न्यायिक भत्तों की आयकर छूट को लेकर हाईकोर्ट में याचिका, CBDT से जवाब तलब

Update: 2026-07-21 15:41 GMT

Prayagraj प्रयागराज :   इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यरत एक न्यायाधीश ने नई कर व्यवस्था चुनने के बाद वैधानिक न्यायिक भत्तों पर आयकर छूट नहीं मिलने को लेकर न्यायालय का रुख किया है। न्यायमूर्ति संदीप जैन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 जुलाई की तारीख निर्धारित की गई है।

न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई की। याचिका में न्यायमूर्ति संदीप जैन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जज (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22डी के तहत मिलने वाले वैधानिक भत्तों पर आयकर छूट नहीं दिए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के न्यायाधीशों को मिलने वाले कुछ विशेष भत्ते कानून के तहत निर्धारित हैं और उन्हें आयकर से छूट प्राप्त है। न्यायमूर्ति जैन ने तर्क दिया है कि नई कर व्यवस्था अपनाने के बाद भी इन वैधानिक न्यायिक भत्तों पर छूट का लाभ मिलना चाहिए।

याचिका के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट जज (वेतन और सेवा शर्तें) अधिनियम, 1954 की धारा 22डी के अंतर्गत न्यायाधीशों को मिलने वाले कई भत्तों को कुल आय की गणना से बाहर रखा गया है। इनमें किराए से मुक्त आधिकारिक आवास का मूल्य, उसके बदले मिलने वाला मकान किराया भत्ता, वाहन सुविधा, सत्कार भत्ता और अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

याचिका में कहा गया है कि ये सुविधाएं न्यायाधीशों की सेवा शर्तों का हिस्सा हैं और इन्हें वैधानिक अधिकार के रूप में प्रदान किया गया है। ऐसे में नई कर व्यवस्था के तहत भी इन पर आयकर छूट का लाभ मिलना चाहिए।

मामले में अब केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को अपना पक्ष रखना होगा। हाईकोर्ट ने CBDT से यह स्पष्ट करने को कहा है कि नई कर व्यवस्था में न्यायिक अधिकारियों को मिलने वाले इन वैधानिक भत्तों की स्थिति क्या है और आयकर छूट से संबंधित प्रावधान किस प्रकार लागू होंगे।

गौरतलब है कि नई कर व्यवस्था में करदाताओं को कई तरह की छूट और कटौतियों का लाभ सीमित रूप में मिलता है। इसी वजह से कई सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए विभिन्न भत्तों की कर देयता को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

न्यायमूर्ति संदीप जैन की याचिका में उठाया गया मुद्दा न्यायिक अधिकारियों के वेतन और सेवा शर्तों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है। हाईकोर्ट के फैसले का असर भविष्य में अन्य न्यायिक अधिकारियों और समान परिस्थितियों वाले मामलों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल हाईकोर्ट ने मामले में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अब सभी की नजर 28 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर रहेगी, जिसमें CBDT की ओर से जवाब दाखिल किए जाने के बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी।

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