कोविड फंड पर सवाल: बंगाल में आधे से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट बंद

Update: 2026-07-26 09:01 GMT

कोलकाता : कोविड-19 महामारी के दौरान स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए ऑक्सीजन प्लांटों और केंद्र सरकार द्वारा जारी राहत राशि के उपयोग को लेकर पश्चिम बंगाल में गंभीर सवाल उठे हैं। एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन स्थिति राहत कोष (PM CARES) और कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) पहलों के तहत स्थापित किए गए आधे से अधिक प्रेशर स्विंग एडसॉर्प्शन (PSA) ऑक्सीजन प्लांट दिसंबर 2023 तक या तो शुरू ही नहीं किए गए थे या फिर पूरी तरह से बंद पड़े थे। इसके अलावा कई स्थानों पर वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जैसे महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरण भी उपयोग के बिना पड़े मिले।

रिपोर्ट के अनुसार, कोविड महामारी के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र सरकार ने विभिन्न योजनाओं के माध्यम से राज्यों को बड़ी वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी। इन योजनाओं का उद्देश्य अस्पतालों में ऑक्सीजन की उपलब्धता बढ़ाना, आधुनिक चिकित्सा उपकरण मुहैया कराना और भविष्य में किसी भी स्वास्थ्य आपदा से निपटने की क्षमता विकसित करना था। हालांकि, पश्चिम बंगाल में इन संसाधनों के उपयोग को लेकर कई कमियां सामने आई हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में PM CARES और CSR फंड के माध्यम से लगाए गए PSA ऑक्सीजन प्लांटों में से आधे से अधिक निर्धारित समय तक संचालन में नहीं आ सके। कई प्लांट तकनीकी कारणों, रखरखाव की कमी या अन्य प्रशासनिक समस्याओं के चलते बंद रहे। इससे महामारी के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि दो स्वास्थ्य संस्थानों में वेंटिलेटर और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर जैसे जीवनरक्षक उपकरण बिना उपयोग के पड़े मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के समय इन उपकरणों की भारी आवश्यकता थी, ऐसे में उनका इस्तेमाल न होना संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन पर सवाल खड़े करता है।

रिपोर्ट में कोविड से जुड़े वित्तीय संसाधनों के उपयोग में भी गंभीर कमियों की ओर संकेत किया गया है। इसमें कहा गया है कि इमरजेंसी कोविड रिस्पॉन्स पैकेज-2 (ECRP-II) के तहत राज्य को जारी कुल राशि का बड़ा हिस्सा निर्धारित समय के भीतर खर्च नहीं किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2022 तक जारी कुल धनराशि में से 659.28 करोड़ रुपये, जो कुल राशि का लगभग 65 प्रतिशत था, खर्च ही नहीं किया गया।

ECRP-II का उद्देश्य राज्यों में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करना, अस्पतालों की क्षमता बढ़ाना, चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराना, आईसीयू सुविधाओं का विस्तार करना और भविष्य की स्वास्थ्य आपदाओं के लिए बेहतर तैयारी सुनिश्चित करना था। लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि उपलब्ध धनराशि का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं होने के कारण इन उद्देश्यों की पूर्ति प्रभावित हुई।

इसके अलावा, रिपोर्ट में राज्य कोविड अनटाइड फंड के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए हैं। इस मद में राज्य को 462.05 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे। यह राशि उन आवश्यक कार्यों के लिए थी जो केंद्र सरकार के निर्धारित कोविड पैकेजों के दायरे में शामिल नहीं थे और जिन पर राज्य सरकार अपनी आवश्यकता के अनुसार खर्च कर सकती थी। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार यह पूरी राशि भी उपयोग में नहीं लाई गई।

विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी जैसी आपदा के दौरान समय पर संसाधनों का उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि उपलब्ध धनराशि और उपकरणों का प्रभावी उपयोग नहीं किया जाता, तो स्वास्थ्य व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और मरीजों को आवश्यक सुविधाएं समय पर नहीं मिल पातीं।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए स्वास्थ्य परियोजनाओं की नियमित निगरानी, समयबद्ध क्रियान्वयन और संसाधनों के प्रभावी उपयोग की व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए। साथ ही अस्पतालों में स्थापित चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और संचालन के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि कोविड महामारी ने देश की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने कई चुनौतियां रखीं, लेकिन इसके साथ ही स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत करने का अवसर भी प्रदान किया। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उपलब्ध कराए गए संसाधनों का पूर्ण और प्रभावी उपयोग होना आवश्यक था।

रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद स्वास्थ्य ढांचे, वित्तीय प्रबंधन और कोविड राहत योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर बहस तेज हो गई है। अब यह अपेक्षा की जा रही है कि संबंधित विभाग रिपोर्ट में उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करेंगे और जहां भी कमियां पाई गई हैं, वहां आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

कोविड जैसी आपदाओं से भविष्य में प्रभावी ढंग से निपटने के लिए स्वास्थ्य अवसंरचना, वित्तीय संसाधनों के पारदर्शी उपयोग और समयबद्ध परियोजना क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर विशेषज्ञ लगातार जोर दे रहे हैं।

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