उत्तराखंड: कारगिल विजय दिवस के मौके पर देश उन वीर जवानों को याद कर रहा है, जिन्होंने 1999 के कारगिल युद्ध में अदम्य साहस और शौर्य का परिचय दिया था। भारतीय सेना के ऐसे ही वीर योद्धाओं में हल्द्वानी के लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट का नाम भी शामिल है। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान जिस बहादुरी का परिचय दिया, वह आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा है।
वर्ष 1999 में ऑपरेशन विजय के दौरान लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट 15 कुमाऊं रेजीमेंट में तैनात थे। कारगिल युद्ध के दौरान मच्छल सेक्टर में भारतीय सेना और दुश्मन के बीच भीषण मुठभेड़ हुई थी। इस संघर्ष में कैलाश चंद्र भट्ट ने अपनी जान की परवाह किए बिना दुश्मनों का सामना किया और वीरता की मिसाल कायम की।
6 जून 1999 को मच्छल सेक्टर में भारतीय सेना दुश्मनों को पीछे हटाने के अभियान में जुटी हुई थी। दुश्मन ऊंची पहाड़ियों पर मजबूत मोर्चा बनाकर बैठे थे, जबकि भारतीय जवान नीचे से आगे बढ़ रहे थे। हालात बेहद कठिन थे, लेकिन भारतीय सैनिकों का हौसला बुलंद था।
इसी दौरान अचानक आतंकियों ने एके-47 से भारतीय जवानों पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलियों की बारिश के बीच लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट भी दुश्मन की गोलीबारी का शिकार हुए। उनके कंधे में लगातार चार गोलियां लगीं। इनमें से एक गोली शरीर को पार कर गई, जबकि तीन गोलियां उनके शरीर में ही धंस गईं।
इतनी गंभीर चोट लगने के बाद भी कैलाश चंद्र भट्ट ने हिम्मत नहीं हारी। उनका शरीर घायल था, खून लगातार बह रहा था और दर्द असहनीय था, लेकिन उन्होंने अपने साथियों का साथ नहीं छोड़ा। उन्होंने मोर्चे पर डटे रहकर दुश्मनों का मुकाबला जारी रखा।
लांस नायक कैलाश भट्ट ने घायल अवस्था में भी अद्भुत साहस दिखाया और छह से अधिक दुश्मनों को मार गिराया। उन्होंने तब तक पीछे हटने से इनकार कर दिया, जब तक कि क्षेत्र सुरक्षित नहीं हो गया। उनका यह साहस भारतीय सेना की वीरता और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण बन गया।
मुठभेड़ के बाद सेना ने उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज किया गया। युद्ध के दौरान मिले घाव आज भी उनके शरीर पर मौजूद हैं, लेकिन उनका हौसला आज भी पहले जैसा मजबूत है। उनके लिए देश की सेवा सबसे बड़ा सम्मान है।
कैलाश चंद्र भट्ट बताते हैं कि कारगिल युद्ध में अपने कई साथियों को खोने का दर्द आज भी उनके मन में है। युद्ध की यादें उन्हें भावुक कर देती हैं, लेकिन उन्हें गर्व है कि उन्हें मातृभूमि की रक्षा करने का अवसर मिला। उनका कहना है कि अगर देश को दोबारा उनकी जरूरत पड़े तो वह उसी जज्बे और साहस के साथ आगे खड़े होंगे।
कारगिल युद्ध भारतीय सेना के इतिहास का एक गौरवशाली अध्याय है। इस युद्ध में भारतीय जवानों ने कठिन परिस्थितियों में भी अद्भुत पराक्रम दिखाया और दुश्मन को हराकर तिरंगे की शान बढ़ाई। लांस नायक कैलाश चंद्र भट्ट जैसे वीर सैनिकों की कहानियां देश की नई पीढ़ी को साहस, समर्पण और देशभक्ति की प्रेरणा देती हैं।
कारगिल विजय दिवस हर साल उन वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि देने का अवसर है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। कैलाश चंद्र भट्ट की वीर गाथा इस बात का प्रमाण है कि भारतीय सैनिकों का हौसला किसी भी परिस्थिति में कमजोर नहीं पड़ता।