रामपुर। उत्तर प्रदेश के रामपुर जिला कारागार में बंद पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान से समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेताओं की लगातार हो रही मुलाकातों ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इन मुलाकातों को केवल औपचारिक संवेदना के रूप में नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपने पुराने राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने की सपा की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने बुधवार को रामपुर पहुंचकर जेल में बंद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई। जेल से बाहर आने के बाद शिवपाल यादव ने आजम खान के साथ कथित रूप से हो रहे व्यवहार को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर कथित ज्यादतियों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
शिवपाल यादव ने राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर अखिलेश यादव मुख्यमंत्री और आजम खान गृह मंत्री बनेंगे। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गईं। हालांकि मंत्रिमंडल और पदों को लेकर अंतिम फैसला चुनाव के बाद निर्वाचित सरकार एवं पार्टी नेतृत्व के स्तर पर होता है, लेकिन शिवपाल का बयान आजम समर्थकों को स्पष्ट राजनीतिक संदेश देने वाला माना जा रहा है।
जेल में मुलाकात के बाद शिवपाल यादव आजम खान के परिवार से मिलने उनके आवास पहुंचे। उन्होंने आजम की पत्नी एवं पूर्व सांसद तजीन फातिमा से बातचीत की। इसके बाद वह मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय गए और वहां विद्यार्थियों तथा विश्वविद्यालय प्रशासन से मौजूदा स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय के मामले में समाजवादी पार्टी आजम खान और उनके परिवार के साथ खड़ी रहेगी।
रामपुर में पिछले कुछ समय से सपा नेताओं की सक्रियता लगातार बढ़ी है। पहले विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के नेतृत्व में पार्टी विधायकों का प्रतिनिधिमंडल रामपुर पहुंचा था। इसके बाद सपा सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भी यहां आकर आजम खान और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मामलों को उठाया। अब शिवपाल यादव की मुलाकात ने इस राजनीतिक अभियान को और स्पष्ट कर दिया है।
आजम खान लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेताओं में शामिल रहे हैं। रामपुर और आसपास के जिलों में उनका राजनीतिक प्रभाव रहा है। भाजपा सरकार बनने के बाद आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज हुए। इस दौरान उनके समर्थक कई बार सपा नेतृत्व पर यह आरोप लगाते रहे कि पार्टी आजम खान के समर्थन में उतनी मजबूती से सामने नहीं आई, जितनी उनसे अपेक्षा थी।
अब सपा नेतृत्व उन शिकायतों को दूर करने का प्रयास करता दिखाई दे रहा है। बीते वर्ष जेल से रिहा होने के बाद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी रामपुर पहुंचकर आजम खान से मुलाकात की थी। बाद में आजम के दोबारा जेल जाने और जौहर विश्वविद्यालय के भवनों पर कार्रवाई का मामला सामने आने के बाद पार्टी ने सार्वजनिक रूप से उनके पक्ष में आवाज उठाई।
सपा के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। पार्टी लगातार दो विधानसभा चुनावों से सत्ता से बाहर है, लेकिन पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मिले प्रदर्शन से उसके कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। इस बार राष्ट्रीय लोकदल सपा के साथ नहीं है। ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुस्लिम, यादव और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाताओं के बीच अपना आधार मजबूत रखना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।
मुरादाबाद मंडल को सपा का मजबूत क्षेत्र माना जाता है और रामपुर इस क्षेत्र की मुस्लिम राजनीति का प्रमुख केंद्र रहा है। इसी कारण आजम खान के साथ पार्टी की एकजुटता का संदेश केवल रामपुर तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसका प्रभाव मुरादाबाद, संभल, अमरोहा, बिजनौर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों तक पहुंचाने की कोशिश दिखाई देती है।
शिवपाल यादव ने संभल से जुड़े मुकदमों का मुद्दा भी उठाया और सपा सरकार बनने पर कथित रूप से राजनीतिक आधार पर दर्ज मामलों की समीक्षा का संकेत दिया। उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन और बसपा से दूरी की स्थिति भी स्पष्ट की। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इन बयानों से सपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अपने चुनावी एजेंडे की झलक दे दी है। शिवपाल का रामपुर दौरा बताता है कि पार्टी 2027 से पहले आजम खान को लेकर किसी तरह की अस्पष्टता नहीं रखना चाहती।