हरिद्वार: वन प्रभाग हरिद्वार के देवपुरा बीट में निर्माणाधीन रिंग रोड के पास जंगल में एक दांत वाले करीब 55 वर्षीय जंगली हाथी का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। हाथी पिछले करीब दो सप्ताह से जगजीतपुर क्षेत्र की आबादी और कृषि भूमि के आसपास लगातार आवाजाही कर रहा था। कई बार वह फेंसिंग तोड़कर आबादी में भी पहुंच गया था। मानव-हाथी संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग की विशेष टास्क फोर्स उसकी गतिविधियों पर नजर रख रही थी।

वन विभाग के अनुसार, हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने के लिए गठित विशेष टीम ने छह नवंबर को इस हाथी को विशेषज्ञों की निगरानी में ट्रेंकुलाइज किया था। टीम में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, वन विभाग के अधिकारी और वन्यजीव पशु चिकित्सक शामिल थे। ट्रेंकुलाइज किए जाने के बाद हाथी की तबीयत बिगड़ गई। उसे तत्काल ऑक्सीजन, सीपीआर, रिवर्सल औषधि सहित आवश्यक आपातकालीन उपचार दिया गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।

इसके बाद स्वतंत्र पशु चिकित्सक विशेषज्ञों के दल ने हाथी का पोस्टमार्टम किया। जांच में उसके हृदय में मायोकार्डियल फाइब्रोसिस और कार्डियोमायोपैथी जैसे गंभीर विकार पाए गए। प्राथमिक तौर पर इन्हें ही हाथी की मौत का कारण माना जा रहा है।

अधिकारियों के मुताबिक, बाहरी निरीक्षण में हाथी की स्थिति सामान्य दिखाई दे रही थी। हृदय संबंधी बीमारी का केवल बाहरी परीक्षण से पता लगाना संभव नहीं था। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

18 हाथी किए गए थे चिह्नित

आबादी में घुसकर उत्पात मचाने वाले हाथियों की निगरानी और रेडियो कॉलर लगाने के लिए वन विभाग ने विशेष टास्क फोर्स गठित की है। टीम ने अब तक 18 हाथियों को चिह्नित किया था, जिनमें से छह हाथियों को रेडियो कॉलर लगाने की योजना थी। इसी अभियान के तहत विशेषज्ञों की टीम हरिद्वार पहुंची थी। पिछले दो सप्ताह से आबादी के आसपास लगातार दिखाई दे रहे एक दांत वाले हाथी को भी निगरानी में रखा गया था।

डीएफओ बोले, बचाने के किए गए हरसंभव प्रयास

डीएफओ स्वप्निल अनिरुद्ध ने बताया कि हाथी की लगातार निगरानी की जा रही थी। बीमार होने की जानकारी मिलने पर वन विभाग, डब्ल्यूआईआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने उपचार शुरू किया। हाथी को बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।

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