कोटद्वार (पौड़ी)। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में अब तक गुलदार, भालू और जंगली सूअर जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी से परेशान ग्रामीणों के सामने एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। कोटद्वार के दुगड्डा विकासखंड क्षेत्र में करीब 3000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित भंवासी गांव में पहली बार हाथी देखा गया है। पहाड़ी क्षेत्र में हाथी की दस्तक से ग्रामीणों में डर का माहौल है।
जानकारी के अनुसार, हाथी को पौखाल और भंवासी गांव के आसपास घूमते हुए देखा गया। स्थानीय लोगों ने जब ऊंचाई वाले क्षेत्र में हाथी की मौजूदगी देखी तो इसकी सूचना आसपास के लोगों और वन विभाग को दी। ग्रामीणों का कहना है कि इससे पहले इस क्षेत्र में हाथी कभी नहीं देखा गया था।
भंवासी गांव समुद्र तल से करीब तीन हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। आमतौर पर हाथियों की मौजूदगी मैदानी इलाकों और जंगलों के आसपास अधिक देखी जाती है, लेकिन अब हाथी का इतने ऊंचाई वाले क्षेत्र तक पहुंचना वन्यजीवों के बदलते व्यवहार का संकेत माना जा रहा है।
ग्रामीणों को सबसे ज्यादा चिंता अपनी फसलों और जान-माल की सुरक्षा को लेकर है। पहाड़ी क्षेत्रों में लोग खेती पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में हाथी की मौजूदगी से खेतों को नुकसान पहुंचने और किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र में पहले से ही गुलदार, भालू और जंगली सूअरों का खतरा बना रहता है। अब हाथी के आने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ गई है। लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में निगरानी बढ़ाने और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने की मांग की है।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगलों में बदलाव, भोजन और पानी की तलाश में कई बार वन्यजीव अपने पारंपरिक क्षेत्रों से बाहर निकल आते हैं। हाथियों का नए इलाकों में पहुंचना भी इसी तरह की परिस्थितियों का परिणाम हो सकता है।
आमतौर पर लैंसडौन वन प्रभाग क्षेत्र के मैदानी इलाकों के आसपास हाथियों की आवाजाही देखी जाती है। कोटद्वार क्षेत्र में रामणी-पुलिंडा मार्ग, सनेह मार्ग, भाबर क्षेत्र, कोटद्वार-दुगड्डा राष्ट्रीय राजमार्ग और ऐता गांव के आसपास हाथियों की मौजूदगी पहले भी सामने आती रही है।
हालांकि, दुगड्डा से कई किलोमीटर दूर और इतनी अधिक ऊंचाई वाले भंवासी गांव तक हाथी का पहुंचना पहली बार दर्ज किया गया है। इससे वन विभाग भी सतर्क हो गया है और क्षेत्र में हाथी की गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत महसूस की जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि हाथी की लगातार निगरानी की जाए और गांव वालों को जागरूक किया जाए, ताकि किसी भी तरह की दुर्घटना को रोका जा सके। वन विभाग की टीम को भी क्षेत्र में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
पहाड़ी क्षेत्र में हाथी की यह नई मौजूदगी पर्यावरण और वन्यजीवों के बदलते व्यवहार की ओर संकेत करती है। आने वाले दिनों में वन विभाग के लिए यह जरूरी होगा कि वह हाथी की गतिविधियों पर नजर रखते हुए ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।