कोलकाता। पड़ोसी देश भूटान में ग्लेशियर से बनी झील के टूटने के बाद पश्चिम बंगाल और असम में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। भूटान के गासा क्षेत्र में स्थित शिंताफू झील से अचानक भारी मात्रा में पानी निकलने के कारण संकोश नदी का जलस्तर बढ़ने लगा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में नदी किनारे रहने वाले लगभग 12 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, असम के धुबरी और कोकराझार जिलों में प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और स्थानीय प्रशासन की टीमें स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों के अनुसार, एहतियात के तौर पर लोगों को नदी किनारे और निचले इलाकों से हटाया गया है। हालांकि, शुक्रवार शाम तक कई क्षेत्रों में नदी का जलस्तर घटने की जानकारी भी सामने आई और किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है।
भूटान की शिंताफू झील टूटने से बढ़ा खतरा
जानकारी के अनुसार, गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 की शाम भूटान के गासा जिले में स्थित शिंताफू ग्लेशियर झील से अचानक बड़ी मात्रा में पानी निकलने लगा।इस घटना को वैज्ञानिक भाषा में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है।इसमें किसी हिमनदी से बनी झील की प्राकृतिक सीमा टूटने या पानी के अचानक बाहर निकलने से नीचे स्थित नदी क्षेत्रों में तेज बहाव पैदा हो सकता है।भूटान में हुई इस घटना के बाद पानी मो नदी प्रणाली से होकर संकोश नदी की ओर बढ़ा।संकोश नदी भारत में पश्चिम बंगाल और असम की सीमा से जुड़े क्षेत्रों में बहती है।इसलिए दोनों राज्यों में नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए तत्काल चेतावनी जारी की गई।
करीब 74 लाख घनमीटर पानी निकलने की जानकारी
प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, झील से लगभग 74 लाख घनमीटर पानी अचानक बाहर निकला।पानी के साथ मिट्टी, पत्थर और अन्य मलबा भी बहकर निचले क्षेत्रों की ओर पहुंचा।इससे नदी के जलस्तर में तेजी से बदलाव की आशंका पैदा हुई।विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह अचानक बड़ी मात्रा में पानी निकलने से नदी के सामान्य प्रवाह पर असर पड़ सकता है।विशेष रूप से नदी किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों में पानी पहुंचने का खतरा रहता है।भूटान में हुई घटना के बाद भारतीय अधिकारियों ने नदी के बहाव और जलस्तर की लगातार निगरानी शुरू की।
बंगाल में 12 हजार लोगों को किया गया शिफ्ट
पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार जिले में प्रशासन ने किसी बड़ी आपदा की आशंका को देखते हुए व्यापक एहतियाती कार्रवाई की।संकोश नदी के किनारे बसे गांवों और संवेदनशील क्षेत्रों से लगभग 12 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।जिला प्रशासन ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को ऊंचे स्थानों और राहत शिविरों में स्थानांतरित किया गया है।कुछ परिवार अपने मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित जगहों की ओर जाते दिखाई दिए।अधिकारियों ने बताया कि लोगों को हटाने का उद्देश्य अचानक बाढ़ आने की स्थिति में जनहानि रोकना है।अलीपुरद्वार के कुमारग्राम क्षेत्र सहित अन्य नदी किनारे बसे इलाकों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह कदम एहतियातन उठाया गया है।
स्कूलों में बनाए गए राहत शिविर
अलीपुरद्वार जिला प्रशासन ने विस्थापित लोगों के लिए विभिन्न स्थानों पर अस्थायी राहत शिविर बनाए हैं।कुछ स्कूल भवनों को भी आश्रय स्थलों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।अलीपुरद्वार के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार शॉ ने बताया कि छह से सात हजार लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किए जाने के साथ चार हजार से अधिक लोगों के लिए आश्रय की व्यवस्था की गई थी।राहत केंद्रों में खाने-पीने की सामग्री, पानी और बच्चों के लिए जरूरी वस्तुओं की व्यवस्था की जानकारी दी गई है।प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों से अपील की कि वे खतरा पूरी तरह समाप्त होने तक सुरक्षित स्थानों पर ही रहें।अधिकारियों ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है।
असम के धुबरी और कोकराझार में हाई अलर्ट
भूटान की झील से पानी निकलने के बाद असम के धुबरी और कोकराझार जिलों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई।संकोश नदी इन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग है।नदी में अचानक पानी बढ़ने से किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों के प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ाई।असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने स्थिति पर नजर रखने और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि धुबरी जिला प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है और संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार है।इसके अलावा एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को भी सतर्क रखा गया है।
नदी का जलस्तर घटने से मिली राहत
शुक्रवार दोपहर तक असम के कुछ क्षेत्रों से राहत भरी जानकारी भी सामने आई।कोकराझार के जिला आयुक्त पंकज चक्रवर्ती ने संकोश नदी के किनारे का निरीक्षण किया।उन्होंने बताया कि नदी का जलस्तर घटता दिखाई दे रहा है और उस समय संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ की तत्काल आशंका नहीं थी।अधिकारियों के अनुसार, नदी के आसपास किसी बड़े जलभराव की स्थिति भी सामने नहीं आई।हालांकि, प्रशासन ने एहतियातन निगरानी जारी रखी है।कोकराझार और धुबरी में आपदा प्रबंधन की टीमों को जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा गया है।इससे स्पष्ट है कि शुरुआती चेतावनी के बाद स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन सतर्कता समाप्त नहीं की गई है।
केंद्र सरकार ने भी जारी की चेतावनी
भूटान में ग्लेशियर झील टूटने की जानकारी मिलने के बाद भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने संबंधित राज्यों को चेतावनी जारी की।भारत के दूतावास से मिली जानकारी के आधार पर संकोश नदी के निचले क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ने की संभावना जताई गई।केंद्रीय जल आयोग ने पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार और असम के धुबरी जिले को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी।अधिकारियों को नदी के जलस्तर पर लगातार नजर रखने और संवेदनशील क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाने को कहा गया।इसके बाद राज्य सरकारों ने स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाया।दोनों राज्यों की टीमें भूटान से मिलने वाली सूचनाओं पर भी नजर बनाए हुए हैं।
NDRF और SDRF की टीमें तैयार
संभावित बाढ़ को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और राज्य आपदा मोचन बल की टीमों को सतर्क किया गया है।पश्चिम बंगाल में कूचबिहार जिले के तुफानगंज और बक्सिरहाट क्षेत्रों में भी बचाव दलों को तैयार रखा गया।असम में गुवाहाटी स्थित एनडीआरएफ की पहली बटालियन को संभावित राहत अभियान के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए।आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर स्थिति की समीक्षा कर रही हैं।जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में नावों और अन्य बचाव उपकरणों के जरिए लोगों को निकाला जा सकता है।हालांकि, शुक्रवार तक उपलब्ध रिपोर्टों में बड़े पैमाने पर जनहानि या गंभीर तबाही की पुष्टि नहीं हुई थी।
क्या है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड?
ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड एक ऐसी प्राकृतिक घटना है, जिसमें ग्लेशियर से बनी झील का पानी अचानक बड़ी मात्रा में बाहर निकलता है।हिमालयी क्षेत्रों में कई झीलें बर्फ और ग्लेशियर के पिघलने से बनती हैं।इन झीलों का पानी कभी-कभी बर्फ, चट्टानों या प्राकृतिक मलबे से बने अवरोधों के पीछे जमा रहता है।यदि यह अवरोध कमजोर होकर टूट जाए, तो पानी तेजी से नीचे की ओर बह सकता है।इससे अचानक बाढ़ आने का खतरा बढ़ जाता है।पहाड़ी क्षेत्रों में ऐसे तेज बहाव के साथ पत्थर, मिट्टी और पेड़ भी बह सकते हैं।यही वजह है कि ग्लेशियर झीलों की निगरानी हिमालयी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सिक्किम में 2023 में आई थी बड़ी तबाही
हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर झील टूटने की घटनाएं पहले भी गंभीर नुकसान पहुंचा चुकी हैं।अक्टूबर 2023 में सिक्किम की दक्षिण ल्होनक झील से पानी निकलने के बाद तीस्ता नदी में विनाशकारी बाढ़ आई थी।उस घटना में कई लोगों की मौत हुई थी और सड़कें, पुल तथा अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था।भूटान की वर्तमान घटना के बाद पश्चिम बंगाल और असम में प्रशासन की त्वरित सतर्कता इसी प्रकार की संभावित आपदा से बचाव के लिए महत्वपूर्ण है।हालांकि, भूटान की शिंताफू झील से हुई घटना का प्रभाव सिक्किम की उस आपदा जितना होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
लोगों को नदी किनारे जाने से बचने की सलाह
बाढ़ की संभावित स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों को नदी किनारे और निचले क्षेत्रों में जाने से बचने की सलाह दी है।विशेष रूप से नदी के आसपास रहने वाले परिवारों को बच्चों और मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर रखने के लिए कहा गया है।लोगों से अपील की गई है कि वे नदी का जलस्तर देखने के लिए किनारों पर भीड़ न लगाएं।किसी भी आपातकालीन स्थिति में स्थानीय प्रशासन और बचाव दलों के निर्देशों का पालन करें।वर्तमान में राहत और बचाव की तैयारियां जारी हैं।