बद्रीनाथ दान घोटाला आरोप, BKTC कर्मचारी पर FIR

Update: 2026-07-08 09:47 GMT

देहरादून: बद्रीनाथ मंदिर में दान से जुड़े लेन-देन में कथित अनियमितताओं के मामले में पुलिस ने श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी (BKTC) के एक निलंबित कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मंदिर समिति के पूर्व कर्मचारी प्रमोद नौटियाल के खिलाफ की गई है।

पुलिस ने बताया कि नौटियाल के खिलाफ मंगलवार देर रात मामला दर्ज किया गया। वह पहले श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी के चेयरमैन के निजी सचिव (Private Secretary) के पद पर तैनात थे। उन पर मंदिर में दान से जुड़े लेन-देन में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए गए हैं।

निलंबन के बाद दर्ज हुआ मामला

जानकारी के मुताबिक, प्रमोद नौटियाल को करीब चार महीने पहले ही निलंबित किया गया था। अब मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच के दौरान सामने आए तथ्यों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दान राशि के लेन-देन में अनियमितता का आरोप

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में से एक है, जो बद्रीनाथ और केदारनाथ मंदिरों की व्यवस्थाओं का संचालन करती है।

आरोप है कि बद्रीनाथ मंदिर में आने वाले दान और उससे जुड़े लेन-देन में कुछ अनियमितताएं हुईं। इसी मामले को लेकर जांच की गई और इसके बाद संबंधित कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की गई।

हालांकि, पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और इसमें किन लोगों की भूमिका रही है।

मंदिर समिति ने लिया था कार्रवाई का फैसला

मामले में मंदिर समिति की ओर से पहले ही आंतरिक स्तर पर कार्रवाई की गई थी। प्रमोद नौटियाल को पद से निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।

मंदिर समिति प्रशासन का कहना है कि धार्मिक संस्थानों की पारदर्शिता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है। किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता को गंभीरता से लिया जाएगा।

पुलिस कर रही मामले की जांच

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। जांच के तहत संबंधित दस्तावेजों की जांच, लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल और संबंधित लोगों से पूछताछ की जा सकती है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और अगर किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई होगी।

धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता पर जोर

बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर हर साल लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं और बड़ी मात्रा में दान प्राप्त होता है। ऐसे में मंदिर प्रशासन की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक संस्थानों में आने वाली दान राशि के सही उपयोग और रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था जरूरी है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।

मंदिर समिति और पुलिस प्रशासन दोनों की ओर से मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई करने की बात कही गई है। जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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