उत्तर प्रदेश :  मेरठ जिले में बच्चों और महिलाओं ने अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। रविवार को सरधना क्षेत्र के मोहल्ला खेवान के कई बच्चे और महिलाएं हाथों में पोस्टर लेकर थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने क्षेत्र में अवैध शराब, गांजा, सुल्फा और दूसरे नशीले पदार्थों की कथित बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। प्रदर्शन के बाद पुलिस ने शिकायत की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
प्रदर्शन में शामिल करीब 12 से 13 वर्ष की उम्र के बच्चों को मीडिया रिपोर्टों में जेन अल्फा कहा गया है। आमतौर पर वर्ष 2010 के बाद जन्मे बच्चों को जेन अल्फा पीढ़ी में रखा जाता है। इन बच्चों ने नशे के कारण अपने मोहल्ले का माहौल खराब होने और भविष्य प्रभावित होने की चिंता जताई। बच्चों के हाथों में हमारा भविष्य बचाइए और नशे पर रोक लगाइए जैसे संदेश लिखे पोस्टर दिखाई दिए।
बच्चों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं भी सरधना थाने पहुंचीं। उन्होंने पुलिस के सामने आरोप लगाया कि मोहल्ला खेवान में लंबे समय से अवैध नशीले पदार्थ बेचे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस बारे में पहले भी शिकायतें की गईं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं होने के कारण कारोबार जारी रहा। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
महिलाओं ने कहा कि नशे की आसान उपलब्धता का सबसे अधिक प्रभाव किशोरों और युवाओं पर पड़ रहा है। उनका आरोप था कि नशीले पदार्थ बेचने वाले लोग मोहल्ले के माहौल को खराब कर रहे हैं और बच्चों को गलत रास्ते पर जाने का खतरा बना हुआ है। प्रदर्शनकारियों ने ऐसे लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
 बच्चों ने थाने पर की नारेबाजी
बच्चों और महिलाओं ने थाने के बाहर नशा विरोधी नारे लगाए। बच्चों ने पुलिस से कहा कि वे भयमुक्त और नशामुक्त माहौल में पढ़ना तथा आगे बढ़ना चाहते हैं। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों ने कथित नशा कारोबारियों की जानकारी पुलिस को देने और जांच में सहयोग करने की बात भी कही।
पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों की शिकायत सुनी और क्षेत्र में जांच तथा कार्रवाई का भरोसा दिया। पुलिस की ओर से कहा गया कि यदि किसी स्थान पर अवैध शराब या प्रतिबंधित नशीले पदार्थों की बिक्री पाई जाती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
इस प्रदर्शन को दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामने आए युवा आंदोलनों और उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में हुए स्कूली बच्चों के विरोध से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, सरधना का प्रदर्शन किसी संगठित राजनीतिक अभियान के बजाय स्थानीय स्तर पर नशे के खिलाफ उठाई गई सामुदायिक आवाज बताया जा रहा है।
फतेहपुर में भी प्रदर्शन कर चुके हैं बच्चे
इससे पहले 28 जुलाई को फतेहपुर जिले के विजयीपुर क्षेत्र स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं की कमी के खिलाफ प्रदर्शन किया था। बच्चों ने बिजली, स्वच्छ पेयजल, पंखे और शौचालयों की खराब स्थिति को लेकर कॉलेज के गेट पर धरना दिया था।
छात्र हाथों में बैनर और तिरंगा लेकर करीब चार घंटे तक प्रदर्शन करते रहे। उनका आरोप था कि लंबे समय से समस्याएं बताने के बावजूद विद्यालय की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया। बच्चों का विरोध सामने आने के बाद पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे थे।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने विद्यार्थियों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की। उनकी आठ मांगों में से सात को तत्काल लिखित रूप से स्वीकार किए जाने की बात सामने आई थी। विज्ञान वर्ग की मान्यता के लिए विद्यालय प्रबंधन को निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन करने का निर्देश दिया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया था।
सरधना में बच्चों का प्रदर्शन यह संकेत देता है कि नई पीढ़ी अपने आसपास की सामाजिक समस्याओं को लेकर सजग हो रही है। हालांकि, नशीले पदार्थों की बिक्री जैसे मामलों में बच्चों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। स्थानीय प्रशासन, पुलिस, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों को मिलकर शिकायतों की जांच तथा बच्चों को नशे से बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाना होगा।
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