117 करोड़ मुआवजा घोटाले की जांच में बड़ा बदलाव

Update: 2026-07-13 16:19 GMT

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण में जमीन अधिग्रहण के दौरान हुए 117 करोड़ रुपये के अतिरिक्त मुआवजा घोटाले की जांच अब राज्य विजिलेंस ब्यूरो करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) को जांच से मुक्त करते हुए विजिलेंस को तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जांच की नई जिम्मेदारी राज्य विजिलेंस ब्यूरो को दी। पीठ में मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जायमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना शामिल थे। सुनवाई के दौरान एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश की थी।

एसआईटी की रिपोर्ट में इस मामले में छह एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई। इनमें तीन मामले अधिकारियों और अन्य लोगों की कथित मिलीभगत से जुड़े थे, जबकि तीन एफआईआर आय से अधिक संपत्ति के मामलों में दर्ज की गई थीं।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों पर किसानों को अधिक मुआवजा दिलाने के नाम पर अवैध वसूली करने के आरोप लगे हैं। आरोप है कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन कर अतिरिक्त मुआवजा जारी किया गया, जिससे सरकारी धन को नुकसान पहुंचा।

मामला नोएडा प्राधिकरण में जमीन अधिग्रहण से जुड़े मुआवजे में अनियमितताओं का है। आरोप है कि कुछ अधिकारियों और संबंधित लोगों ने मिलीभगत कर मुआवजे की राशि बढ़ाने में भूमिका निभाई। इसके बाद इस मामले की जांच शुरू की गई और कई स्तरों पर कार्रवाई हुई।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब विजिलेंस ब्यूरो पूरे मामले की नए सिरे से जांच करेगा। विजिलेंस को निर्धारित समय सीमा के अंदर जांच पूरी कर अदालत को रिपोर्ट सौंपनी होगी। इससे मामले में शामिल अधिकारियों और अन्य आरोपितों की भूमिका की विस्तृत जांच की जाएगी।

एसआईटी ने अपनी जांच के दौरान कई दस्तावेजों और तथ्यों की पड़ताल की थी। जांच रिपोर्ट में दर्ज एफआईआर के आधार पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। अब विजिलेंस ब्यूरो इन मामलों को आगे बढ़ाएगा और आरोपों की पुष्टि के लिए नए सिरे से जांच करेगा।

मुआवजा घोटाले का मामला सामने आने के बाद नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे थे। जमीन अधिग्रहण से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर यह मामला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

विजिलेंस जांच के बाद यह साफ हो सकेगा कि मुआवजा वितरण में किन स्तरों पर गड़बड़ी हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जांच की जिम्मेदारी राज्य विजिलेंस ब्यूरो के पास है। तीन महीने की समय सीमा में रिपोर्ट आने के बाद ही इस मामले में आगे की दिशा स्पष्ट होगी।

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