मीरजापुर। सिद्धपीठ विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर और विंध्य परिक्रमा पथ में अब सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने के लिए नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। जिला प्रशासन ने मंदिर परिसर की सुरक्षा, व्यवस्था और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रमों के लिए अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही आयोजकों को विंध्य विकास परिषद में 2100 रुपये का शुल्क जमा कर रसीद प्राप्त करनी होगी।
नई व्यवस्था के अनुसार, बिना अनुमति और शुल्क जमा किए मंदिर परिसर या परिक्रमा पथ में किसी भी तरह का सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकेगा। आयोजकों को पहले विंध्य विकास परिषद में आवेदन करना होगा। अनुमति मिलने के बाद निर्धारित शुल्क जमा कर उसकी रसीद प्राप्त करनी होगी। कार्यक्रम के दौरान रसीद और अनुमति पत्र दिखाना भी अनिवार्य होगा।
हालांकि, धार्मिक संस्कारों को इस व्यवस्था से अलग रखा गया है। मंदिर परिसर में होने वाले मुंडन संस्कार और यज्ञोपवीत संस्कार पहले की तरह पूरी तरह निश्शुल्क रहेंगे। इन धार्मिक आयोजनों के लिए श्रद्धालुओं से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
जिला प्रशासन का कहना है कि मां विंध्यवासिनी मंदिर परिसर और परिक्रमा पथ पर लगातार श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में यहां होने वाले आयोजनों को व्यवस्थित करना जरूरी हो गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और कार्यक्रमों के दौरान किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकना है।
प्रशासन के अनुसार, वर्ष 2025 में मंदिर परिसर में आयोजित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान आयोजकों द्वारा बिना अनुमति मंदिर की बिजली व्यवस्था का उपयोग कर लिया गया था। इसके कारण मंदिर की विद्युत लाइन प्रभावित हुई और करीब 12 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही थी। इसी तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अब अनुमति और शुल्क की व्यवस्था लागू की गई है।
विंध्य विकास परिषद के अधिकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था मंदिर परिसर में होने वाले कार्यक्रमों को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद करेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि कौन सा कार्यक्रम कब और किस स्थान पर आयोजित किया जा रहा है। साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को भी पहले से बेहतर तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने इस व्यवस्था को सकारात्मक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि मंदिर परिसर में कार्यक्रमों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में उन्हें व्यवस्थित तरीके से संचालित करना जरूरी है। नई व्यवस्था से श्रद्धालुओं को भी बेहतर सुविधा मिलेगी और विंध्य विकास परिषद की व्यवस्थाएं मजबूत होंगी।
विंध्य विकास परिषद के सचिव और नगर मजिस्ट्रेट अविनाश कुमार ने बताया कि नई प्रणाली का मुख्य उद्देश्य मंदिर परिसर में प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति या निर्धारित शुल्क जमा किए किसी भी कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मां विंध्यवासिनी मंदिर देशभर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी समय-समय पर आयोजित होते रहते हैं। ऐसे में प्रशासन की ओर से लागू की गई नई व्यवस्था को मंदिर परिसर में अनुशासन और सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।