बदरीनाथ मंदिर मामला: आरोपित नौटियाल की याचिका नहीं हुई मंजूर

Update: 2026-07-16 16:39 GMT

नैनीताल। बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाई जाने वाली ‘थाली भेंट’ की गणना में कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में आरोपित प्रमोद नौटियाल को उत्तराखंड हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने नौटियाल की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया है। वहीं, बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) अब आरोपित कर्मचारी को बर्खास्त करने की तैयारी में जुट गई है। इसके लिए समिति विधि विशेषज्ञों से सलाह ले रही है।

मामले में निलंबन आदेश को चुनौती देने, प्राथमिकी निरस्त करने और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रमोद नौटियाल ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस याचिका पर गुरुवार को न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की एकलपीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि आरोपित को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ऐसे में गिरफ्तारी पर रोक लगाने वाली याचिका का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

अदालत ने सरकार की दलील को स्वीकार करते हुए प्रमोद नौटियाल की याचिका को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब आरोपित की गिरफ्तारी हो चुकी है तो गिरफ्तारी से राहत देने का प्रश्न नहीं उठता।

इस पूरे मामले की शुरुआत दो जुलाई को हुई थी। बदरीनाथ मंदिर समिति को इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो के माध्यम से जानकारी मिली थी कि श्री बदरीनाथ मंदिर में ‘थाली भेंट’ की गणना के दौरान वित्तीय गड़बड़ी की गई है। वीडियो सामने आने के बाद मंदिर समिति ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कराई।

BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के निर्देश पर एक विभागीय जांच समिति का गठन किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मंदिर समिति के वैयक्तिक सहायक प्रमोद नौटियाल ने सुबह करीब नौ बजे से साढ़े नौ बजे के बीच थाली भेंट गणना स्थल से धनराशि उठाई थी। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर समिति ने नौटियाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

इसके बाद मंदिर समिति के प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवाण की शिकायत पर बदरीनाथ कोतवाली में प्रमोद नौटियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 12 जुलाई को उसे गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

वहीं, इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) भी जांच कर रहा है। एसआईटी बदरीनाथ धाम में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जांच टीम 32 दिनों की सीसीटीवी फुटेज रिकवर करने में जुटी हुई है। फिलहाल एसआईटी के पास 13 दिनों की फुटेज उपलब्ध है। बाकी फुटेज मिलने के बाद मामले से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

एसआईटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में किस तरह की अनियमितता हुई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं थी। जांच के दौरान मंदिर परिसर की गतिविधियों, धनराशि की गणना और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब BKTC की ओर से आगे की कार्रवाई की तैयारी तेज हो गई है। समिति आरोपित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई को अंतिम रूप देने में जुटी है। अधिकारियों का कहना है कि मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

बदरीनाथ धाम देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है और यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में चढ़ावे की राशि और मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस मामले में जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

Tags:    

Similar News