उत्तर प्रदेश : योगी आदित्यनाथ सरकार ने हाउस टैक्स, वाटर टैक्स और सीवर टैक्स समेत संपत्तिकर के बकायेदारों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में एकमुश्त समाधान योजना यानी OTS लागू की जा रही है। इस योजना के तहत बकाया मूल कर जमा करने पर उस पर लगा पूरा ब्याज माफ किया जाएगा। सरकार के इस फैसले से लंबे समय से संपत्तिकर के बकाये में फंसे लाखों नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, दूसरी ओर नगर निकायों को भी लंबे समय से अटके राजस्व की वसूली का रास्ता मिलेगा।
गोरखपुर नगर निगम के आंकड़ों से इस योजना के असर का अंदाजा लगाया जा सकता है। शहर में गृहकर, जलकर और सीवरकर यानी संपत्तिकर के 1,44,894 से अधिक बकायेदार इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। इन बकायेदारों पर कुल 258.47 करोड़ रुपये का कर बकाया है। इसमें 186.76 करोड़ रुपये मूल कर और 71.71 करोड़ रुपये ब्याज की राशि शामिल है। OTS के तहत पात्र बकायेदार यदि अपना मूल कर जमा करते हैं तो 71.71 करोड़ रुपये तक के ब्याज की पूरी रकम माफ हो सकती है।
सरकार की ओर से लागू की जा रही यह योजना 15 अगस्त 2026 से शुरू होकर 15 दिसंबर 2026 तक चलेगी। योजना का लाभ एक अप्रैल 2026 तक के बकायेदारों को दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बकाया संपत्तिकर की वसूली को आसान बनाना और लोगों को पुराने टैक्स विवाद या लंबित भुगतान से बाहर निकलने का अवसर देना है।
OTS योजना में बकायेदारों को भुगतान के लिए किस्त की सुविधा भी दी गई है। योजना के तहत आवेदन करने वाले करदाता को आवेदन की तारीख से 30 दिन के भीतर मूल संपत्तिकर की कम से कम एक तिहाई राशि जमा करनी होगी। इसके बाद बची हुई दो तिहाई राशि अधिकतम दो मासिक किस्तों में जमा की जा सकेगी। इस तरह करदाता कुल बकाया मूल राशि को अधिकतम तीन किस्तों में चुका सकेंगे। हालांकि, पूरी मूल राशि का भुगतान निर्धारित अवधि के भीतर करना अनिवार्य होगा।
योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया को भी आसान रखा गया है। बकायेदार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन कर सकेंगे। नगर निगम स्तर पर इसके लिए हेल्प डेस्क भी स्थापित की जाएगी, जहां नागरिक योजना से जुड़ी जानकारी हासिल कर सकते हैं। आवेदन स्वीकार करने की अंतिम तारीख 14 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है, जबकि सभी आवेदनों का निस्तारण 15 दिसंबर तक किया जाएगा।
गोरखपुर नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी राकेश कुमार के अनुसार, OTS योजना से बड़ी संख्या में बकायेदारों के अपना पुराना टैक्स जमा करने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि योजना की अवधि समाप्त होने के बाद भी यदि बकायेदार कर जमा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ नियमानुसार वसूली और प्रवर्तन की कार्रवाई की जाएगी। यानी सरकार ने राहत के साथ-साथ यह भी स्पष्ट किया है कि योजना की समयसीमा समाप्त होने के बाद बकाया रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
संपत्तिकर नगर निकायों की आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। इसी राजस्व से शहरों में सड़क, नाली, सफाई, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति और दूसरी नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामों को गति मिलती है। लंबे समय तक टैक्स बकाया रहने से नगर निकायों के राजस्व पर असर पड़ता है। ऐसे में OTS के जरिए एक साथ बड़ी संख्या में बकायेदारों से मूल कर की वसूली होने पर स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकती है।
सरकार की इस पहल से उन नागरिकों को सबसे अधिक फायदा मिलने की संभावना है, जिनका मूल टैक्स बकाया तो सीमित है लेकिन वर्षों से ब्याज जुड़ने के कारण कुल देनदारी काफी बढ़ गई है। ऐसे मामलों में ब्याज माफी के बाद करदाता को केवल निर्धारित मूल राशि चुकानी होगी। इससे पुराने बकाये का निपटारा करना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की OTS योजना बकायेदारों और नगर निकायों दोनों के लिए महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। एक ओर नागरिकों को ब्याज में पूरी छूट और किस्तों में भुगतान की सुविधा मिलेगी, वहीं दूसरी ओर नगर निगमों को लंबे समय से अटके संपत्तिकर की वसूली का मौका मिलेगा। 15 अगस्त से शुरू होने वाली इस योजना के तहत बकायेदारों को तय समयसीमा में आवेदन कर मूल कर जमा करना होगा। योजना का लाभ उठाने वालों के लिए यह पुराने टैक्स बकाये से राहत पाने का महत्वपूर्ण अवसर है।