लखनऊ : उत्तर प्रदेश में इस बार मानसून को लेकर लगाए जा रहे कई अनुमान अब तक सही साबित नहीं हुए हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, देश और खासतौर पर उत्तर प्रदेश में न तो अल नीनो का बड़ा असर देखने को मिला है और न ही ला नीना जैसी स्थिति बनी है। दोनों ही समुद्री घटनाएं देश के मौसम और बारिश के पैटर्न को प्रभावित करती हैं, लेकिन इस मानसून सीजन में इनका प्रभाव सीमित रहा है। फिलहाल प्रदेश में बारिश सामान्य श्रेणी में बनी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो की स्थिति बनने पर भारत में मानसून कमजोर पड़ने और बारिश कम होने की संभावना रहती है, जबकि ला नीना के दौरान सामान्य से अधिक बारिश होने की उम्मीद बढ़ जाती है। इस साल शुरुआती पूर्वानुमानों में अल नीनो के प्रभाव की आशंका जताई गई थी, जिसके कारण औसत से कम बारिश होने की संभावना बताई जा रही थी। हालांकि, अब तक के आंकड़ों में ऐसा कोई बड़ा प्रभाव नजर नहीं आया है।
उत्तर प्रदेश में जुलाई महीने में बारिश सामान्य के आसपास बनी हुई है। कई जिलों में बारिश सामान्य से अधिक भी दर्ज की गई है, जबकि कुछ क्षेत्रों में कमी जरूर बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में इस समय करीब 25 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की जा रही है, लेकिन आने वाले महीनों में इसकी भरपाई होने की संभावना जताई जा रही है।
मंगलवार को कानपुर समेत कई इलाकों में हुई झमाझम बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया। बुधवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। बारिश के कारण लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिली है। वहीं किसानों के लिए भी यह बारिश राहत लेकर आई है, क्योंकि खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त नमी की जरूरत होती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस मानसून सीजन की शुरुआत में समुद्री गतिविधियों और कुछ मौसमी परिस्थितियों के कारण बारिश की रफ्तार थोड़ी कमजोर रही थी। बार्वी तूफान ने भी मौसम को प्रभावित किया था। इसके कारण वातावरण में नमी का स्तर अचानक कम हुआ था और बारिश की गतिविधियों में कमी आई थी। हालांकि, इसका असर लंबे समय तक नहीं रहा।
इसके बाद पूर्वोत्तर भारत में बारिश की गतिविधियां तेज हुईं और धीरे-धीरे मानसून की सक्रियता पूरे देश में बढ़ने लगी। वर्तमान में मानसूनी सिस्टम लगातार सक्रिय बना हुआ है, जिसके कारण अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश हो रही है।
मौसम विभाग का अनुमान है कि अगस्त और सितंबर महीने में मानसून की स्थिति और बेहतर हो सकती है। समुद्री गतिविधियों में बदलाव और मौसमी परिस्थितियों के अनुकूल रहने से जुलाई में हुई बारिश की कमी को आने वाले महीनों में पूरा किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून का सामान्य रहना कृषि और जल संसाधनों के लिए सकारात्मक संकेत है। उत्तर प्रदेश जैसे कृषि प्रधान राज्य में बारिश का सीधा असर किसानों की आय और फसल उत्पादन पर पड़ता है। धान, गन्ना और अन्य खरीफ फसलों के लिए समय पर बारिश बेहद जरूरी होती है।
हालांकि मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में तेज बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं। प्रशासन को भी जलभराव और अन्य समस्याओं से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
कुल मिलाकर इस मानसून सीजन में यूपी में बारिश का स्वरूप सामान्य बना हुआ है। अल नीनो और ला नीना जैसी बड़ी समुद्री घटनाओं का प्रभाव अब तक देखने को नहीं मिला है। मौसम विशेषज्ञों को उम्मीद है कि मानसून के अंतिम चरण में अच्छी बारिश के साथ प्रदेश में शुरुआती कमी काफी हद तक पूरी हो जाएगी।