प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में गंगा नदी पर बन रहे बहुप्रतीक्षित सिक्सलेन पुल के निर्माण में लगातार हो रही देरी को लेकर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने नाराजगी जताई है। सोमवार को निर्माणाधीन पुल का निरीक्षण करने पहुंचे डिप्टी सीएम ने अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों को साफ निर्देश दिया कि अब निर्माण कार्य में किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने हर हाल में 25 दिसंबर से पहले पुल का निर्माण पूरा करने और काम की गति बढ़ाने को कहा। करीब 20 मिनट तक चले निरीक्षण के दौरान उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और निर्माण कंपनी के अधिकारियों से परियोजना की प्रगति की जानकारी ली।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि पुल निर्माण में पहले ही काफी समय लग चुका है। ऐसे में अब और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। संबंधित अधिकारी आपसी समन्वय बनाकर कार्य को तेजी से पूरा करें, ताकि निर्धारित समय सीमा के भीतर लोगों को इसका लाभ मिल सके।
20 मिनट तक किया निर्माण कार्य का निरीक्षण
सोमवार को उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जिला प्रशासन के अधिकारियों और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों के साथ निर्माण स्थल पहुंचे। उन्होंने पुल के निर्माण की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों से अब तक पूरे हो चुके काम तथा शेष कार्यों की जानकारी ली।
करीब 20 मिनट तक चले निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कंपनी के प्रतिनिधियों से पूछा कि परियोजना में देरी के क्या कारण रहे हैं और इसे निर्धारित समय में पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि काम में तेजी लाने के लिए जरूरी संसाधन और श्रमिक उपलब्ध कराए जाएं।
मौर्य ने स्पष्ट किया कि केवल समय सीमा निर्धारित कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोजाना निर्माण कार्य की प्रगति की निगरानी भी होनी चाहिए। उन्होंने NHAI और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से निर्माण स्थल का निरीक्षण करें और काम की गुणवत्ता पर नजर रखें।
करीब 2 हजार करोड़ रुपये से तैयार हो रहा पुल
प्रयागराज में मलाका से स्टेनली रोड तक गंगा नदी पर बन रहा यह सिक्सलेन पुल शहर की महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 2 हजार करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना की कुल लंबाई करीब 9.9 किलोमीटर है। इसमें गंगा नदी पर लगभग 3.86 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल और करीब 5.23 किलोमीटर का एप्रोच रोड शामिल है।
इस पुल के निर्माण का उद्देश्य शहर के यातायात दबाव को कम करना और गंगापार तथा शहर के बीच संपर्क को बेहतर बनाना है। इसके पूरा होने से फाफामऊ, तेलियरगंज और आसपास के क्षेत्रों में लगने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
25 दिसंबर तक दोनों लेन शुरू करने का लक्ष्य
परियोजना को लेकर सामने आई जानकारी के अनुसार, पुल की दाहिनी लेन को 25 नवंबर तक और बाईं लेन को 25 दिसंबर तक यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए निर्माण एजेंसी को शेष कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।
पुल पर यातायात शुरू होने से प्रयागराज शहर और गंगापार के बीच आवागमन आसान होने की उम्मीद है। सोरांव, प्रतापगढ़, अयोध्या, सुलतानपुर, रायबरेली और लखनऊ की ओर जाने वाले यात्रियों को भी वैकल्पिक मार्ग का लाभ मिल सकता है।
फाफामऊ और तेलियरगंज के जाम से मिलेगी राहत
फिलहाल गंगा पार करने के लिए फाफामऊ पुल और आसपास के मार्गों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को कई बार जाम की समस्या का सामना करना पड़ता है। खासकर कार्यालय समय, स्कूल-कॉलेज खुलने और बंद होने के दौरान वाहनों का दबाव बढ़ जाता है।
सिक्सलेन पुल शुरू होने के बाद वाहनों को आवागमन का अतिरिक्त विकल्प मिलेगा। इससे पुराने मार्गों पर यातायात का दबाव कम होने और शहर के विभिन्न हिस्सों के बीच यात्रा का समय घटने की संभावना है।
निर्माण की गुणवत्ता से समझौता नहीं करने के निर्देश
उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों और निर्माण एजेंसी को यह भी स्पष्ट किया कि काम में तेजी लाने के नाम पर निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होना चाहिए। उन्होंने तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
पुल जैसी बड़ी परियोजना में निर्माण की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए निर्धारित समय में काम पूरा करने के साथ उसकी तकनीकी जांच और सुरक्षा संबंधी मानकों का पालन भी जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण से जुड़ी बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए। यदि किसी विभागीय समन्वय या संसाधनों की कमी के कारण काम प्रभावित हो रहा है तो उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए।
स्थानीय लोगों को लंबे समय से इंतजार
गंगा पर बन रहे इस सिक्सलेन पुल का स्थानीय लोगों को लंबे समय से इंतजार है। निर्माण पूरा होने के बाद न केवल शहर का यातायात सुगम होगा, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक और व्यावसायिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
व्यापारियों, नौकरीपेशा लोगों, विद्यार्थियों और रोजाना शहर आने-जाने वाले लोगों को इससे फायदा हो सकता है। इसके अलावा प्रयागराज से आसपास के जिलों की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है।
हालांकि, परियोजना में पहले हो चुकी देरी को देखते हुए अब सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय सीमा का पालन करना है। निर्माण एजेंसी को शेष काम पूरा करने के साथ आवश्यक परीक्षण और सुरक्षा संबंधी औपचारिकताएं भी पूरी करनी होंगी।
फिलहाल उप मुख्यमंत्री के निरीक्षण के बाद निर्माण कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि अधिकारी और कार्यदायी संस्था 25 दिसंबर की समय सीमा का कितना पालन कर पाते हैं।