गोरखपुर रेंज में पुलिसकर्मियों की जांच शुरू, गंभीर आरोपों वालों पर गिरेगी गाज

Update: 2026-08-01 11:42 GMT

गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में 10 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी सिपाही की गिरफ्तारी के बाद पुलिस विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। वर्दी की गरिमा और जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए गोरखपुर रेंज के सभी जिलों में ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार कराई जा रही है, जिनके खिलाफ महिला संबंधी अपराधों में मुकदमे दर्ज हैं या उन पर गंभीर आरोप लगे हैं।

पुलिस विभाग का उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना और विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करना है। इस संबंध में डीआईजी गोरखपुर रेंज ने सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को अपने-अपने जिलों में रिकॉर्ड खंगालकर महिला अपराधों से जुड़े मामलों की पूरी जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, तैयार की जा रही सूची में उन पुलिसकर्मियों को शामिल किया जाएगा, जिनके खिलाफ दुष्कर्म, छेड़छाड़, यौन उत्पीड़न, महिलाओं के साथ मारपीट या अन्य गंभीर महिला अपराधों के आरोप हैं। सभी जिलों से ऐसे मामलों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। इसके बाद प्रत्येक मामले की समीक्षा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ महिला अपराधों में गंभीर मुकदमे दर्ज हैं, उन्हें संवेदनशील पदों और जनता से सीधे जुड़े कार्यों से हटाया जा सकता है। वहीं, जिन मामलों में आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर पाए जाएंगे, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई तेज की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की संस्तुति भी शासन को भेजी जा सकती है।

पुलिस विभाग का कहना है कि किसी एक कर्मचारी की गलत हरकत से पूरी वर्दी की छवि प्रभावित होती है। इसी वजह से महिला अपराधों के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से पुलिस बल में जवाबदेही बढ़ेगी और आम लोगों का भरोसा मजबूत होगा।

गोरखपुर के एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने कहा कि पुलिस विभाग में अनुशासन और जनता का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है। महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बच्ची हत्याकांड में चौकी प्रभारी निलंबित, कोतवाल लाइन हाजिर

गोरखपुर में जिला अस्पताल से 10 साल की बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में पुलिस की कार्रवाई जारी है। मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में नगर निगम चौकी प्रभारी दीपशिखा को निलंबित कर दिया गया है, जबकि कोतवाली प्रभारी छत्रपाल सिंह को लाइन हाजिर किया गया है। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

जानकारी के मुताबिक, आजमगढ़ की रहने वाली बच्ची अपनी बड़ी बहन को खाना देने के लिए जिला अस्पताल पहुंची थी। आरोप है कि इसी दौरान पुलिस की वर्दी में आए बर्खास्त सिपाही अभिषेक यादव ने उसे अपने साथ ले गया। बच्ची के घर नहीं पहुंचने पर परिजनों ने तलाश शुरू की और नगर निगम चौकी पहुंचकर पुलिस को सूचना दी।

आरोप है कि सूचना मिलने के बाद भी मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और आरोपी सिपाही को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के बाद पुलिस ने बच्ची का शव चिउटहा पुल के नीचे से बरामद किया।

मामले में आरोपी सिपाही के खिलाफ कार्रवाई के साथ ही पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की गई। जांच रिपोर्ट के आधार पर एसएसपी ने चौकी प्रभारी को निलंबित और कोतवाली प्रभारी को लाइन हाजिर करने का फैसला लिया। अधिकारियों का कहना है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को वर्दी की छवि सुधारने और महिला सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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