कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी राजनीतिक उठापटक के बीच पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने सायोनी घोष पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। महुआ मोइत्रा ने सायोनी घोष को कथित तौर पर ‘बेईमान’ और ‘गद्दार’ बताते हुए कहा कि लोगों को उनसे यह सीखना चाहिए कि जिंदगी और राजनीति में क्या नहीं करना चाहिए। एक बाल यू-ट्यूबर को दिए इंटरव्यू में महुआ ने सायोनी की तुलना ऐतिहासिक किरदार मीर जाफर से करते हुए कहा कि बंगाल की राजनीति में अब उनका नाम भी इसी तरह लिया जा रहा है।
महुआ मोइत्रा ने किशनगंज के आठ वर्षीय यू-ट्यूबर अर्श नवाज को दिए इंटरव्यू में टीएमसी से सायोनी घोष के अलग होने को लेकर सवालों का जवाब दिया। जब उनसे पूछा गया कि सायोनी के पार्टी छोड़ने से क्या संदेश जाता है, तो महुआ ने कहा कि जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जिनसे हमें यह सीख मिलती है कि क्या करना चाहिए, जबकि कुछ लोगों को देखकर यह सीखना चाहिए कि क्या नहीं करना चाहिए।
महुआ ने कहा कि सायोनी को देखकर लोगों को सीखना चाहिए कि जिंदगी में क्या नहीं करना चाहिए। उन्होंने उन्हें बेईमान और गद्दार बताते हुए कहा कि ऐसा व्यक्ति नहीं बनना चाहिए। महुआ ने इसी संदर्भ में मीर जाफर का उदाहरण दिया और कहा कि बंगाल की राजनीति में भी सायोनी का नाम अब कथित तौर पर इसी तरह लिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बेईमान व्यक्ति एक बात कहता है और दूसरी करता है।
महुआ से जब यह सवाल किया गया कि क्या मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सायोनी घोष को आगे बढ़ाकर गलती की थी, तो उन्होंने सीधे तौर पर ममता के फैसले को गलती मानने से इनकार किया। महुआ ने कहा कि उनकी पार्टी और नेतृत्व जो भी करते हैं, साफ दिल और ईमानदारी से करते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई बाद में बेईमानी करता है तो वह उसकी अपनी समस्या है और उसका परिणाम भी उसे ही भुगतना होगा।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर कथित टूट और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। खबर के मुताबिक, ममता बनर्जी की पार्टी में बगावत के बाद सायोनी घोष समेत कई नेताओं के दूसरे राजनीतिक खेमे में जाने की बात सामने आई है। इसी घटनाक्रम को लेकर महुआ और सायोनी के बीच तल्खी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है।
इंटरव्यू के दौरान बाल यू-ट्यूबर ने महुआ से यह भी सवाल किया कि यदि सायोनी घोष ने टीएमसी छोड़कर अलग रास्ता चुना, तो उन्होंने खुद पार्टी क्यों नहीं छोड़ी। इस पर महुआ ने कहा कि वह नफरत को हटाने के उद्देश्य से राजनीति में आई हैं और जब तक राजनीति में रहेंगी, उसी पक्ष में रहकर लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राजनीति छोड़ सकती हैं, लेकिन राजनीतिक रूप से पलटी नहीं मारेंगी।
महुआ ने पश्चिम बंगाल में टीएमसी की चुनावी हार पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत और हार राजनीति का हिस्सा है। उनके मुताबिक, हार के पीछे लोगों में बदलाव की इच्छा के साथ-साथ चुनाव में कथित गड़बड़ियां भी एक कारण रही हैं। महुआ ने दावा किया कि करीब 30 लाख ऐसे लोग थे जो मतदाता होने के बावजूद वोट नहीं डाल पाए। उन्होंने चुनाव के दौरान पुलिस के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया।
महुआ ने कहा कि ममता बनर्जी इससे पहले कई बार चुनाव जीत चुकी हैं और लंबे समय तक राज्य की राजनीति में प्रभावशाली रही हैं। उनके मुताबिक, जनता के बीच बदलाव की इच्छा होना लोकतंत्र का हिस्सा है और चुनाव में हार-जीत होती रहती है। हालांकि, उन्होंने साथ ही आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में कथित तौर पर हुई अनियमितताओं का भी नतीजे पर असर पड़ा।
सायोनी घोष को लेकर महुआ की यह टिप्पणी टीएमसी के भीतर चल रहे मतभेदों को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा में ले आई है। दोनों नेताओं के राजनीतिक सफर और ममता बनर्जी के साथ उनके संबंधों को देखते हुए यह विवाद पार्टी के लिए भी अहम माना जा रहा है। एक तरफ महुआ पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहने की बात कह रही हैं, वहीं दूसरी ओर सायोनी घोष को लेकर उनके लगातार तीखे बयान पार्टी के अंदर की खींचतान को उजागर कर रहे हैं।
फिलहाल महुआ मोइत्रा के बयान पर सायोनी घोष की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन महुआ द्वारा उन्हें ‘मीर जाफर’ जैसे ऐतिहासिक संदर्भ से जोड़ना बंगाल की राजनीति में नए विवाद को जन्म दे सकता है। आने वाले दिनों में इस बयान पर सायोनी या टीएमसी के अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया से राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है।
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