खूनी ढलान बनी मुसीबत, 25 चालान वाला कंटेनर कार पर पलटा
दिल्ली-दून हाईवे पर मौत का तांडव
देहरादून: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर मोहब्बेवाला क्षेत्र लगातार हो रहे सड़क हादसों के कारण चिंता का विषय बन गया है। बुधवार, 4 नवंबर को यहां हुए भीषण हादसे में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि एक छह वर्षीय बच्चा घायल हो गया। इस दुर्घटना के बाद सड़क सुरक्षा और भारी वाहनों की निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिस कंटेनर के कारण हादसा हुआ, उसके यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े 25 चालान लंबित बताए जा रहे हैं।
कार के ऊपर पलटा भारी कंटेनर
बुधवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे मोहब्बेवाला चौक के पास खाद से भरा एक कंटेनर अनियंत्रित होकर आई-20 कार के ऊपर पलट गया। कंटेनर के भारी वजन के कारण कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। दुर्घटना इतनी भयावह थी कि कार में सवार लोगों को निकालने के लिए बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कंटेनर हटाने के लिए दो क्रेन की मदद ली गई, लेकिन शुरुआती प्रयासों में उसे हटाने में 20 मिनट से अधिक समय लग गया। हादसे में चार लोगों की जान चली गई। एक छह वर्षीय मासूम की जान बच गई, लेकिन उसके माता-पिता की मृत्यु हो गई। इस घटना से पीड़ित परिवारों में मातम पसरा हुआ है।
कंटेनर के 25 चालान लंबित होने का खुलासा
हादसे के बाद संबंधित कंटेनर के यातायात रिकॉर्ड को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, इस वाहन के खिलाफ यातायात नियमों के उल्लंघन से जुड़े 25 चालान लंबित हैं। इस खुलासे ने भारी व्यावसायिक वाहनों की निगरानी और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, इन चालानों की प्रकृति और वर्तमान दुर्घटना के वास्तविक कारण के बीच संबंध जांच का विषय है।
पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
मोहब्बेवाला की ढलान पर सड़क दुर्घटनाओं का यह पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ समय से इस क्षेत्र में भारी वाहनों के अनियंत्रित होने और पलटने की घटनाएं सामने आती रही हैं। अक्टूबर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, इस ढलान पर महज 25 दिनों के भीतर पांच दुर्घटनाएं हुई थीं। इससे पहले नवंबर 2024 में भी एक कंटेनर पलटने से एक व्यक्ति की मौत हुई थी।
सुरक्षा उपायों की प्रभावशीलता पर सवाल
लगातार हो रहे हादसों को देखते हुए संबंधित मार्ग पर वाहनों की गति नियंत्रित करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत बनाने के प्रयास किए गए हैं। आशारोड़ी से मोहब्बेवाला मार्ग तक भारी वाहनों के लिए 30 किलोमीटर प्रति घंटा और हल्के वाहनों के लिए 40 किलोमीटर प्रति घंटा की गति सीमा निर्धारित करने का निर्णय भी सामने आया था। इसके अलावा रंबल स्ट्रिप और अन्य सुरक्षा उपायों पर काम करने की जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद दुर्घटनाओं का सिलसिला थम नहीं रहा है।
चार मौतों के बाद उठी सुरक्षा की मांग
मोहब्बेवाला में हुए ताजा हादसे ने सड़क की ढलान, भारी वाहनों की रफ्तार, वाहन चालकों की सतर्कता और प्रभावी निगरानी की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। लगातार दुर्घटनाओं के मद्देनजर इस मार्ग की तकनीकी समीक्षा, भारी वाहनों की नियमित जांच और यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना जरूरी माना जा रहा है।