अयोध्या/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अयोध्या के राम मंदिर और 1990 में कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता नवनीत राणा ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा, "भगवान राम जानते हैं कि कार सेवकों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था।" उनका यह बयान अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच सामने आया है। भाजपा के कई नेता इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को घेर रहे हैं और अखिलेश यादव से 1990 की घटना को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।दरअसल, समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन पांडे ने घोषणा की है कि अखिलेश यादव 12 दिसंबर 2026 को अयोध्या स्थित राम मंदिर और हनुमानगढ़ी में दर्शन करने पहुंचेंगे। इस दौरे में उनकी पत्नी डिंपल यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के भी शामिल होने की जानकारी दी गई है। यह राम मंदिर के जनवरी 2024 में उद्घाटन के बाद अखिलेश यादव का पहला प्रस्तावित दौरा होगा। इसी घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर और कारसेवकों पर हुई फायरिंग का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है।
1990 की फायरिंग को लेकर अखिलेश यादव पर निशाना
नवनीत राणा ने अपने बयान में भगवान राम का उल्लेख करते हुए 1990 में अयोध्या में कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग का मुद्दा उठाया। भाजपा नेताओं का आरोप है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया गया था।भाजपा नेताओं का कहना है कि जिस राजनीतिक दल की सरकार के दौरान यह घटना हुई, उसके वर्तमान अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस ऐतिहासिक घटनाक्रम पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। नवनीत राणा की टिप्पणी भी इसी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा है।हालांकि, 1990 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे और अखिलेश यादव उस समय मुख्यमंत्री पद पर नहीं थे। इसलिए उस दौर की प्रशासनिक और राजनीतिक जिम्मेदारी को ऐतिहासिक संदर्भ में समझना जरूरी है।
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे से गरमाई सियासत
अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को अयोध्या जाने की घोषणा के बाद भाजपा नेताओं ने उनके दौरे के समय और उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान समाजवादी पार्टी का रुख अलग था, जबकि अब पार्टी प्रमुख मंदिर में दर्शन करने की तैयारी कर रहे हैं।दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडे ने कहा है कि अखिलेश यादव को अयोध्या जाने के लिए किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि राम मंदिर में दर्शन करना किसी भी व्यक्ति का व्यक्तिगत और धार्मिक अधिकार है।इस तरह प्रस्तावित दौरे ने राजनीतिक दलों के बीच पुरानी घटनाओं और वर्तमान धार्मिक गतिविधियों को लेकर नई बहस शुरू कर दी है।
मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में हुई थी फायरिंग
अयोध्या में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान वर्ष 1990 में कारसेवकों पर पुलिस ने गोलीबारी की थी। यह घटना 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को हुई थी। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे।राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों और भाजपा नेताओं के अनुसार, इस पुलिस कार्रवाई में कई कारसेवकों की जान गई थी। इस घटना को लेकर दशकों से राजनीतिक बहस जारी है।मुलायम सिंह यादव ने अपने राजनीतिक जीवन में इस कार्रवाई के संदर्भ में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का पक्ष रखा था। वहीं, भाजपा और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े संगठनों ने इसे रामभक्तों पर की गई कार्रवाई बताते हुए आलोचना की।इस ऐतिहासिक घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के बीच आज भी मतभेद दिखाई देते हैं।
योगी आदित्यनाथ भी कर चुके हैं माफी की मांग
इस विवाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अखिलेश यादव पर निशाना साध चुके हैं। दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि जिन लोगों ने रामभक्तों और कारसेवकों पर गोली चलवाई तथा संतों पर लाठीचार्ज कराया, उन्हें अयोध्या आने से पहले माफी मांगनी चाहिए।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि रामभक्तों के बलिदान और संघर्ष को भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अखिलेश यादव के प्रस्तावित मंदिर दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या आने से पहले पुराने घटनाक्रम पर पश्चाताप व्यक्त करना चाहिए।मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी के बाद भाजपा के अन्य नेताओं ने भी इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी को घेरना शुरू कर दिया।
ओम प्रकाश राजभर ने भी साधा निशाना
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी कारसेवकों पर हुई गोलीबारी को लेकर समाजवादी पार्टी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को इस कार्रवाई के लिए जिम्मेदार ठहराया।राजभर ने कहा कि उस समय प्रदेश की सरकार मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में थी और उन्होंने ही कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया था। उनका आरोप है कि समाजवादी पार्टी आज जिस तरह धार्मिक स्थलों पर जाने की बात कर रही है, उसे अपने पुराने राजनीतिक रुख पर भी जवाब देना चाहिए।
12 दिसंबर के दौरे पर टिकी नजरें
अखिलेश यादव का प्रस्तावित अयोध्या दौरा अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है। समाजवादी पार्टी इसे धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत श्रद्धा से जुड़ा कदम बता रही है, जबकि भाजपा नेता 1990 की कारसेवक फायरिंग और राम मंदिर आंदोलन के पुराने घटनाक्रम को सामने रखकर सवाल उठा रहे हैं।नवनीत राणा का बयान भी इसी विवाद के बीच आया है। उन्होंने भगवान राम का उल्लेख करते हुए कारसेवकों पर गोली चलाने के आदेश को लेकर सवाल उठाया है।अब देखना होगा कि 12 दिसंबर को अखिलेश यादव का अयोध्या दौरा किस तरह आगे बढ़ता है और इस दौरान राजनीतिक बयानबाजी का मुद्दा कितना गरमाता है। फिलहाल राम मंदिर, कारसेवकों पर हुई फायरिंग और 1990 के राजनीतिक फैसलों को लेकर भाजपा तथा समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
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