गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित दीनदयाल उपाध्याय (DDU) विश्वविद्यालय ने संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। विश्वविद्यालय ने सभी स्ववित्तपोषित (Self-financed) पाठ्यक्रमों में कार्यरत संविदा सहायक आचार्यों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्धारित वेतनमान के अनुसार वेतन देने का निर्णय लिया है। इस फैसले के तहत अब इन शिक्षकों को ₹57,700 का प्रारंभिक मूल वेतन (Basic Salary) मिलेगा।
यह महत्वपूर्ण निर्णय कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित वित्त समिति की बैठक में लिया गया। बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, प्रशासनिक और शोध विकास से जुड़े कई अहम प्रस्तावों पर भी मुहर लगी।
अब सभी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को मिलेगा लाभ
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, अब तक यूजीसी वेतनमान का लाभ केवल इंजीनियरिंग, कृषि, होटल मैनेजमेंट और फार्मेसी विभागों में कार्यरत संविदा सहायक आचार्यों को ही मिलता था। लेकिन वित्त समिति के नए फैसले के बाद यह सुविधा अन्य स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों तक भी विस्तारित कर दी गई है।
इसमें बीए एलएलबी, मैनेजमेंट, बैंकिंग एंड इंश्योरेंस समेत सभी स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में कार्यरत संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर शामिल होंगे। इस निर्णय से विश्वविद्यालय के बड़ी संख्या में शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा।
विश्वविद्यालय का मानना है कि बेहतर वेतन मिलने से शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे छात्रों को भी बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
शोध गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी बड़ा कदम
वित्त समिति ने शोध कार्यों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से एक और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब नए पीएचडी पंजीकरण के दौरान यदि किसी शोधार्थी का शोध निर्देशक संबद्ध महाविद्यालय में कार्यरत है, तो उस शोधार्थी द्वारा जमा किए गए शुल्क का 10 प्रतिशत संबंधित कॉलेज को दिया जाएगा।
विश्वविद्यालय के अनुसार, इस राशि का उपयोग कॉलेज अपनी शोध प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, शोध संसाधनों और अन्य शोध अवसंरचना को विकसित करने में करेंगे। इससे संबद्ध महाविद्यालयों में रिसर्च सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
कुलपति ने बताई प्राथमिकता
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकता गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, उत्कृष्ट शोध और अकादमिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि वित्त समिति के ये फैसले न केवल शिक्षकों के हितों को मजबूत करेंगे, बल्कि संबद्ध महाविद्यालयों में शोध सुविधाओं के विकास को भी नई दिशा देंगे।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि प्रत्येक शिक्षक और शोधार्थी को बेहतर शैक्षणिक माहौल, आधुनिक संसाधन और शोध के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
DDU विश्वविद्यालय के इस फैसले को संविदा शिक्षकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। लंबे समय से समान वेतनमान की मांग कर रहे शिक्षकों को अब यूजीसी के अनुरूप प्रारंभिक मूल वेतन मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और विश्वविद्यालय में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं शोध को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।