Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: अयोध्या में राम मंदिर डोनेशन से जुड़े कथित गबन मामले की जांच अब और गहराती जा रही है। पुलिस जांच में नए खुलासे सामने आने का दावा किया जा रहा है। जांच एजेंसियों को शक है कि आरोपियों ने कथित रूप से डोनेशन की रकम का एक हिस्सा स्टॉक मार्केट और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश किया था।

पुलिस को आशंका है कि आरोपियों का उद्देश्य सिर्फ कथित रूप से रकम का स्रोत छिपाना ही नहीं था, बल्कि उस पैसे से आर्थिक लाभ कमाना भी था। मामले की जांच के दौरान पुलिस वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

जानकारी के अनुसार, अयोध्या पुलिस ने मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए आरोपियों के ठिकानों पर दोबारा तलाशी अभियान चलाया है। इसके साथ ही संदिग्ध बैंक खातों को भी फ्रीज कर दिया गया है, ताकि कथित रूप से इस्तेमाल की गई रकम को सुरक्षित रखा जा सके और आगे की जांच में मदद मिल सके।

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पुलिस आरोपी अनुकल्प मिश्रा को उसके घर लेकर गई थी, जहां तलाशी अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस ने घर में मौजूद दस्तावेजों और अन्य सामान की जांच की। इसके अलावा आरोपी के परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की गई।

पुलिस पूछताछ के दौरान अनुकल्प मिश्रा ने कथित रूप से कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं। सूत्रों के अनुसार, उसने बताया कि उसने और सह-आरोपी अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर चोरी की गई डोनेशन की रकम का कुछ हिस्सा शेयर बाजार में लगाया था।

पूछताछ में यह भी सामने आने का दावा किया जा रहा है कि रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से घुमाने की कोशिश की गई। आरोप है कि आरोपी रिश्तेदारों और करीबी लोगों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करता था और बाद में वही रकम वापस अपने खाते में मंगवा लेता था।

पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि कथित रूप से कितनी रकम निवेश की गई और उससे कितना लाभ हासिल किया गया। इसके लिए बैंक रिकॉर्ड, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय लेनदेन की पूरी कड़ी सामने आने के बाद मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस कथित गबन में केवल कुछ लोग शामिल थे या फिर कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

राम मंदिर डोनेशन से जुड़ा मामला धार्मिक आस्था और बड़ी संख्या में लोगों के योगदान से जुड़ा होने के कारण बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। ऐसे में पुलिस हर पहलू की जांच कर रही है और किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि डोनेशन की रकम कथित रूप से किस तरह निकाली गई, किन-किन खातों में भेजी गई और उसका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया। इसके अलावा आरोपियों के वित्तीय रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।

पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज करने के साथ ही वित्तीय संस्थानों से भी जानकारी मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले में शामिल सभी लोगों की वास्तविक भूमिका सामने आएगी।

इस मामले में पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। आने वाले दिनों में और पूछताछ, तलाशी और वित्तीय जांच की संभावना जताई जा रही है।

फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस कथित रूप से गायब हुई रकम की रिकवरी और उससे जुड़े सभी लेनदेन की कड़ी जोड़ने पर है। जांच के दौरान सामने आ रहे नए तथ्यों से मामले का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है।

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