राजधानी लखनऊ : चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस और जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया। दुबई से अवैध रूप से सोना तस्करी कर भारत पहुंचे एक तस्कर को उसी के नेटवर्क से जुड़े लोगों ने धोखा देकर करीब 30 लाख रुपये कीमत का सोना हड़प लिया। हालांकि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और उनके कब्जे से सोने का पाउडर भी बरामद कर लिया गया। अब पुलिस इस पूरे अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की जांच में जुटी है।
पुलिस के अनुसार, बलिया जिले के बेल्थरा रोड क्षेत्र के रहने वाले महबूब आलम 27 जुलाई को दुबई से लखनऊ पहुंचे थे। आरोप है कि उन्होंने करीब 203.92 ग्राम सोने का पाउडर एक विशेष कैप्सूलनुमा डिब्बी में छिपाकर अपने शरीर के भीतर रखकर भारत लाया था। एयरपोर्ट पर जांच के बाद वह बाहर निकल आया, जहां पहले से मौजूद गिरोह के दो सदस्य उससे मिलने पहुंचे। उन्होंने खुद को डिलीवरी लेने के लिए भेजा गया व्यक्ति बताते हुए महबूब का भरोसा जीत लिया।
दोनों आरोपियों ने महबूब को अपनी ब्रीजा कार में बैठा लिया और करीब दो घंटे तक शहर में अलग-अलग जगह घुमाते रहे। इसके बाद रात के समय आलमबाग बस अड्डे के पास उसे कार से उतार दिया और उसका बैग तथा सोने का पाउडर लेकर फरार हो गए। महबूब को जब अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ तो उसने सरोजनीनगर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस उपायुक्त दक्षिणी मोहम्मद मुश्ताक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। अपर पुलिस उपायुक्त रल्लापल्ली बसंथ कुमार और एसीपी कृष्णानगर अभिषेक पांडेय की निगरानी में चार अलग-अलग टीमों ने जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने एयरपोर्ट और आसपास के इलाकों में लगे 100 से 150 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज, वाहन संख्या और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने बलरामपुर निवासी दीपक वर्मा और राम प्रताप दुबे को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के दौरान दोनों की निशानदेही पर चोरी किया गया सोने का पाउडर भी बरामद कर लिया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई साधारण चोरी नहीं, बल्कि एक संगठित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का हिस्सा है। एसीपी अभिषेक पांडेय के अनुसार गिरोह का नेटवर्क राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और दुबई तक फैला हुआ है। गिरोह के कुछ सदस्य दुबई में सक्रिय हैं, जबकि भारत में अलग-अलग राज्यों में इनके सहयोगी मौजूद हैं। यह नेटवर्क खास तौर पर उन भारतीयों को निशाना बनाता है जो दुबई में नौकरी की तलाश में जाकर किसी कारणवश फंस जाते हैं और आर्थिक संकट के चलते भारत लौटना चाहते हैं।
गिरोह ऐसे लोगों का हवाई टिकट तक उपलब्ध कराता है और उन्हें आर्थिक मदद का लालच देकर अपने जाल में फंसा लेता है। इसके बाद उनके माध्यम से सोने का पाउडर या अन्य कीमती सामान विशेष तरीके से छिपाकर भारत भेजा जाता है। एयरपोर्ट के बाहर पहले से मौजूद नेटवर्क के सदस्य उस सामान की डिलीवरी लेकर आगे तस्करी चैन तक पहुंचाते हैं।
इस मामले में सबसे दिलचस्प बात यह सामने आई कि डिलीवरी लेने पहुंचे दोनों आरोपियों की नियत ही बदल गई। पुलिस के अनुसार, राजस्थान में बैठे गिरोह के कथित सरगना तक सोना पहुंचाने के बजाय दीपक वर्मा और राम प्रताप दुबे ने खुद ही पूरा माल हड़पने की योजना बना ली। दोनों की योजना थी कि सोना बेचकर रकम आपस में बांट ली जाए और गिरोह के सरगना को यह कह दिया जाए कि रास्ते में सोना चोरी हो गया।
फिलहाल पुलिस महबूब आलम को भी हिरासत में लेकर उससे पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह इस तस्करी नेटवर्क से कब और कैसे जुड़ा। साथ ही पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और राजस्थान तथा दुबई में बैठे कथित संचालकों की भूमिका की भी जांच कर रही है। मामले के सफल खुलासे पर पुलिस उपायुक्त ने कार्रवाई करने वाली टीम को 25 हजार रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की है। यह मामला दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क किस तरह काम करते हैं और कई बार अपराधियों के बीच ही लालच के कारण आपसी धोखाधड़ी की घटनाएं भी सामने आ जाती हैं।
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