यूपी सरकार ने बनाई एसआईटी, जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को भी किया शामिल

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT का गठन

Update: 2026-07-28 01:41 GMT

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में चर्चित चढ़ावा चोरी मामले की जांच अब और व्यापक स्तर पर की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन कर दिया है। इस एसआईटी में पहली बार एक फोरेंसिक ऑडिटर को भी शामिल किया गया है, ताकि वित्तीय लेन-देन, दान राशि और रिकॉर्ड की वैज्ञानिक एवं तकनीकी तरीके से जांच की जा सके।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, एसआईटी का उद्देश्य मामले से जुड़े सभी तथ्यों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच करना है। जांच टीम मंदिरों या धार्मिक संस्थानों में प्राप्त चढ़ावे के रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, लेखा-जोखा और संबंधित दस्तावेजों का गहन परीक्षण करेगी। फोरेंसिक ऑडिटर वित्तीय दस्तावेजों का विश्लेषण कर यह पता लगाएगा कि कहीं धन के गबन, हेराफेरी या रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर जोर दिया था। अदालत का मानना था कि यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं, तो उनकी जांच केवल पारंपरिक पुलिस जांच तक सीमित न रहकर विशेषज्ञों की मदद से भी की जानी चाहिए। इसी के तहत फोरेंसिक ऑडिटर को जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।
एसआईटी में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ वित्तीय जांच और तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल रहेंगे। टीम संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ करेगी, दस्तावेजों का सत्यापन करेगी और आवश्यकता पड़ने पर डिजिटल एवं इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भी जांच करेगी। यदि जांच के दौरान किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार ने कहा है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष होगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, जांच पूरी होने के बाद एसआईटी अपनी रिपोर्ट सरकार और आवश्यकतानुसार अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
इस मामले पर प्रदेशभर की नजर बनी हुई है, क्योंकि यह धार्मिक संस्थानों में चढ़ावे के प्रबंधन, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि एसआईटी की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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