नगरी में स्थित होने के बावजूद इस मंदिर की पहचान एक महत्वपूर्ण शिव मंदिर के रूप में है। सावन के प्रत्येक सोमवार को यहां श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है, लेकिन नाग पंचमी के संयोग ने इस बार उत्साह कई गुना बढ़ा दिया।
भक्त सुबह से ही सरयू स्नान के बाद मंदिर की ओर बढ़ते दिखाई दिए। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और पुष्प अर्पित कर पूजा-अर्चना की। कई श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की।
रामनगरी के दूसरे शिव मंदिरों में भी सुबह से धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का सिलसिला चलता रहा। मंदिरों में शिवलिंग का अभिषेक किया गया और भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से भी व्यवस्थाएं की गईं। नागेश्वरनाथ मंदिर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से दर्शन कराने के लिए बैरिकेडिंग की व्यवस्था की गई।
भीड़ वाले इलाकों में पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के कारण मंदिर तक जाने वाले मार्गों पर सामान्य दिनों की तुलना में अधिक चहल-पहल रही।
सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने की परंपरा सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यता है कि इस महीने में सच्चे मन से भगवान भोलेनाथ की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सोमवार को शिव पूजा के लिए विशेष दिन माना जाता है। नाग पंचमी के कारण श्रद्धालुओं ने नाग देवता की पूजा भी की। कई मंदिरों में नाग देवता के प्रतीक स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।
इस अवसर पर भगवान शिव के पंचाक्षरी मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी किया गया। कई श्रद्धालुओं ने रुद्राभिषेक और विशेष पूजन कराया। मंदिरों में घंटियों और शिव मंत्रों की आवाज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। नागेश्वरनाथ मंदिर की पौराणिक मान्यता भी इसे विशेष बनाती है। मंदिर को अयोध्या के प्राचीन शिव मंदिरों में गिना जाता है और इसके इतिहास को भगवान राम के पुत्र कुश से जुड़ी परंपराओं से जोड़ा जाता है। इसी कारण अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं के बीच इस मंदिर का विशेष महत्व है।
सावन के दौरान यहां स्थानीय लोगों के साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से आए श्रद्धालु भी दर्शन करने पहुंचते हैं। सोमवार को नाग पंचमी के कारण आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में भक्त रामनगरी पहुंचे। सरयू घाटों पर भी सुबह से श्रद्धालुओं की आवाजाही रही। कई भक्तों ने पहले सरयू में स्नान किया और इसके बाद मंदिरों में पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया। घाटों और मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ ने अयोध्या के धार्मिक वातावरण को और भव्य बना दिया। राम मंदिर में रामलला के दर्शन के लिए आने वाले कई श्रद्धालुओं ने नागेश्वरनाथ मंदिर में भी दर्शन किए। इससे रामनगरी में धार्मिक पर्यटन और श्रद्धालुओं की आवाजाही दिनभर बनी रही।
मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया। बुजुर्गों और महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास किया गया। भीड़ को एक स्थान पर जमा होने से रोकने के लिए लगातार श्रद्धालुओं को आगे बढ़ाया जाता रहा। नाग पंचमी पर नागों की पूजा की परंपरा प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान से भी जुड़ी मानी जाती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार सनातन संस्कृति में नाग केवल धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि प्रकृति के संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा भी हैं।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं से जीवित सांपों को पकड़ने, परेशान करने या जबरन दूध पिलाने से बचने की अपील भी महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक दृष्टि से सांप प्राकृतिक रूप से दूध पीने वाले जीव नहीं हैं। नाग पंचमी की पूजा प्रतीकात्मक रूप से नाग देवता की प्रतिमा या चित्र के माध्यम से भी की जा सकती है। रामनगरी में सोमवार को श्रद्धा और उत्साह का अनूठा संगम देखने को मिला। एक तरफ भगवान राम की नगरी में रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही रही तो दूसरी ओर नागेश्वरनाथ समेत शिव मंदिरों में भोलेनाथ के भक्त उमड़ पड़े।
सावन सोमवार और नाग पंचमी के संयोग ने पूरे शहर के धार्मिक वातावरण को और खास बना दिया। जगह-जगह भगवान शिव के जयकारे सुनाई दिए और श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ दिन की शुरुआत की।
नागेश्वरनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं का सैलाब इस पर्व के प्रति लोगों की गहरी आस्था को दर्शाता नजर आया। सुबह से शुरू हुआ दर्शन और जलाभिषेक का सिलसिला दिन चढ़ने के साथ जारी रहा। कुल मिलाकर सावन के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी के संयोग पर अयोध्या पूरी तरह शिव भक्ति में डूबी दिखाई दी। सरयू घाट से लेकर नागेश्वरनाथ मंदिर तक श्रद्धालुओं की भीड़ और हर-हर महादेव के जयकारों ने रामनगरी को शिवमय कर दिया।