राम मंदिर में पुजारियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू, रामानंदी परंपरा में दिखेंगे सभी पुजारी
अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में पुजारियों के लिए नया परिधान लागू कर दिया गया है। शनिवार से मंदिर में सेवा देने वाले सभी पुजारी एक समान पारंपरिक वेशभूषा में नजर आएंगे। श्री राम जन्मभूमि मंदिर न्यास की धार्मिक समिति की सदस्य मिथिलेश नंदिनी शरण के अनुसार, पुजारियों का नया परिधान रामानंदी परंपरा के अनुरूप निर्धारित किया गया है। इसके तहत पुजारी हल्के पीले रंग की रेशमी धोती और उसी रंग का रेशमी उत्तरीय धारण करेंगे।
राम मंदिर में भगवान रामलला की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों की व्यवस्था को परंपरागत स्वरूप देने की दिशा में इस फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मंदिर में अब तक पुजारी अलग-अलग पारंपरिक वस्त्रों में पूजा-अर्चना करते दिखाई देते थे, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी पुजारियों की वेशभूषा में एकरूपता दिखाई देगी। मंदिर प्रशासन की ओर से निर्धारित परिधान का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के अनुरूप मंदिर की पूजा व्यवस्था को और व्यवस्थित स्वरूप देना है।
मिथिलेश नंदिनी शरण ने बताया कि नए परिधान का निर्धारण रामानंदी परंपरा को ध्यान में रखते हुए किया गया है। भगवान राम की आराधना से रामानंदी संप्रदाय का विशेष संबंध माना जाता है। इसी परंपरा के अनुरूप पुजारियों के लिए हल्के पीले रंग की रेशमी धोती और उत्तरीय निर्धारित किया गया है। पूजा के दौरान पुजारी इसी निर्धारित वेशभूषा को धारण करेंगे।
सनातन धर्म में मंदिरों में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों के वस्त्रों का विशेष महत्व माना जाता है। अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और संप्रदायों में पूजा पद्धति के साथ पुजारियों की वेशभूषा भी निर्धारित होती है। अयोध्या में भगवान रामलला के मंदिर की धार्मिक परंपराओं को ध्यान में रखते हुए पुजारियों के लिए समान परिधान की व्यवस्था इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से मंदिर की पूजा व्यवस्था को लेकर विशेष नियम बनाए गए हैं। रामलला की नियमित पूजा, आरती, भोग और अन्य धार्मिक अनुष्ठान निर्धारित समय और विधि के अनुसार संपन्न कराए जाते हैं। इसके लिए पुजारियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि मंदिर में पूजा पद्धति और धार्मिक परंपराओं का पूरी तरह पालन किया जा सके।
अब पुजारियों की वेशभूषा में एकरूपता आने से मंदिर की धार्मिक व्यवस्था का स्वरूप भी अधिक पारंपरिक दिखाई देगा। हल्के पीले रंग की रेशमी धोती और उत्तरीय पहनकर पुजारी भगवान रामलला की सेवा करेंगे। पीले रंग का सनातन परंपरा में भी विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे शुभता, ज्ञान और आध्यात्मिकता से जोड़कर देखा जाता है।
राम मंदिर में प्रतिदिन देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान रामलला के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर की व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है। दर्शन व्यवस्था से लेकर सुरक्षा, प्रसाद, पूजा और श्रद्धालुओं की सुविधाओं तक कई स्तर पर बदलाव किए गए हैं। इसी बीच पुजारियों के लिए नया परिधान निर्धारित किए जाने से मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में भी एक नई एकरूपता जुड़ गई है।
रामानंदी परंपरा वैष्णव संप्रदाय की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक मानी जाती है। इसमें भगवान राम और भगवान विष्णु की आराधना को विशेष महत्व दिया जाता है। अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि होने के कारण रामानंदी परंपरा के प्रमुख केंद्रों में शामिल रही है। यहां बड़ी संख्या में रामानंदी परंपरा से जुड़े संत, महंत और धार्मिक संस्थाएं मौजूद हैं। ऐसे में राम जन्मभूमि मंदिर में पुजारियों के वस्त्रों को इस परंपरा के अनुरूप निर्धारित किया जाना धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला की सेवा के लिए नियुक्त पुजारियों की जिम्मेदारी भी काफी महत्वपूर्ण है। उन्हें भगवान की दैनिक पूजा के साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों को निर्धारित विधि-विधान से पूरा करना होता है। मंदिर में मंगला आरती से लेकर शयन आरती तक अलग-अलग धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। इस दौरान भगवान रामलला को भोग लगाने और विशेष अवसरों पर होने वाले अनुष्ठानों की जिम्मेदारी भी पुजारियों की होती है।
22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य समारोह आयोजित किया गया था। इसके बाद मंदिर देश के प्रमुख धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्रों में और अधिक महत्वपूर्ण बनकर उभरा। लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचकर रामलला के दर्शन कर चुके हैं। मंदिर परिसर में निर्माण और सुविधाओं के विस्तार का काम भी चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया है।
मंदिर प्रशासन की ओर से पूजा और धार्मिक व्यवस्थाओं में परंपरा तथा अनुशासन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। पुजारियों के लिए लागू किया गया नया ड्रेस कोड इसी व्यवस्था का हिस्सा है। इससे न केवल मंदिर में पुजारियों की अलग पहचान बनेगी, बल्कि रामानंदी परंपरा का स्वरूप भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
शनिवार से लागू हुई नई व्यवस्था के बाद अब श्री राम जन्मभूमि मंदिर के सभी पुजारी हल्के पीले रंग की रेशमी धोती और उसी रंग के रेशमी उत्तरीय में भगवान रामलला की सेवा करते नजर आएंगे। मंदिर की धार्मिक समिति ने इस परिधान को रामानंदी परंपरा के अनुरूप निर्धारित किया है। नई व्यवस्था के साथ राम मंदिर की पूजा पद्धति और पुजारियों की वेशभूषा में परंपरा तथा एकरूपता को और मजबूत करने का प्रयास किया गया है।