अयोध्या। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में आयोजित होने वाले 10वें दीपोत्सव को लेकर उत्साह का माहौल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को इस भव्य आयोजन में शामिल होने वाले उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पवित्र दीपोत्सव में उपराष्ट्रपति की गरिमामयी उपस्थिति इस पर्व को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनाएगी। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर संदेश जारी करते हुए विभिन्न देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनयिकों का भी स्वागत किया। इस अवसर पर सरयू नदी के तट पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने दीपोत्सव को अंधकार पर सत्य और धर्म की शाश्वत विजय का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में अयोध्या दीपोत्सव के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल दीप जलाने का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं से जुड़े मूल्यों का प्रतीक है। भगवान श्रीराम की नगरी में आयोजित होने वाला दीपोत्सव श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।

योगी आदित्यनाथ ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के आगमन को इस आयोजन के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने कहा कि उपराष्ट्रपति की उपस्थिति से दीपोत्सव की गरिमा और बढ़ेगी। अयोध्या में आयोजित होने वाला यह उत्सव भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपराओं का भव्य प्रदर्शन होगा।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी अपने संदेश में विभिन्न देशों के राजदूतों, उच्चायुक्तों और राजनयिकों का भी स्वागत किया। अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति को अयोध्या दीपोत्सव के वैश्विक महत्व से जोड़कर देखा जा रहा है।

अयोध्या का दीपोत्सव पिछले कुछ वर्षों में एक बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में उभरा है। इस कार्यक्रम में भगवान श्रीराम की नगरी को लाखों दीपों से सजाया जाता है। सरयू नदी के घाटों पर जलते दीपक एक भव्य दृश्य प्रस्तुत करते हैं। इस बार 10वें दीपोत्सव को और अधिक विशेष बनाने की तैयारी की गई है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि सरयू नदी के तट पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इतने बड़े स्तर पर दीप प्रज्ज्वलन की योजना आयोजन की भव्यता को दर्शाती है। हालांकि, वास्तविक रूप से कितने दीपक जलाए गए, इसकी पुष्टि आयोजन पूरा होने के बाद ही हो सकेगी।

सरयू नदी के किनारे दीपोत्सव का आयोजन अयोध्या की धार्मिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम के वनवास से लौटने पर अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। इसी परंपरा की स्मृति में दीपावली का त्योहार मनाया जाता है।

अयोध्या में आयोजित दीपोत्सव इसी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यता को भव्य स्वरूप में प्रस्तुत करता है। लाखों दीपकों की रोशनी के माध्यम से भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा व्यक्त की जाती है। यह आयोजन लोगों को भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव को अंधकार पर सत्य और धर्म की शाश्वत विजय की घोषणा बताया। उनके इस संदेश में त्योहार के आध्यात्मिक महत्व पर विशेष जोर दिया गया है। दीपोत्सव को अच्छाई, सत्य, धर्म और सकारात्मकता के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

भारतीय संस्कृति में प्रकाश का विशेष महत्व है। दीपक को ज्ञान, आशा, शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। दिवाली और दीपोत्सव जैसे पर्व लोगों को जीवन में सत्य और अच्छाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री के संदेश में भी यही भावना दिखाई दी। उन्होंने दीपोत्सव को केवल एक धार्मिक आयोजन के रूप में नहीं, बल्कि सत्य और धर्म की विजय का संदेश देने वाले पर्व के रूप में प्रस्तुत किया।

अयोध्या में 10वें दीपोत्सव के अवसर पर देश और विदेश से आने वाले अतिथियों की मौजूदगी इस आयोजन को विशेष बना रही है। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के साथ विभिन्न देशों के राजनयिकों की भागीदारी से कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिलने की उम्मीद है।

विदेशी प्रतिनिधियों के लिए यह आयोजन भारतीय धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर हो सकता है। अयोध्या की धार्मिक पहचान और दीपोत्सव की भव्यता भारतीय संस्कृति की विविधता तथा आध्यात्मिक परंपराओं को सामने लाती है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने अयोध्या दीपोत्सव को राज्य के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में स्थान दिया है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक इस आयोजन के प्रति आकर्षित होते हैं। सरयू घाटों पर दीपों की सजावट कार्यक्रम का सबसे प्रमुख आकर्षण रहती है।

इस वर्ष 30 लाख से अधिक दीयों के प्रज्ज्वलन की योजना आयोजन को और अधिक भव्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इतने बड़े स्तर पर दीपों की व्यवस्था के लिए व्यापक तैयारियों की आवश्यकता होती है।

दीपोत्सव के आयोजन में मिट्टी के दीपकों का विशेष महत्व है। ये दीपक भारतीय परंपरा और स्थानीय कारीगरी से भी जुड़े हुए हैं। मिट्टी के दीयों का उपयोग धार्मिक भावना के साथ पारंपरिक शिल्प को भी महत्व देता है।

अयोध्या दीपोत्सव के दौरान सरयू नदी का तट विशेष आकर्षण का केंद्र बनता है। घाटों पर सजे दीपक धार्मिक वातावरण को और अधिक भव्य बनाते हैं। इस दृश्य को देखने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों में उत्साह रहता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने स्वागत संदेश के माध्यम से उपराष्ट्रपति और विदेशी प्रतिनिधियों के प्रति सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने इस आयोजन को भारतीय संस्कृति के गौरव से जोड़ते हुए कहा कि प्रकाश का यह पर्व ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनेगा।

अयोध्या में आयोजित होने वाला 10वां दीपोत्सव धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक एकता का भी संदेश देता है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोग इस आयोजन के माध्यम से भगवान श्रीराम की नगरी की परंपराओं से जुड़ते हैं।

अंतरराष्ट्रीय अतिथियों की उपस्थिति से इस आयोजन का महत्व और बढ़ जाता है। इससे भारतीय संस्कृति और परंपराओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है।

फिलहाल अयोध्या में 10वें दीपोत्सव को लेकर उत्साह बना हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और विभिन्न देशों के राजनयिकों का स्वागत करते हुए आयोजन को विशेष बताया है।

सरयू नदी के तट पर 30 लाख से अधिक मिट्टी के दीये जलाने की योजना के साथ यह दीपोत्सव भव्य स्वरूप लेने जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह उत्सव अंधकार पर सत्य और धर्म की शाश्वत विजय का प्रतीक है। अब सभी की नजर अयोध्या में होने वाले इस विशाल दीप प्रज्ज्वलन और सांस्कृतिक आयोजन पर रहेगी।

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