गौलापार जू सफारी परियोजना को मिली रफ्तार, 412 हेक्टेयर में बनेगा अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर
हल्द्वानी : उत्तराखंड के गौलापार में प्रस्तावित जू सफारी (अंतरराष्ट्रीय चिड़ियाघर) परियोजना के धरातल पर उतरने की उम्मीदें अब और मजबूत हो गई हैं। निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल ने परियोजना क्षेत्र का सर्वे पूरा कर लिया है और करीब 412 हेक्टेयर भूमि पर बनने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट (पीपीआर) वन विभाग को सौंप दी है। रिपोर्ट में परियोजना की अनुमानित लागत करीब 270 करोड़ रुपये बताई गई है।
गौलापार में प्रस्तावित जू सफारी को क्षेत्र के पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से एक महत्वपूर्ण परियोजना माना जा रहा है। लंबे समय से इस योजना पर काम चल रहा था, लेकिन अब सर्वे और पीपीआर तैयार होने के बाद इसके निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम आगे बढ़ा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में इस परियोजना को गति मिलेगी और यह क्षेत्र का प्रमुख आकर्षण केंद्र बन सकता है।
निर्माण एजेंसी ब्रिडकुल ने जू सफारी के लिए निर्धारित भूमि का तकनीकी सर्वे किया है। सर्वे के दौरान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, भूमि की उपयोगिता, निर्माण की संभावनाओं और आवश्यक सुविधाओं को ध्यान में रखा गया। इसके आधार पर तैयार की गई प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट में जू सफारी के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया है।
प्रस्तावित जू सफारी करीब 412 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी। इतनी बड़ी भूमि पर बनने वाली यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। इसमें वन्यजीवों के लिए प्राकृतिक वातावरण, पर्यटकों के लिए सुविधाएं और संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पीपीआर मिलने के बाद अब परियोजना के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद आवश्यक संशोधन और आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और अन्य औपचारिकताओं को पूरा करने की दिशा में काम आगे बढ़ेगा।
जू सफारी परियोजना का उद्देश्य केवल पर्यटन को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण शिक्षा को भी मजबूत करना है। यहां आने वाले पर्यटकों को वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के बारे में जानकारी देने के लिए विशेष व्यवस्थाएं विकसित की जाएंगी।
गौलापार क्षेत्र पहले से ही प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की मौजूदगी के लिए जाना जाता है। ऐसे में यहां जू सफारी विकसित होने से पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को आधुनिक मानकों के अनुसार विकसित किया जाएगा। इसमें पर्यटकों के लिए प्रवेश द्वार, पार्किंग, भ्रमण मार्ग, वन्यजीव क्षेत्र, प्रशासनिक भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण प्रस्तावित है। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के नियमों का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े स्तर की ऐसी परियोजनाओं में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और क्षेत्र की जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए योजना तैयार करनी होगी। वन विभाग भी इस दिशा में आवश्यक सावधानियां बरतने की बात कह रहा है।
गौलापार जू सफारी परियोजना से हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। वर्तमान में नैनीताल, कॉर्बेट और अन्य पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले पर्यटकों को एक नया आकर्षण केंद्र मिल सकता है।
स्थानीय लोगों में भी इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का मानना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
ब्रिडकुल की ओर से पीपीआर सौंपे जाने के बाद अब वन विभाग के सामने परियोजना को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। अधिकारियों का कहना है कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
कुल मिलाकर, गौलापार की जू सफारी परियोजना अब योजना से आगे बढ़कर जमीन पर उतरने की प्रक्रिया में पहुंचती दिखाई दे रही है। सर्वे पूरा होने और 270 करोड़ रुपये की प्राथमिक परियोजना रिपोर्ट तैयार होने के बाद इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के चिड़ियाघर के निर्माण की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। आने वाले समय में यह परियोजना उत्तराखंड के पर्यटन और वन्यजीव संरक्षण क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकती है।