आर्थिक रूप से कमजोर 800 कैदियों को बड़ा झटका कानूनी मदद पर संकट
800 जरूरतमंद कैदियों की कानूनी लड़ाई अटकी एलएडीसी व्यवस्था पर रोक
गाजियाबाद : आर्थिक रूप से कमजोर और कानूनी सहायता के लिए निर्भर करीब 800 कैदियों की पैरवी प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) के अनुबंधों के नवीनीकरण पर रोक लगने के बाद जेल में बंद ऐसे कैदियों के मामलों में मुफ्त कानूनी प्रतिनिधित्व को लेकर स्थिति असमंजस में है।
LADC व्यवस्था का उद्देश्य उन लोगों को आपराधिक मामलों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है, जो निजी वकील की फीस वहन करने में सक्षम नहीं हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी यह व्यवस्था पात्र लाभार्थियों और विचाराधीन कैदियों को कानूनी प्रतिनिधित्व देने के लिए संचालित की जा रही है।
800 कैदियों के मामलों पर असर की आशंका
अनुबंध नवीनीकरण पर रोक के चलते करीब 800 जरूरतमंद कैदियों के मामलों में पैरवी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इनमें ऐसे कैदी भी हो सकते हैं, जिनके मामलों की सुनवाई अदालतों में चल रही है और जिन्हें LADC के माध्यम से अधिवक्ता उपलब्ध कराया गया है।
यदि नियुक्त वकीलों की सेवाएं बाधित होती हैं तो इन मामलों की सुनवाई और कानूनी प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में संबंधित प्राधिकरण के सामने जल्द वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करने की चुनौती है।
क्या है LADC व्यवस्था?
Legal Aid Defense Counsel System (LADCS) को राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) ने आपराधिक मामलों में जरूरतमंद लोगों को प्रभावी कानूनी सहायता देने के लिए शुरू किया है। इसके तहत पूर्णकालिक वकीलों की टीम के माध्यम से पात्र लोगों को अदालत में कानूनी प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराया जाता है। केंद्र सरकार के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, 31 दिसंबर 2025 तक देश के 680 जिलों में LADC कार्यालय कार्यरत थे और योजना के तहत बड़ी संख्या में विचाराधीन कैदियों को कानूनी प्रतिनिधित्व दिया गया था।
नवीनीकरण पर रोक से बढ़ी चिंता
LADC वकीलों के अनुबंध का नवीनीकरण नहीं होने से उन कैदियों के सामने नई कानूनी सहायता व्यवस्था की जरूरत पैदा हो सकती है, जिनकी पैरवी इन्हीं अधिवक्ताओं के माध्यम से चल रही है। मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित प्राधिकरण अनुबंध नवीनीकरण को लेकर क्या फैसला लेते हैं और तब तक आर्थिक रूप से कमजोर कैदियों को बिना किसी कानूनी सहायता के न रहना पड़े, इसके लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था की जाती है।
मुफ्त कानूनी सहायता का अधिकार महत्वपूर्ण
आर्थिक स्थिति के कारण किसी व्यक्ति की प्रभावी कानूनी पैरवी प्रभावित न हो, इसके लिए देश में विधिक सेवा प्राधिकरणों के जरिए मुफ्त कानूनी सहायता की व्यवस्था है। ऐसे में LADC से जुड़े अनुबंधों का मुद्दा केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि जरूरतमंद कैदियों की न्याय तक पहुंच से भी जुड़ा हुआ है।