चमोली टनल हादसे का पुराना इतिहास सामने आया पहले भी लापरवाही से हुआ था बड़ा हादसा
चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में अलकनंदा नदी पर बन रही टिहरी हाइड्रो डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (THDC) की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की सुरंग में हादसे का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी परियोजना की मुख्य टनल में दुर्घटना हो चुकी है, जिसमें बड़ी संख्या में कर्मचारी और मजदूर घायल हुए थे।
निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजना की सुरंगों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। अब एक बार फिर टनल में हुए हादसे के बाद पुराने मामले की चर्चा शुरू हो गई है।
31 दिसंबर 2025 को हुई घटना को स्थानीय लोग अभी तक नहीं भूले हैं। उस समय परियोजना की मुख्य टनल में कर्मचारियों और श्रमिकों के आवागमन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दो ट्रालियां आपस में टकरा गई थीं। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों ट्रालियां पलट गईं और कई कर्मचारी व मजदूर घायल हो गए थे।
बताया गया था कि उस समय कर्मचारियों को सुरंग के अंदर ले जाने के लिए लोको ट्रेन का इस्तेमाल किया जाता था। इसी लोको ट्रेन व्यवस्था के दौरान हादसा हुआ था। दुर्घटना के बाद सुरक्षा मानकों और संचालन व्यवस्था पर सवाल उठे थे।
प्रारंभिक जांच में यह मामला लापरवाही से जुड़ा बताया गया था। परियोजना में काम कर रहे कर्मचारियों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले साधनों की सुरक्षा और संचालन व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हुए थे।
जल विद्युत परियोजनाओं में सुरंग निर्माण का काम बेहद जोखिम भरा होता है। ऐसे स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। सुरंगों में मशीनों का संचालन, श्रमिकों की आवाजाही और आपातकालीन व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है।
विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना उत्तराखंड की प्रमुख जल विद्युत परियोजनाओं में शामिल है। इस परियोजना के निर्माण में लंबी सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और श्रमिक काम करते हैं।
पिछले हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सुधार के दावे किए गए थे। हालांकि, एक बार फिर टनल में दुर्घटना होने से परियोजना की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्माणाधीन सुरंगों में नियमित सुरक्षा ऑडिट, मशीनों की जांच और कर्मचारियों को सुरक्षा प्रशिक्षण देना बेहद जरूरी होता है। छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
पिछले हादसे के बाद भी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कई सुझाव दिए गए थे। इनमें परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाना, उपकरणों की नियमित जांच और आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करना शामिल था।
अब नए हादसे के बाद प्रशासन और परियोजना प्रबंधन के सामने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना बड़ी चुनौती है। अधिकारियों की ओर से घटनाओं की जांच कर कारणों का पता लगाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े निर्माण कार्यों के दौरान मजदूरों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होनी चाहिए। परियोजना से जुड़े सभी कार्यों में सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।
जल विद्युत परियोजनाओं से क्षेत्र के विकास और रोजगार को बढ़ावा मिलता है, लेकिन इसके साथ काम करने वाले लोगों की सुरक्षा भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
फिलहाल विष्णुगाड़-पीपलकोटी परियोजना की टनल में हुई घटनाओं को लेकर सुरक्षा व्यवस्था पर फिर चर्चा शुरू हो गई है। पुराने हादसे और नए मामले दोनों यह संकेत देते हैं कि सुरंग निर्माण के दौरान अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है।