मेरठ : उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला की जेल में दिनचर्या बदल गई है। मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने बुधवार, 14 अक्टूबर को दोनों को सौरभ राजपूत की हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में मृत्युदंड सुनाया था। इसके बाद जेल प्रशासन ने दोनों के लिए निर्धारित कपड़ों, अलग-अलग बैरकों और काम की व्यवस्था की है। मुस्कान को जेल में सिलाई का काम सौंपा गया है, जबकि साहिल को खेती-बाड़ी से जुड़े कार्य करने होंगे। जेल प्रशासन से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, फैसले के बाद दोनों बेचैन बताए गए हैं। वहीं, मुस्कान अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर चिंतित है।
मुस्कान को साड़ी-सूट, साहिल को सफेद कुर्ता-पायजामा
मौत की सजा सुनाए जाने के बाद जेल प्रशासन ने दोनों दोषियों को जेल के निर्धारित कपड़े उपलब्ध कराए हैं। मुस्कान रस्तोगी को एक सफेद साड़ी और क्रीम रंग का एक सूट दिया गया है। वहीं, साहिल शुक्ला को सफेद रंग के दो जोड़ी कुर्ता-पायजामे उपलब्ध कराए गए हैं। अब दोनों को जेल में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार रहना होगा। जेल प्रशासन के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल को सजायाफ्ता बंदियों की श्रेणी में रखा गया है। उनके लिए जेल नियमों के मुताबिक आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।
मुस्कान करेगी सिलाई, साहिल को मिला खेती का काम
जेल में दोनों दोषियों को अलग-अलग काम सौंपे गए हैं। मुस्कान रस्तोगी को सिलाई का कार्य दिया गया है, जबकि साहिल शुक्ला को जेल में खेती-बाड़ी से संबंधित काम करने के लिए निर्धारित किया गया है। जेल प्रशासन की यह व्यवस्था बंदियों के दैनिक कार्यों और निर्धारित नियमों के अंतर्गत की गई है। अब दोनों की रोजमर्रा की गतिविधियां जेल प्रशासन की निगरानी में संचालित होंगी। काम के साथ जेल की अन्य आवश्यक गतिविधियों में भी निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। जेल की नई व्यवस्था के बारे में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार। जेल रिकॉर्ड में दोनों की पहचान निर्धारित बंदी नंबरों के माध्यम से दर्ज की गई है। प्रशासन इन रिकॉर्डों का उपयोग बंदियों से संबंधित व्यवस्थाओं और गतिविधियों को दर्ज करने के लिए करता है।
फांसी का फैसला आने से पहले नहीं आई थी नींद
जेल प्रशासन से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, अदालत के फैसले से पहले ही मुस्कान और साहिल तनाव में थे। दोनों ने फैसले से पहले की रात ठीक से नींद नहीं ली थी। बताया गया कि दोनों ने रात में सामान्य से कम भोजन किया और अगले दिन सुबह भी ठीक से नाश्ता नहीं किया। मौत की सजा सुनाए जाने के बाद दोनों के बेचैन होने की जानकारी सामने आई। हालांकि, उनकी मानसिक स्थिति को लेकर कोई चिकित्सकीय निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया गया है। जेल प्रशासन ने बताया कि दोनों को निर्धारित जेल नियमों के अनुसार रखा जा रहा है।
बेटियों की परवरिश को लेकर चिंतित मुस्कान
अदालत से मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मुस्कान रस्तोगी की बेटियों की परवरिश को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, मुस्कान की एक छोटी बेटी जेल में उसके साथ रह रही है। वहीं, उसकी बड़ी बेटी की देखभाल परिवार के स्तर पर की जा रही है। मुस्कान ने सजा से संबंधित सुनवाई के दौरान बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई थी। बचाव पक्ष ने भी अदालत के समक्ष बच्चों की परवरिश और मुस्कान की उम्र का हवाला देकर नरमी बरतने की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने अपराध की गंभीरता और पेश किए गए साक्ष्यों को देखते हुए दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।
मुस्कान के माता-पिता ने अदालत में दिया था लिखित बयान
इस हत्याकांड में मुस्कान के माता-पिता के रुख को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, सजा सुनाए जाने से पहले मुस्कान के माता-पिता ने अदालत में लिखित रूप से कहा था कि यदि उनकी बेटी को फांसी की सजा दी जाती है, तो उन्हें इस फैसले पर आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने मृतक सौरभ राजपूत को अच्छा व्यक्ति बताया। बताया गया कि मुस्कान के माता-पिता उससे मिलने जेल भी नहीं गए थे। इस घटनाक्रम ने मामले के पारिवारिक पहलुओं को भी चर्चा में ला दिया है।
अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई। अदालत ने इससे पहले 30 सितंबर 2026 को दोनों को सौरभ राजपूत की हत्या और साक्ष्य नष्ट करने के मामले में दोषी ठहराया था। मामले में 126 सुनवाई हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाह पेश किए गए। सरकारी पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए अधिकतम सजा देने की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष ने दोनों की उम्र, जेल में आचरण, सुधार की संभावना और बच्चों के भविष्य का हवाला देकर कम सजा देने का अनुरोध किया। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और तर्कों पर विचार करने के बाद मृत्युदंड सुनाया।
महाभारत का उल्लेख करते हुए सुनाया फैसला
अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार, जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने फैसले के दौरान महाभारत का उल्लेख किया। उन्होंने अपराध की गंभीरता के अनुरूप दंड देने के सिद्धांत पर टिप्पणी की। अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत के परिजनों ने संतोष जताया। कोर्ट परिसर में मौजूद कुछ लोगों ने नारे भी लगाए। सौरभ की मां लंबे समय से दोनों दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रही थीं। फैसले के बाद परिवार ने न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करने वाले लोगों और गवाहों का आभार व्यक्त किया।
Tags: