वाराणसी: बाबा काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक का संकल्प लेकर निकले अशोक उर्फ मन्नू सोनी अपनी यात्रा के अनोखे तरीके से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। बलिया के रसड़ा निवासी मन्नू प्रयागराज से जल लेकर हाथों के बल काशी की ओर बढ़ रहे हैं। शुक्रवार, 23 अक्टूबर की शाम वह यात्रा के 94वें दिन वाराणसी के रूपापुर पहुंचे। पैरों को ऊपर रखते हुए दोनों हाथों के सहारे आगे बढ़ते मन्नू को देखकर राहगीर ठहर जाते हैं। उनकी मंजिल बाबा विश्वनाथ का दरबार है, जहां वह अपने साथ लाया जल अर्पित करना चाहते हैं। इस यात्रा का केंद्र उनका व्यक्तिगत धार्मिक संकल्प है। सामान्य पैदल यात्रा से अलग उन्होंने शरीर का भार हाथों पर रखकर आगे बढ़ने का तरीका चुना है। इस वजह से सफर की गति भी सामान्य यात्रा जैसी नहीं है। दिनों और सप्ताहों में आगे बढ़ती यह यात्रा अब काशी के निकट पहुंच चुकी है। हालांकि, मंदिर पहुंचने और जलाभिषेक की निश्चित तारीख की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
प्रयागराज से जल लेकर शुरू किया सफर
मन्नू सोनी के मन में बाबा विश्वनाथ को जल अर्पित करने की इच्छा हुई। इसके बाद उन्होंने प्रयागराज से जल लेकर हाथों के बल मंदिर तक जाने का संकल्प लिया। ताजा जानकारी के अनुसार, वह कछवांरोड पार कर रूपापुर पहुंचे हैं। रास्ते में उनका यात्रा करने का तरीका लोगों के कौतूहल का विषय बन रहा है। पैरों को ऊपर उठाकर हाथों से आगे बढ़ते हुए उनका दृश्य सामान्य यात्रियों से अलग है। उपलब्ध विवरण में उनके लिए किसी औपचारिक स्वागत समारोह या प्रशासनिक आयोजन का उल्लेख नहीं है। यात्रा अभी जारी है और उसका अंतिम पड़ाव काशी विश्वनाथ मंदिर होगा। jagran.com
हर दिन थोड़ा सफर, फिर अगले पड़ाव की तैयारी
यात्रा के पहले चरण से संबंधित एक रिपोर्ट में मन्नू सोनी ने प्रतिदिन करीब 800 मीटर से एक किलोमीटर तक आगे बढ़ने की बात कही थी। उस समय वह 86 दिनों का सफर पूरा कर महराजगंज पहुंचे थे। उन्होंने बताया था कि शाम को किसी मंदिर में विश्राम करने के बाद अगली सुबह फिर यात्रा शुरू करते हैं। यह जानकारी उनकी दैनिक दिनचर्या की झलक देती है। हालांकि, हर दिन तय की गई वास्तविक दूरी का स्वतंत्र रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसलिए पूरे मार्ग की दूरी और पहुंचने की तारीख का अनुमान केवल दैनिक औसत के आधार पर नहीं लगाया जा सकता। उनका सफर छोटे-छोटे पड़ावों के साथ आगे बढ़ रहा है। 
पहले भी ऐसी यात्रा करने का बताया अनुभव
पूर्व रिपोर्ट में मन्नू ने बताया था कि वह इससे पहले भी हाथों के सहारे धार्मिक यात्रा कर चुके हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2022-23 में उन्होंने बाबा बैद्यनाथ के दर्शन से जुड़ी यात्रा इसी तरह की थी। उस यात्रा में सुल्तानगंज से बासुकीनाथ तक पहुंचने में 163 दिन लगने की बात उन्होंने कही थी। पूर्व यात्रा का यह विवरण उनके अपने कथन पर आधारित है। वर्तमान सफर में भी उन्होंने अपनी आस्था को आगे बढ़ने का आधार बताया है। उनके लिए मंदिर पहुंचना केवल एक स्थान तक पहुंचने का लक्ष्य नहीं, बल्कि लिए गए संकल्प को पूरा करने का प्रयास है। 
काशी विश्वनाथ धाम का धार्मिक महत्व
मन्नू जिस मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं, वह भगवान शिव के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है। काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी में गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित है। इसे देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में स्थान प्राप्त है। वाराणसी को काशी भी कहा जाता है और इसी पहचान के साथ मंदिर का नाम जुड़ा है। श्रद्धालुओं के लिए यहां दर्शन और पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है। मन्नू की यात्रा भी इसी आस्था से जुड़ी है। उनके संकल्प को समझने के लिए मंदिर के प्रति उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा महत्वपूर्ण है। इसे सभी श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक पूजा पद्धति या यात्रा की अनिवार्य शर्त नहीं माना जाना चाहिए। 
आस्था की अलग-अलग अभिव्यक्तियां
तीर्थयात्रा में श्रद्धालु अपनी परिस्थितियों और विश्वास के अनुसार शामिल होते हैं। कोई परिवार के साथ दर्शन करने पहुंचता है, तो कोई पैदल यात्रा का संकल्प लेता है। मन्नू ने अपने लिए हाथों के सहारे यात्रा का रास्ता चुना है। उनकी कहानी में यात्रा का यही स्वरूप सबसे अधिक ध्यान आकर्षित कर रहा है। किसी व्यक्ति के कठिन संकल्प का सम्मान करते हुए उसे चमत्कार या अलौकिक क्षमता का प्रमाण बताना उचित नहीं होगा। उपलब्ध जानकारी उनकी यात्रा, उसके पड़ाव और धार्मिक उद्देश्य तक सीमित है। उनके स्वास्थ्य, प्रशिक्षण या साथ चलने वाले लोगों के बारे में विस्तृत पुष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
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