उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में केदारताल ट्रेक के दौरान हुए हिमस्खलन हादसे में एक और ट्रेकर का शव बरामद हुआ है। इसके साथ ही हादसे में अब तक बरामद शवों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद पहाड़ी क्षेत्र में राहत और बचाव अभियान लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अब तक बरामद पांच शवों में से केवल दो की ही पहचान हो सकी है, जबकि तीन शवों की पहचान होना बाकी है। हादसे में लापता अन्य ट्रेकरों की तलाश को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
केदारताल ट्रेक उत्तराखंड के सबसे चुनौतीपूर्ण हिमालयी ट्रेकिंग मार्गों में गिना जाता है। ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में मौसम अचानक बदलने, बर्फ खिसकने और हिमस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बना रहता है। ऐसे में वहां किसी भी तरह का बचाव अभियान चलाना बेहद कठिन होता है। हिमस्खलन के बाद बर्फ में दबे लोगों की तलाश के लिए विशेष सावधानी और तकनीकी सहायता की जरूरत पड़ती है।
आठ लोग हुए थे लापता, चार को पहले बचाया गया
जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर को 12 सदस्यीय ट्रेकिंग दल गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुआ था। इस दल में सात ट्रेकर, एक स्थानीय गाइड, एक रसोइया और तीन पोर्टर शामिल थे। दल को 29 अक्टूबर तक वापस लौटना था, लेकिन खराब मौसम और भारी बर्फबारी के कारण सदस्य रास्ते में फंस गए।31 अक्टूबर को बचाव दल ने एक रसोइये और तीन पोर्टरों को सुरक्षित निकाल लिया था। इसके बाद सात ट्रेकर और एक स्थानीय गाइड सहित आठ लोगों की तलाश शुरू की गई। शुरुआती दिनों में खराब मौसम और बर्फबारी के कारण राहत अभियान में कई बाधाएं आईं।
पांच शव बरामद, तीन लोगों की तलाश जारी
मंगलवार को बचाव दल को हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्र से एक महिला और एक पुरुष का शव मिला था। इसके बाद बुधवार को चलाए गए अभियान में दो और शव बरामद हुए। गुरुवार को एक अन्य ट्रेकर का शव मिलने की सूचना सामने आई है। ताजा जानकारी के अनुसार, कुल पांच शव बरामद हो चुके हैं और तीन लोग अभी भी लापता हैं।हादसे में जान गंवाने वालों में उत्तर प्रदेश के लखनऊ की रहने वाली दो सगी बहनें भी शामिल हैं। इनकी पहचान 29 वर्षीय दीपिका वर्मा और 28 वर्षीय वर्तिका वर्मा के रूप में हुई है। दोनों के शवों की पहचान हो चुकी है, जबकि अन्य तीन शवों की पहचान की प्रक्रिया बाकी है।
SDRF और निम की टीम चला रही सर्च अभियान
लापता लोगों को खोजने के लिए राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) और नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) की संयुक्त टीम अभियान चला रही है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में भारी बर्फ जमा होने के कारण बचावकर्मियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।केदारताल क्षेत्र में लगातार बदलता मौसम राहत अभियान की सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। बर्फबारी के साथ तेज हवाएं और दुर्गम रास्ते खोज अभियान की गति प्रभावित कर रहे हैं। बुधवार को भी मौसम प्रतिकूल होने के कारण दोपहर बाद खोज अभियान रोकना पड़ा था।गुरुवार सुबह बचाव दल ने दोबारा तलाश शुरू की। अधिकारियों के लिए अभियान में शामिल जवानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण चुनौती है।
बर्फ में दबा मिला था ट्रेकिंग दल का टेंट
इससे पहले खोज अभियान के दौरान बचावकर्मियों को बर्फ में दबा हुआ एक टेंट मिला था। टेंट में राशन, कपड़े, बैग और अन्य सामान मौजूद था। हालांकि, उस स्थान पर लापता ट्रेकर नहीं मिले थेइससे अंदाजा लगाया गया कि ट्रेकिंग दल के सदस्य खराब मौसम के दौरान वहां ठहरे हो सकते हैं। हालांकि, हिमस्खलन के समय उनकी वास्तविक स्थिति क्या थी, इसे लेकर पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।
पश्चिम बंगाल के पांच दोस्त भी थे दल में शामिल
हादसे में लापता हुए लोगों में पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के पांच दोस्त भी शामिल थे। इनकी पहचान रिंटू मंडल, उदय घोष, रतन घोष, तपस बाउरी और मनोज खवास के रूप में हुई थी। ये सभी पहाड़ों की यात्रा के शौकीन थे और अपनी कमाई से पैसे बचाकर हर साल घूमने जाते थे।परिजनों के अनुसार, ये दोस्त 24 अक्टूबर को पश्चिम बंगाल से उत्तराखंड के लिए रवाना हुए थे। 26 अक्टूबर को परिवार से अंतिम बार संपर्क हुआ था। इसके बाद मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने से बातचीत बंद हो गई थी।
तीन लापता लोगों को लेकर चिंता बरकरार
केदारताल हिमस्खलन हादसे में पांच शव मिलने के बाद अब शेष तीन लोगों की तलाश पर ध्यान केंद्रित है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद राहत और बचाव दल खोज अभियान में जुटे हुए हैं। वहीं, मृतकों के शवों की पहचान और आगे की कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।इस घटना ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग के दौरान मौसम संबंधी चेतावनियों और सुरक्षा इंतजामों के महत्व को सामने ला दिया है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अचानक बदलने वाला मौसम कुछ ही समय में गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।