आजम खां को राहत मिलेगी या झटका? जौहर यूनिवर्सिटी के भवनों पर कल फैसला

Update: 2026-07-27 13:29 GMT

रामपुर  :  समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े चर्चित मामले में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी या उन्हें राहत मिलेगी, इसका फैसला मंडलायुक्त की कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद साफ हो सकता है। इस मामले पर प्रशासन, यूनिवर्सिटी प्रबंधन और आम लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।

मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को लेकर रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने कार्रवाई शुरू की थी। आरडीए के क्षेत्रीय अवर अभियंता की ओर से 28 जून को वाद दर्ज किया गया था। इसके बाद मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के सचिव और जौहर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर संबंधित भवनों के नक्शे और अन्य जरूरी दस्तावेज आठ जुलाई तक प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।

यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से नोटिस का जवाब दाखिल किया गया था। इसके बाद आरडीए ने प्रबंधन को अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई का मौका दिया। इस मामले में 15 जुलाई की तारीख निर्धारित की गई थी। सुनवाई के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से अपना पक्ष रखा गया।

प्रबंधन का पक्ष सुनने के बाद रामपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी ने संबंधित भवनों को अवैध मानते हुए उन्हें ध्वस्त करने का आदेश जारी कर दिया था। आरडीए के इस आदेश के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इसे चुनौती दी और आरडीए अध्यक्ष/अपीलीय अधिकारी यानी मंडलायुक्त की कोर्ट में अपील दाखिल कर दी।

अब इसी अपील पर मंगलवार को कमिश्नर कोर्ट में सुनवाई होनी है। यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता के अनुसार, सुनवाई के दौरान आरडीए के आदेश को चुनौती देने वाले तर्क रखे जाएंगे। वहीं, प्रशासन की ओर से भी अपना पक्ष रखा जाएगा।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर बुलडोजर चलेगा या फिर उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के तहत राहत मिलेगी। कोर्ट के फैसले के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

इस बीच, इस मामले की गूंज हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में भी 29 जुलाई को इस प्रकरण पर सुनवाई हो सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े इस मामले में कानूनी प्रक्रिया और तेज होने की संभावना है।

गौरतलब है कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी विवादों के केंद्र में रही है। अब 38 भवनों के ध्वस्तीकरण से जुड़े मामले में मंडलायुक्त कोर्ट का फैसला यूनिवर्सिटी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासन की कार्रवाई और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की अपील के बीच अब सभी की नजरें मंगलवार की सुनवाई पर लगी हैं।

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