बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में बिजली के पोल में करंट उतरने से एक 28 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई। युवक अपने घर के सामने लगे विद्युत पोल के अर्थ वायर की चपेट में आ गया था। करंट लगने से उसकी जान चली गई। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मच गया, वहीं आसपास के लोगों में बिजली विभाग के प्रति भारी नाराजगी देखने को मिली। स्थानीय लोगों ने विद्युत व्यवस्था की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए विभागीय लापरवाही की आशंका जताई है। लोगों का कहना है कि आबादी वाले इलाकों में लगे बिजली के पोल और तारों की नियमित जांच होनी चाहिए, ताकि इस तरह के हादसों को रोका जा सके।
घर के सामने लगे बिजली पोल से हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक घटना उस समय हुई, जब 28 वर्षीय युवक अपने घर के सामने लगे विद्युत पोल के अर्थ वायर के संपर्क में आ गया। अर्थ वायर में करंट होने के कारण युवक को जोरदार बिजली का झटका लगा।
सामान्य परिस्थितियों में अर्थिंग व्यवस्था का उद्देश्य बिजली के उपकरणों और विद्युत संरचनाओं को सुरक्षित रखना होता है। लेकिन किसी तकनीकी खराबी, गलत कनेक्शन या अन्य विद्युत दोष की स्थिति में धातु के हिस्सों में खतरनाक करंट आ सकता है।इस घटना में अर्थ वायर में करंट आने का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हुआ है। इसकी पुष्टि विद्युत विभाग की तकनीकी जांच से ही हो सकेगी।हादसे के बाद स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। लोगों ने आशंका जताई कि यदि बिजली के पोल में करंट बना रहा, तो अन्य लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
युवक की मौत से परिवार में मचा कोहराम
28 वर्षीय युवक की अचानक मौत की खबर से उसके परिवार में मातम छा गया। हादसे ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।कम उम्र में युवक की मौत से आसपास के लोगों में भी दुख का माहौल है। स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
घर के बिल्कुल सामने हुए इस हादसे ने लोगों को झकझोर दिया है। जिस स्थान से परिवार और आसपास के लोग नियमित रूप से गुजरते हैं, वहीं बिजली के संपर्क में आने से युवक की जान चली गई।मृतक की पहचान, उसके परिवार के सदस्यों और रोजगार से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा बिजली विभाग पर फूट पड़ा है। लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर बिजली के पोल के अर्थ वायर में करंट कैसे पहुंचा।स्थानीय लोगों का कहना है कि आबादी वाले इलाकों में विद्युत पोल, तारों और अर्थिंग व्यवस्था की नियमित जांच करना जरूरी है।यदि किसी विद्युत पोल में तकनीकी खराबी है, तो उसकी तुरंत मरम्मत होनी चाहिए। ऐसी खामियों की अनदेखी लोगों की जान के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।हालांकि, इस घटना में बिजली विभाग की लापरवाही साबित हुई है या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसके लिए संबंधित विद्युत उपकरणों और कनेक्शन की जांच जरूरी होगी।
अर्थ वायर में क्यों आ सकता है करंट?
विद्युत सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह घटना बेहद गंभीर मानी जा रही है। सामान्य तौर पर अर्थिंग प्रणाली बिजली के फॉल्ट की स्थिति में सुरक्षा प्रदान करने के लिए बनाई जाती है।लेकिन खराब इंसुलेशन, गलत वायरिंग, टूटे हुए विद्युत तार के संपर्क या अर्थिंग व्यवस्था में तकनीकी दोष होने पर धातु के हिस्सों में विद्युत वोल्टेज उत्पन्न हो सकता है।ऐसी स्थिति में कोई व्यक्ति विद्युत पोल या उससे जुड़े तार को छूता है, तो उसे करंट लगने का खतरा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बिजली का झटका लगने की गंभीरता कई कारणों पर निर्भर करती है। इनमें विद्युत प्रवाह की तीव्रता, शरीर से करंट गुजरने का रास्ता और संपर्क में रहने का समय शामिल हैं।गंभीर स्थिति में करंट हृदय की सामान्य धड़कन को प्रभावित कर सकता है और जानलेवा साबित हो सकता है।
सार्वजनिक स्थानों पर बिजली सुरक्षा बेहद जरूरी
इस घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर विद्युत सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।गांवों और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में बिजली के पोल घरों, दुकानों और सड़कों के आसपास लगे होते हैं।ऐसे स्थानों पर बिजली के तारों की सुरक्षित ऊंचाई, उचित इंसुलेशन, अर्थिंग और समय-समय पर निरीक्षण अत्यंत आवश्यक है।
विशेष रूप से पुराने और क्षतिग्रस्त विद्युत उपकरणों की जांच में देरी गंभीर दुर्घटनाओं का कारण बन सकती है।बिजली विभाग को ऐसे स्थानों की पहचान करने की आवश्यकता है, जहां तकनीकी खराबी से लोगों के संपर्क में आने वाले हिस्सों में करंट उतरने की आशंका हो।
करंट लगने पर भूलकर भी न करें ये गलती
बिजली का करंट लगने की घटना में आसपास मौजूद लोगों की सतर्कता भी बेहद महत्वपूर्ण होती है।यदि कोई व्यक्ति बिजली के तार या पोल के संपर्क में आकर झुलस रहा हो, तो उसे सीधे हाथों से छूने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
सबसे पहले सुरक्षित तरीके से बिजली की आपूर्ति बंद करानी चाहिए और विद्युत विभाग तथा आपातकालीन सेवाओं को सूचना देनी चाहिए।जब तक बिजली पूरी तरह बंद होने की पुष्टि न हो जाए, तब तक पोल, तार या प्रभावित व्यक्ति के संपर्क में नहीं आना चाहिए।यदि पीड़ित को बिजली के स्रोत से सुरक्षित रूप से अलग कर दिया गया है, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता बुलानी चाहिए। प्रशिक्षित व्यक्ति जरूरत पड़ने पर सीपीआर भी दे सकता है।
पहले भी सामने आ चुके हैं करंट से मौत के मामले
बाराबंकी जिले में बिजली के करंट से जान जाने की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं।13 अक्टूबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, सदरपुर क्षेत्र के शमसाबाद गांव में खेत में टूटकर पड़े हाईटेंशन तार की चपेट में आने से 14 वर्षीय किशोर की मौत हो गई थी।उस मामले में भी ग्रामीणों ने बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी जताते हुए आरोप लगाया था कि तार हटाने के लिए पहले शिकायत की गई थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई।लगातार सामने आने वाली ऐसी घटनाएं विद्युत सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।
जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग
28 वर्षीय युवक की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने घटना की जांच कराने और जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।लोगों का कहना है कि यदि तकनीकी खराबी या रखरखाव में कमी के कारण यह हादसा हुआ है, तो संबंधित जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
इसके साथ ही आसपास के बिजली के पोल और तारों की जांच कराई जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना दोबारा न हो।मृतक के परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता दिए जाने का सवाल भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, इस मामले में किसी मुआवजे की आधिकारिक घोषणा की पुष्टि नहीं हुई है।