अयोध्या। दीपावली के पावन पर्व को यादगार बनाने के लिए रामनगरी अयोध्या में तैयारियां तेज हो गई हैं। भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर बने भव्य राम मंदिर को दीपों से सजाने की विशेष योजना तैयार की जा रही है। इस बार मंदिर परिसर में दो लाख दीये जलाने की तैयारी की जानकारी सामने आई है। छोटी दीपावली और बड़ी दीपावली पर अलग-अलग दिन एक-एक लाख दीयों से राम मंदिर परिसर को रोशन करने की योजना है। खास बात यह है कि इन दीयों को पर्यावरण अनुकूल तरीके से देशी गाय के गोबर, मोम और सरसों के तेल की मदद से तैयार किया जा रहा है। इनके निर्माण में नगर निगम की बैसिंह स्थित कान्हा गौशाला के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों को भी जोड़ा गया है।
गोबर, मोम और सरसों के तेल से तैयार हो रहे दीये
राम मंदिर में इस बार दीपोत्सव के दौरान पारंपरिक और पर्यावरण अनुकूल दीयों का इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए देशी गाय के गोबर से विशेष प्रकार के दीपक तैयार किए जा रहे हैं। इन्हें बनाने में मोम और सरसों के तेल का भी उपयोग किया जा रहा है। उद्देश्य ऐसे दीयों का निर्माण करना है, जो दीपावली की धार्मिक परंपरा के साथ स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और पर्यावरण के अनुकूल हों।
दीयों के निर्माण की जिम्मेदारी केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रखी गई है। नगर निगम की बैसिंह स्थित कान्हा गौशाला में कारीगरों की टीम लगातार काम कर रही है। इसके अलावा महिला स्वयं सहायता समूहों को भी इस काम से जोड़ा गया है। इससे त्योहार की तैयारियों के साथ महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का अवसर भी तैयार हो रहा है।
कान्हा गौशाला में मशीनों से हो रहा निर्माण
नगर निगम की कान्हा गौशाला में दर्जनों कारीगर मशीनों की सहायता से दीयों का निर्माण कर रहे हैं। बड़ी संख्या में दीयों की जरूरत को देखते हुए उत्पादन का काम व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। मशीनों की मदद से कम समय में अधिक दीपक तैयार किए जा रहे हैं।
कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्धारित समय के भीतर पर्याप्त संख्या में दीये तैयार करना है। इसके लिए कच्चे माल की उपलब्धता और निर्माण प्रक्रिया को लगातार संचालित किया जा रहा है। तैयार होने के बाद दीयों को सुखाने, उनकी गुणवत्ता देखने और पैकिंग करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण होगी।
महिला समूहों को भी मिला रोजगार
इस आयोजन की खास बात यह है कि दीयों के निर्माण में महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। महिला समूहों के माध्यम से उत्पादन कार्य को अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे स्थानीय महिलाओं को अपनी आजीविका मजबूत करने का अवसर मिल सकता है।
स्वयं सहायता समूह ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। छोटे उद्योगों, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के निर्माण से उन्हें आमदनी के नए स्रोत मिलते हैं। अयोध्या में दीपावली के लिए दीये तैयार करने की यह पहल भी इसी दिशा में एक प्रयास है।
दो दिनों तक जगमगाएगा राम मंदिर परिसर
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, छोटी दीपावली पर एक लाख और बड़ी दीपावली पर एक लाख दीये जलाने की योजना बताई गई है। इस तरह दोनों दिनों में कुल दो लाख दीयों से मंदिर परिसर को सजाने की तैयारी है। मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों में दीपक सजाने और उन्हें सुरक्षित तरीके से प्रज्वलित करने के लिए विशेष व्यवस्था की आवश्यकता होगी।
दीपावली भगवान श्रीराम के वनवास से अयोध्या लौटने की स्मृति से जुड़ा पर्व है। मान्यता है कि भगवान राम के आगमन पर अयोध्यावासियों ने पूरे नगर को दीपों से सजाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा को याद करते हुए अयोध्या में हर वर्ष दीपोत्सव का विशेष आयोजन होता है।
अयोध्या में दीपोत्सव की व्यापक तैयारियां
राम मंदिर परिसर के अलावा पूरी अयोध्या में भी दीपोत्सव को लेकर तैयारियां चल रही हैं। सरयू नदी के घाटों, राम की पैड़ी और प्रमुख धार्मिक स्थलों को सजाने की योजना बनाई गई है। इस वर्ष दीपोत्सव का दसवां संस्करण आयोजित किया जा रहा है। शहर के स्तर पर 33 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
मंदिर ट्रस्ट की ओर से राम जन्मभूमि परिसर में करीब एक लाख दीये जलाने की अलग योजना घोषित की गई है। इसके लिए लगभग एक हजार स्वयंसेवकों की जिम्मेदारी तय की गई है। मंदिर परिसर को पांच हिस्सों में बांटकर तैयारियां की जा रही हैं।
इस तरह मंदिर परिसर का दीपोत्सव और सरयू घाटों पर होने वाला व्यापक दीपोत्सव अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत आयोजित किए जा रहे हैं।
स्थानीय कारीगरों और कारोबारियों को भी मिलेगा लाभ
दीपावली के लिए बड़े पैमाने पर दीयों के निर्माण से स्थानीय कारीगरों और छोटे कारोबारियों को भी काम मिलने की संभावना है। त्योहारों के दौरान मिट्टी और अन्य पारंपरिक सामग्री से बने दीपकों की मांग बढ़ जाती है। इस बार गोबर से बने दीयों को भी विशेष महत्व दिए जाने से स्थानीय स्तर पर नए उत्पादों को पहचान मिल सकती है।
कुल मिलाकर अयोध्या में दीपावली की तैयारियां केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से स्थानीय रोजगार, महिला सशक्तीकरण और पारंपरिक उत्पादों को प्रोत्साहन देने का प्रयास भी किया जा रहा है।
भगवान श्रीराम की नगरी में दीपों की रोशनी के बीच इस बार पर्यावरण अनुकूल दीयों का उपयोग विशेष आकर्षण बन सकता है। अब सभी की नजरें दीपोत्सव की तैयारियों और अंतिम आयोजन पर टिकी हैं।