बिजनौर। उत्तर प्रदेश में नए गन्ना पेराई सत्र 2026-27 की तैयारियों के बीच किसानों के भुगतान को लेकर चीनी मिलों ने बड़ी पहल की है। जिले की चीनी मिलों ने गन्ना किसानों को समय पर भुगतान करने के लिए बैंकों से लगभग 1600 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट (सीसीएल) मांगी है। इस व्यवस्था के तहत चीनी मिलें अपने पास उपलब्ध चीनी के स्टॉक को बैंकों के पास गिरवी रखकर ऋण प्राप्त करेंगी और उस राशि से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान करेंगी। बाद में चीनी की बिक्री से मिलने वाली रकम से बैंक का कर्ज चुकाया जाएगा। हालांकि, सितंबर के बाद अक्टूबर में भी जारी बारिश के कारण चीनी मिलों का पेराई कार्यक्रम प्रभावित हुआ है। आधे अक्टूबर से पेराई शुरू करने की योजना बना रही मिलों के अब नवंबर में चालू होने की संभावना है।
गन्ना पेराई शुरू होने से पहले भुगतान की व्यवस्था करने का उद्देश्य किसानों को आर्थिक परेशानियों से बचाना है। जिले में बड़ी संख्या में किसान गन्ने की खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में फसल बेचने के बाद समय पर भुगतान मिलना उनके लिए महत्वपूर्ण होता है।
1600 करोड़ रुपये की सीसीएल की मांग
जिले की चीनी मिलों ने आगामी पेराई सत्र को ध्यान में रखते हुए बैंकों के समक्ष लगभग 1600 करोड़ रुपये की कैश क्रेडिट लिमिट का प्रस्ताव रखा है।
सीसीएल एक प्रकार की कार्यशील पूंजी ऋण सुविधा है, जिसके माध्यम से मिलें अपनी जरूरत के अनुसार निर्धारित सीमा तक बैंक से धनराशि प्राप्त कर सकती हैं।
इस व्यवस्था के अंतर्गत चीनी के स्टॉक को बैंक के पास प्रतिभूति के रूप में रखा जाता है।
बैंक की स्वीकृति मिलने के बाद मिलें निर्धारित शर्तों के अनुसार धनराशि प्राप्त कर सकेंगी।
इससे किसानों के भुगतान के लिए आवश्यक पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
चीनी बेचकर चुकाया जाएगा बैंक का कर्ज
सीसीएल व्यवस्था में चीनी मिलें अपने उत्पादित या उपलब्ध चीनी स्टॉक के आधार पर बैंक से ऋण लेती हैं।
मिलें इस रकम का उपयोग गन्ना किसानों के भुगतान और निर्धारित परिचालन जरूरतों को पूरा करने में करती हैं।
बाद में चीनी की बिक्री से प्राप्त धनराशि के माध्यम से बैंक का बकाया चुकाया जाता है।
इससे मिलों को गन्ना खरीदने के तुरंत बाद भुगतान करने के लिए पूरी चीनी बिकने का इंतजार नहीं करना पड़ता।
हालांकि, वास्तविक भुगतान बैंक की स्वीकृति, ऋण की शर्तों और मिलों की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करेगा।
पूर्व के पेराई सत्रों में भी बिजनौर की चीनी मिलें किसानों को भुगतान करने के लिए इस प्रकार की वित्तीय व्यवस्था का उपयोग करती रही हैं।
बारिश ने बिगाड़ा चीनी मिलों का कार्यक्रम
सितंबर के बाद अक्टूबर में भी जारी बारिश ने गन्ना पेराई की तैयारियों को प्रभावित किया है।
लगातार बारिश होने से खेतों में नमी और जलभराव की समस्या पैदा हो रही है।
ऐसी परिस्थितियों में किसानों के लिए गन्ने की कटाई करना और फसल को वाहनों में लादकर चीनी मिलों तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
इसके अलावा ग्रामीण संपर्क मार्गों की स्थिति खराब होने पर गन्ना ढुलाई में अतिरिक्त समय लग सकता है।
यही कारण है कि कई चीनी मिलें पेराई शुरू करने की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।
अक्टूबर की जगह नवंबर में शुरू होगी पेराई
चीनी मिलों ने पहले अक्टूबर के मध्य से पेराई शुरू करने की तैयारी की थी।
लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अब नवंबर में पेराई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
उत्तर प्रदेश के अन्य गन्ना उत्पादक जिलों में भी बारिश के कारण पेराई कार्यक्रम प्रभावित हुआ है।
सहारनपुर जिले में कुछ मिलों ने 28 अक्टूबर से पेराई शुरू करने का कार्यक्रम तय किया है, जबकि अधिकांश मिलों का संचालन नवंबर में प्रस्तावित है।
वहीं, लखीमपुर खीरी में भी खेतों और मार्गों में जलभराव के कारण गन्ने की ढुलाई प्रभावित होने की आशंका सामने आई है।
कोल्हुओं पर पहुंचने लगा किसानों का गन्ना
चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू नहीं होने के बावजूद जिले के कुछ किसानों ने कोल्हुओं पर गन्ना पहुंचाना शुरू कर दिया है।
कोल्हुओं में गन्ने की पेराई करके गुड़ और अन्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
किसानों को कोल्हुओं पर गन्ना बेचने का एक लाभ यह है कि कई स्थानों पर उन्हें नकद भुगतान मिल जाता है।
इससे तत्काल घरेलू खर्च, खेती की जरूरतों और अन्य आर्थिक जिम्मेदारियों को पूरा करने में मदद मिलती है।
हालांकि, कोल्हुओं में मिलने वाला गन्ने का मूल्य बाजार की मांग और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।
गन्ना किसानों के लिए भुगतान सबसे बड़ा मुद्दा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है।
किसानों को फसल की बुआई से लेकर कटाई तक बीज, खाद, सिंचाई, मजदूरी और परिवहन पर खर्च करना पड़ता है।
ऐसे में गन्ने की बिक्री के बाद भुगतान मिलने में देरी होने से किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो सकती है।
कई किसानों को अगली फसल की तैयारी के लिए भी धनराशि की जरूरत होती है।
इसलिए पेराई शुरू होने से पहले बैंकों से ऋण सुविधा प्राप्त करने की तैयारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गन्ना मूल्य भुगतान के लिए कानूनी व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए कानूनी प्रावधान मौजूद हैं।
लागू व्यवस्था के तहत चीनी मिलों को गन्ना खरीद के बाद निर्धारित अवधि में किसानों का भुगतान करना होता है।
भुगतान में देरी होने पर संबंधित प्रावधानों के अनुसार ब्याज और अन्य कार्रवाई का विषय सामने आ सकता है।
हालांकि, समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए चीनी मिलों के पास पर्याप्त कार्यशील पूंजी होना आवश्यक है।
सीसीएल जैसी वित्तीय सुविधा इस आवश्यकता को पूरा करने का एक माध्यम हो सकती है।
चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति पर भी असर
पेराई शुरू होने से पहले चीनी मिलों को मशीनों की मरम्मत, कर्मचारियों की व्यवस्था, परिवहन और अन्य आवश्यक तैयारियां पूरी करनी होती हैं।
इसके अलावा गन्ने की खरीद के लिए बड़ी धनराशि की जरूरत पड़ती है।
चीनी की बिक्री से मिलने वाली राशि और किसानों को भुगतान करने के समय में अंतर होने से मिलों के सामने नकदी की समस्या पैदा हो सकती है।
बैंक से कैश क्रेडिट लिमिट मिलने पर मिलों को इस अंतर को संभालने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ऋण प्राप्त करने से मिलों पर ब्याज और भुगतान संबंधी जिम्मेदारी भी बढ़ती है।
समय पर पेराई शुरू होना भी आवश्यक
गन्ना किसानों के लिए भुगतान के साथ फसल की समय पर कटाई और पेराई भी महत्वपूर्ण है।
यदि पेराई सत्र में अधिक देरी होती है तो किसानों को फसल की कटाई और अगली बुआई का कार्यक्रम बदलना पड़ सकता है।
इसके अलावा खेत लंबे समय तक खाली नहीं होने से गेहूं और अन्य रबी फसलों की तैयारी प्रभावित हो सकती है।
इसलिए किसानों की नजर मौसम में सुधार और चीनी मिलों के संचालन की तारीखों पर बनी हुई है।
बैंक की स्वीकृति के बाद मिलेगी धनराशि
चीनी मिलों द्वारा लगभग 1600 करोड़ रुपये की सीसीएल मांगे जाने का अर्थ यह नहीं है कि पूरी राशि स्वीकृत हो चुकी है।
बैंक संबंधित मिलों की वित्तीय स्थिति, चीनी के स्टॉक और अन्य निर्धारित शर्तों की समीक्षा करने के बाद ऋण सीमा स्वीकृत करेंगे।
इसके बाद मिलें स्वीकृत सीमा के भीतर धनराशि प्राप्त कर सकेंगी।
इसलिए किसानों को वास्तविक भुगतान कब और कितनी राशि में होगा, यह मिलों की वित्तीय तैयारियों तथा गन्ने की आपूर्ति शुरू होने पर निर्भर करेगा।
नवंबर के पेराई सत्र पर टिकी किसानों की नजर
जिले में चीनी मिलों की तैयारियां जारी हैं, लेकिन लगातार बारिश ने पेराई कार्यक्रम को प्रभावित किया है।
अक्टूबर के मध्य से शुरू होने वाला पेराई सत्र अब नवंबर में शुरू होने की संभावना है।
दूसरी ओर भुगतान के लिए करीब 1600 करोड़ रुपये की सीसीएल मांगे जाने से किसानों को समय पर धनराशि उपलब्ध कराने की तैयारी का संकेत मिला है।
अब किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि चीनी मिलें निर्धारित समय पर पेराई शुरू करें और गन्ना खरीद के बाद भुगतान में अनावश्यक देरी न हो।