संभल : उत्तर प्रदेश के संभल जिले से सावन की कांवड़ यात्रा के बीच आस्था और मातृभक्ति की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। बहजोई कोतवाली क्षेत्र के गांव खेतापुर निवासी 52 वर्षीय जोगिंदर अपनी 105 वर्षीय मां हरदेई को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से पैदल संभल पहुंचे। कांवड़ के एक पलड़े में गंगाजल था तो दूसरे पलड़े में उनकी बुजुर्ग मां बैठी थीं। जोगिंदर की इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए रास्ते में लोगों की भीड़ जुटती रही और हर कोई उनकी मातृभक्ति को नमन करता नजर आया।
सावन के महीने में लाखों शिवभक्त हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों से गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना होते हैं। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्त भगवान शिव की आराधना करते हुए लंबी दूरी पैदल तय करते हैं। इसी धार्मिक यात्रा में संभल के जोगिंदर ने अपनी 105 वर्षीय मां को साथ लेकर मातृ सेवा की अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने अपनी मां को कांवड़ के एक पलड़े में बैठाया और दूसरे पलड़े में करीब 28 लीटर गंगाजल रखा।
जानकारी के अनुसार, खेतापुर गांव निवासी जोगिंदर का सपना था कि वह अपनी मां को गंगा स्नान कराएं। इसी इच्छा को पूरा करने के लिए वह अपने बेटों के साथ हरिद्वार पहुंचे। वहां उन्होंने मां को गंगा स्नान कराया और इसके बाद कांवड़ में एक तरफ गंगाजल तथा दूसरी तरफ अपनी मां को बैठाकर पैदल यात्रा शुरू कर दी। हरिद्वार से संभल तक की लंबी दूरी उन्होंने इसी तरह तय की।
जोगिंदर जब अपनी अनोखी कांवड़ लेकर संभल पहुंचे तो सड़क किनारे मौजूद श्रद्धालुओं और राहगीरों की नजर उन पर टिक गई। कांवड़ के एक तरफ गंगाजल और दूसरी ओर बुजुर्ग मां को देखकर लोग भावुक हो गए। कई लोगों ने हाथ जोड़कर जोगिंदर और उनकी मां का अभिनंदन किया, जबकि कुछ लोगों ने इस अनोखे दृश्य को अपने मोबाइल फोन के कैमरे में रिकॉर्ड किया। देखते ही देखते उनकी कांवड़ और मातृभक्ति की तस्वीरें लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गईं।
जोगिंदर ने बताया कि लंबे समय से उनकी इच्छा थी कि वह अपनी मां को गंगा स्नान कराएं। मां की उम्र 105 वर्ष हो चुकी है और इस उम्र में उनकी सेवा करना उनके लिए किसी पूजा से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव की भक्ति के साथ मां की सेवा करने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। इसी भावना के साथ उन्होंने मां को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से संभल तक पैदल यात्रा पूरी की।
जोगिंदर के पुत्र प्रमोद ने भी इस यात्रा को अपने परिवार के लिए बेहद खास बताया। उन्होंने कहा कि उनके पिता और उनका सपना था कि उनकी 105 वर्षीय दादी को एक बार गंगा स्नान जरूर कराया जाए। इस बार परिवार को यह अवसर मिला और उन्होंने मिलकर इस इच्छा को पूरा किया। प्रमोद ने कहा कि दादी को गंगा स्नान कराने और उनके साथ हरिद्वार से वापस लौटने का अनुभव उनके लिए बेहद भावुक और यादगार है।
परिवार के अनुसार, हरिद्वार से संभल तक पैदल यात्रा के दौरान जोगिंदर ने अपनी मां को कांवड़ में सुरक्षित रखा। लंबा रास्ता तय करने के बावजूद उनके चेहरे पर थकान नजर नहीं आई। रास्ते में जब भी लोग उनकी मां को कांवड़ में बैठा देखते तो उनकी मातृभक्ति की सराहना करते। कई स्थानों पर लोगों ने रुककर उनके बारे में जानकारी ली और उन्हें आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं।
105 वर्षीय हरदेई ने भी बेटे और पोते की इस सेवा पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें अपने बेटे और पोते के इस कार्य पर गर्व और खुशी हो रही है। उम्र के इस पड़ाव पर बेटे द्वारा उन्हें गंगा स्नान कराने और अपने साथ कांवड़ यात्रा पर लाने को उन्होंने अपने लिए विशेष अनुभव बताया।
जोगिंदर की यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें माता-पिता की सेवा और सम्मान का संदेश भी दिखाई दिया। कांवड़ यात्रा में जहां श्रद्धालु भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करने के लिए कठिन पैदल यात्रा करते हैं, वहीं जोगिंदर ने इसी यात्रा में अपनी मां की सेवा को भी शामिल कर लिया। उनके लिए मां की सेवा और भगवान शिव की भक्ति एक साथ चलती रही।
संभल पहुंचने के बाद भी उनकी अनोखी कांवड़ को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती रही। लोगों ने कहा कि जोगिंदर ने जिस तरह अपनी बुजुर्ग मां को कांवड़ में बैठाकर यात्रा पूरी की है, वह मातृभक्ति की मिसाल है। इस घटना ने कांवड़ यात्रा के धार्मिक स्वरूप के साथ-साथ परिवार और माता-पिता के प्रति जिम्मेदारी की भावना को भी सामने रखा है।
सावन के दौरान हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्तों के बीच जोगिंदर की यह यात्रा अलग दिखाई दी। एक ओर उनके कंधे पर भगवान शिव के लिए गंगाजल था तो दूसरी ओर उनकी मां थीं। यही वजह रही कि रास्ते में जिसने भी उन्हें देखा, वह कुछ पल के लिए ठहर गया। संभल पहुंचने तक उनकी कहानी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन चुकी थी।
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