योगी सरकार का संत रविदास को नमन, समरसता का संकल्प

Update: 2026-07-28 14:00 GMT

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार गुरु पूर्णिमा के अवसर पर संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर में समरसता संकल्प सभा का आयोजन करने जा रही है। यह आयोजन संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष के शुभारंभ का प्रतीक होगा। सरकार का उद्देश्य संत रविदास के विचारों, सामाजिक समानता और समरसता के संदेश को देशभर में जन-जन तक पहुंचाना है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल होंगे।

संत रविदास भारतीय भक्ति परंपरा के महान संतों में से एक थे, जिन्होंने समाज में समानता, मानवता और आंतरिक शुद्धता का संदेश दिया। उन्होंने अपने प्रसिद्ध संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” के माध्यम से बताया कि सच्ची भक्ति बाहरी आडंबरों में नहीं बल्कि मन की पवित्रता और अच्छे कर्मों में होती है। संत रविदास ने ऐसे समाज की कल्पना की थी जहां किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग या ऊंच-नीच के आधार पर भेदभाव न हो।

गुरु पूर्णिमा के दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत रविदास की जन्मस्थली पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस आयोजन को सामाजिक समरसता और संत परंपरा के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। इसी मौके पर 131 कलशों का विधिवत पूजन कर संत रविदास के 650वें जयंती वर्ष का शुभारंभ किया जाएगा। ये कलश उत्तर प्रदेश के 98 स्थानों के अलावा देश के 27 राज्यों और छह जोनों तक भेजे जाएंगे। इसका उद्देश्य संत रविदास के विचारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाना है।

समरसता संकल्प सभा में करीब 25 हजार लोगों की सहभागिता होने की संभावना है। गुरु पूर्णिमा से लेकर माघी पूर्णिमा तक देशभर में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इन आयोजनों के जरिए संत रविदास के विचारों को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।

योगी सरकार संत रविदास की जन्मस्थली को एक प्रमुख सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने पर भी काम कर रही है। यहां एक अत्याधुनिक संग्रहालय का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें संत रविदास के जीवन, संघर्ष, विचारों और सामाजिक योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा। यह संग्रहालय आने वाली पीढ़ियों के लिए संत रविदास के आदर्शों को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।

जानकारी के अनुसार, यह संग्रहालय लगभग 1,645 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में बनाया जा रहा है, जिस पर करीब 2,320.73 लाख रुपये की लागत आएगी। इसके अलावा जन्मस्थली के विकास और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 111.81 करोड़ रुपये के कार्य कराए गए हैं। इसमें आधुनिक लंगर हॉल, पार्क, पैदल मार्ग और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य शामिल हैं। यहां स्थापित संत रविदास की भव्य कांस्य प्रतिमा भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।

सरकार का कहना है कि संत रविदास के विचार केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक न्याय और समानता की मजबूत नींव रखते हैं। उनके संदेश आज भी समाज को एकजुट रहने और आपसी सम्मान की प्रेरणा देते हैं। समरसता संकल्प सभा के माध्यम से सामाजिक भेदभाव को समाप्त करने और समान अवसरों की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया जाएगा।

संत रविदास ने अपने जीवनकाल में समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की आवाज उठाई। उन्होंने कर्म और चरित्र को व्यक्ति की पहचान बताया। उनका सपना ऐसा समाज बनाना था जहां हर व्यक्ति को सम्मान और समान अवसर मिले। योगी सरकार द्वारा उनकी जन्मस्थली के विकास और 650वीं जयंती वर्ष के आयोजन को इसी विचारधारा को आगे बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

गुरु रविदास का संदेश आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक है। उनकी शिक्षाएं मानवता, प्रेम, करुणा और समानता पर आधारित हैं। योगी सरकार का यह आयोजन न केवल संत रविदास के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि उनके आदर्शों को आधुनिक समाज में लागू करने का संकल्प भी है। गुरु पूर्णिमा पर होने वाला यह कार्यक्रम समरसता और सामाजिक एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Tags:    

Similar News