कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बयानबाजी के बीच भाजपा नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी का एक विवादित बयान सामने आया है। एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में खड़े होने की अपील करते हुए अपने राजनीतिक विरोधियों पर तीखा हमला बोला। अधिकारी ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी), 'दिमागी नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल की पिछली सरकार ने राष्ट्रवाद के बजाय तुष्टीकरण की राजनीति को प्राथमिकता दी। उनके इन बयानों से राज्य में राजनीतिक विवाद बढ़ने की संभावना है।
प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन में खड़े होने की अपील
पश्चिम बंगाल में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुवेंदु अधिकारी ने लोगों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में खड़े होने की अपील की।
उन्होंने अपने भाषण में राजनीतिक विरोधियों के लिए कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया।
अधिकारी ने कहा, "प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन में खड़े हों; 'दिमागी नक्सलियों', 'टुकड़े-टुकड़े' गैंग और कॉकरोच की इस जमात को पनपने न दें।"
उनकी टिप्पणी राजनीतिक विरोधियों के प्रति अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर चर्चा में आ गई है।
हालांकि उन्होंने जिन समूहों का उल्लेख किया, उनकी स्पष्ट संगठनात्मक पहचान और इन आरोपों के समर्थन में कोई प्रमाण उपलब्ध विवरण में नहीं दिया गया है।
'कॉकरोच जनता पार्टी' कहकर साधा निशाना
सुवेंदु अधिकारी ने अपने बयान में 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी सीजेपी शब्द का इस्तेमाल किया।
इससे एक दिन पहले भी उन्होंने सीजेपी के कथित प्रभाव की तुलना कीड़ों और कोरोनावायरस के फैलाव से की थी।
इसके बाद उन्होंने एक बार फिर उसी प्रकार की भाषा का इस्तेमाल करते हुए अपने विरोधियों की आलोचना की।
राजनीतिक विमर्श में किसी समूह की तुलना कीड़ों या बीमारी से करना अमानवीय और अपमानजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े कर सकता है।
अधिकारी के बयान में प्रयुक्त शब्द उनके अपने राजनीतिक आरोप हैं, इन्हें संबंधित व्यक्तियों या समूहों का तथ्यात्मक वर्णन नहीं माना जा सकता।
'दिमागी नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' का किया उल्लेख
भाजपा नेता ने अपने संबोधन में 'दिमागी नक्सल' और 'टुकड़े-टुकड़े गैंग' जैसे राजनीतिक शब्दों का भी इस्तेमाल किया।
भारतीय राजनीति में इन शब्दों का उपयोग अक्सर वैचारिक विरोधियों की आलोचना के लिए किया जाता रहा है।
हालांकि इन शब्दों की कोई एक निश्चित कानूनी परिभाषा नहीं है।
किसी व्यक्ति या संगठन को इन नामों से संबोधित करना अपने आप में उसके खिलाफ किसी गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण नहीं होता।
अधिकारी ने इन समूहों को लेकर आलोचनात्मक टिप्पणी की और लोगों से उनके प्रभाव का विरोध करने की अपील की।
तृणमूल कांग्रेस की पूर्व सरकार पर गंभीर आरोप
सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल की पूर्व तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा।
सोमवार को तमलुक में भाजपा कार्यालय के भूमिपूजन के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने राष्ट्रवाद की उपेक्षा की और तुष्टीकरण की राजनीति की।
उन्होंने यह दावा भी किया कि पूर्व सरकार पश्चिम बंगाल को 'ग्रेटर बांग्लादेश' में बदलना चाहती थी।
हालांकि अधिकारी ने इस गंभीर आरोप के समर्थन में कोई प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। इसे उनके राजनीतिक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
'जय बांग्ला' नारे और अलग झंडे पर सवाल
अधिकारी ने अपने बयान में पश्चिम बंगाल के लिए अलग गीत, झंडे और 'जय बांग्ला' नारे का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने बांग्लादेश से जुड़े नारे को अपनाया और राज्य की अलग पहचान बनाने की कोशिश की।
उनके अनुसार, ये कदम राष्ट्रवाद के प्रति पूर्व सरकार के दृष्टिकोण को दर्शाते हैं।
हालांकि किसी राज्य के सांस्कृतिक गीत या प्रतीक को अपनाने और अलग राष्ट्र बनाने की योजना के बीच कोई संबंध अपने आप सिद्ध नहीं होता।
अधिकारी का 'ग्रेटर बांग्लादेश' संबंधी दावा स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।
वामपंथी सरकारों पर भी साधा निशाना
सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में लंबे समय तक सत्ता में रहे वाम मोर्चे की भी आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि वामपंथी सरकार के 34 वर्षों और उसके बाद तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन में राज्य की सांस्कृतिक विरासत को नुकसान पहुंचा।
अधिकारी ने दोनों सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक परंपराओं को अधिक महत्व देने की जरूरत है।
उनके इन आरोपों को लेकर राजनीतिक मतभेद बने हुए हैं।
स्कूलों में राष्ट्रवाद से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर
रविवार को पूर्व मेदिनीपुर के रामनगर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अधिकारी ने शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्रवाद से जुड़े कार्यक्रम आयोजित करने की बात कही थी।
उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में हर वर्ष भाषण, प्रश्नोत्तरी और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं।
उनके अनुसार, ऐसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को देश के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी दी जा सकती है।
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू करने की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही।
सीजेपी और मतदाता सूची विवाद की पृष्ठभूमि
कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी हाल के महीनों में चुनावी मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को लेकर चर्चा में रही है।
इस समूह ने चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किए हैं।
वहीं भाजपा और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों का विरोध किया गया है।
इसी राजनीतिक विवाद के बीच सुवेंदु अधिकारी ने सीजेपी पर तीखी टिप्पणी की है।
राजनीतिक भाषा को लेकर भी उठे सवाल
अधिकारी द्वारा विरोधियों की तुलना कीड़ों और बीमारी से करने पर राजनीतिक भाषा की मर्यादा को लेकर सवाल उठे हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों और संगठनों को एक-दूसरे की नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है।
लेकिन किसी समूह के लिए अमानवीय उपमाओं का इस्तेमाल सार्वजनिक विमर्श को अधिक तनावपूर्ण बना सकता है।
पश्चिम बंगाल में वामपंथी संगठनों ने हाल में दुर्गा पूजा के दौरान अपने पुस्तक स्टॉलों पर कथित हमलों का आरोप भी लगाया था। उन्होंने इन घटनाओं को लोकतांत्रिक विचारों पर हमला बताया था।
बंगाल में राजनीतिक विवाद जारी
सुवेंदु अधिकारी के ताजा बयान ने पश्चिम बंगाल में राष्ट्रवाद, शिक्षा, राजनीतिक विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन की अपील करते हुए सीजेपी, वामपंथी समूहों और पूर्व तृणमूल सरकार की आलोचना की।
दूसरी ओर, उनके आरोपों और विरोधियों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल अधिकारी के 'ग्रेटर बांग्लादेश' संबंधी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उनके बयान को राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि प्रमाणित तथ्य के रूप में।