देहरादून। उत्तराखंड में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राज्य में जनगणना से जुड़ी गणना प्रक्रिया 1 दिसंबर से 4 जनवरी तक आयोजित की जाएगी, जबकि नागरिकों के लिए स्वयं गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) की सुविधा 16 नवंबर से शुरू होगी। इस व्यवस्था के तहत लोग डिजिटल माध्यम से अपनी और अपने परिवार की जानकारी स्वयं दर्ज कर सकेंगे। जनगणना की इस प्रक्रिया को प्रशासनिक योजना, विकास कार्यों और भविष्य की सरकारी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।जनगणना किसी भी राज्य और देश की जनसंख्या, सामाजिक संरचना, आवासीय परिस्थितियों तथा बुनियादी सुविधाओं से संबंधित जानकारी जुटाने का प्रमुख माध्यम है। इससे प्राप्त आंकड़ों के आधार पर सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पेयजल, आवास और अन्य सार्वजनिक सेवाओं की आवश्यकताओं का आकलन करती है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में जनसंख्या के सटीक आंकड़े विशेष महत्व रखते हैं, क्योंकि यहां भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच की चुनौतियां प्रशासनिक योजनाओं को प्रभावित करती हैं।
इस बार जनगणना प्रक्रिया में डिजिटल तकनीक के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्वयं गणना की सुविधा नागरिकों को निर्धारित पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर देगी। इसका उद्देश्य गणना प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना और घर-घर जाकर जानकारी जुटाने वाले कर्मचारियों के कार्य को व्यवस्थित करना है।स्वयं गणना के दौरान नागरिकों को आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध निर्देशों का पालन करना होगा। डिजिटल माध्यम से जानकारी दर्ज करने के बाद प्राप्त संदर्भ संख्या या अन्य आवश्यक विवरण को सुरक्षित रखना उपयोगी होगा, ताकि गणनाकर्मी के आने पर संबंधित जानकारी का सत्यापन किया जा सके। नागरिकों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि वे अपनी व्यक्तिगत जानकारी केवल अधिकृत सरकारी प्लेटफॉर्म पर ही साझा करें।उत्तराखंड में पर्वतीय और मैदानी दोनों प्रकार के क्षेत्र हैं। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों के कई हिस्सों में शहरीकरण और जनसंख्या विस्तार के कारण गणना प्रक्रिया की जरूरतें अलग हो सकती हैं। वहीं चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जैसे पर्वतीय जिलों में दूरस्थ बस्तियों, कठिन रास्तों और मौसम संबंधी परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा।
जनगणना के दौरान प्रत्येक परिवार से निर्धारित प्रश्नावली के अनुसार जानकारी जुटाई जाती है। आवास की स्थिति, परिवार के सदस्यों और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े आंकड़े सरकारी योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। हालांकि, किस चरण में कौन-कौन से प्रश्न पूछे जाएंगे, यह आधिकारिक जनगणना कार्यक्रम और संबंधित प्रश्नावली पर निर्भर करेगा।राज्य सरकार के स्तर पर भी जनगणना की तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। हाल ही में चमोली जिले के पीपलकोटी में आयोजित बैठक के दौरान जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग के सचिव दीपक कुमार गैरोला ने अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वयं गणना के संबंध में लोगों को जागरूक किया जाए और अधिक से अधिक नागरिकों को इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। अधिकारियों को निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं।जनगणना 2027 के लिए केंद्र सरकार ने पांच सितंबर 2026 को राजपत्र अधिसूचना जारी की थी। इसके अनुसार उत्तराखंड के गैर-हिमाच्छादित क्षेत्रों के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब और गोवा में भी जनसंख्या गणना 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 तक होगी। इन क्षेत्रों में स्वयं गणना की सुविधा 16 से 30 नवंबर तक उपलब्ध रहेगी। इसके बाद 5 से 9 जनवरी 2027 तक पुनरीक्षण का कार्य किया जाएगा। इस दौरान छूटे हुए लोगों की जानकारी दर्ज करने और आवश्यक सुधार करने की प्रक्रिया पूरी होगी।
जनगणना के लिए 5 जनवरी 2027 को रात 12 बजे, यानी दिन की शुरुआत के समय, संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है। इसी संदर्भ तिथि के आधार पर संबंधित क्षेत्रों की जनसंख्या का निर्धारण किया जाएगा। हालांकि, उत्तराखंड के बर्फ से ढके क्षेत्रों के लिए अलग कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। इन इलाकों में कठिन मौसम और आवागमन की परिस्थितियों के कारण गणना पहले आयोजित की गई है।नई टिहरी में भी जनगणना की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई। मुख्य विकास अधिकारी वरुणा अग्रवाल ने विभिन्न विभागों को समन्वय के साथ काम करने और जनजागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए। स्थानीय प्रशासन की जानकारी के अनुसार, नागरिक आधिकारिक स्वयं गणना पोर्टल पर जाकर परिवार का विवरण दर्ज कर सकेंगे। प्रक्रिया पूरी होने पर एक विशिष्ट पहचान संख्या प्राप्त होगी, जिसे बाद में घर आने वाले गणनाकर्मी को उपलब्ध कराना होगा।जनगणना के आंकड़े उत्तराखंड में पलायन, शहरी विस्तार और ग्रामीण क्षेत्रों की बदलती जनसंख्या को समझने में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं। पर्वतीय जिलों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण होने वाला पलायन लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। नए आंकड़ों से सरकार को विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक जनसंख्या और विकास संबंधी जरूरतों का आकलन करने में सहायता मिलेगी।
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी पात्र नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना होगी। विशेष रूप से दूरस्थ गांवों, बुजुर्ग नागरिकों और डिजिटल सुविधाओं से वंचित परिवारों तक जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण रहेगा। इसके लिए स्थानीय निकायों, पंचायतों और सरकारी विभागों के बीच समन्वय आवश्यक होगा।जनगणना 2027 के माध्यम से प्राप्त आंकड़े आने वाले वर्षों में विकास योजनाओं और संसाधनों के वितरण का महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। ऐसे में नागरिकों से अपेक्षा की जा रही है कि वे निर्धारित समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराएं और गणनाकर्मियों का सहयोग करें।
Tags: