दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर महिला से छेड़छाड़ का आरोप, पुलिस अधिकारी गिरफ्तार
एएसआई पर महिला से अनुचित व्यवहार का आरोप
कोलकाता: दक्षिण कोलकाता के सुरुचि संघ दुर्गा पूजा पंडाल के बाहर ड्यूटी कर रही एक महिला सिविक वालंटियर से कथित छेड़छाड़ के मामले में पुलिस के एक सहायक उपनिरीक्षक यानी एएसआई को गिरफ्तार किया गया है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सोमवार को गिरफ्तारी की जानकारी दी। शिकायतकर्ता की उम्र 21 वर्ष है। महिला ने न्यू अलीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके बाद आरोपी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की गई। मामले की जांच जारी है।
पंडाल के निकास द्वार पर तैनात थी महिला
शिकायत के मुताबिक, घटना 17 अक्टूबर की रात करीब 11 से 11:30 बजे के बीच हुई। उस समय महिला वालंटियर न्यू अलीपुर स्थित सुरुचि संघ दुर्गा पूजा पंडाल के निकास द्वार पर अपनी जिम्मेदारी निभा रही थी। आरोप है कि इसी दौरान एएसआई ने उसे अनुचित तरीके से छुआ। महिला ने अपने साथ हुए कथित व्यवहार को लेकर लिखित शिकायत दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने घटना को संज्ञान में लिया और मामला दर्ज किया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, आरोप उस समय के व्यवहार से संबंधित हैं, जब महिला आयोजन स्थल पर ड्यूटी कर रही थी। घटना के अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
आर्म्ड पुलिस की तीसरी बटालियन में है तैनाती
आरोपी की पहचान 50 वर्षीय कबीरुल हसन मंडल के रूप में हुई है। वह कोलकाता आर्म्ड पुलिस की तीसरी बटालियन की ‘बी’ कंपनी से संबद्ध एएसआई है। महिला की लिखित शिकायत मिलने के बाद उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई। पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप सामने आने के कारण यह मामला विशेष ध्यान खींच रहा है। शिकायतकर्ता स्वयं आयोजन में ड्यूटी कर रही महिला वालंटियर है। फिलहाल आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। गिरफ्तारी को आरोप साबित होने या अदालत की ओर से दोषसिद्धि के बराबर नहीं माना जा सकता।
न्यू अलीपुर थाने में दर्ज हुआ मामला
महिला की शिकायत पर न्यू अलीपुर पुलिस स्टेशन में 18 अक्टूबर को भारतीय न्याय संहिता की धारा 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया। शिकायत में अवांछित शारीरिक संपर्क का आरोप लगाया गया है। पुलिस ने आरोपी के परिवार को भी उसकी गिरफ्तारी के बारे में सूचित किया है। घटना की तारीख और मामला दर्ज होने की तारीख अलग हैं। शिकायत में कथित घटना 17 अक्टूबर की रात की बताई गई है, जबकि प्राथमिकी अगले दिन दर्ज हुई। सोमवार, 19 अक्टूबर को गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी सामने आई। इस घटनाक्रम में महिला की लिखित शिकायत कार्रवाई का महत्वपूर्ण आधार है।
घटना से जुड़ा बताया जा रहा वीडियो वायरल
मामले से संबंधित बताया जा रहा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है। वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर लोगों का ध्यान गया। हालांकि, प्रसारित वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उसमें दिखाई देने वाले दृश्य और उनसे जुड़े दावों को जांच के निष्कर्ष से अलग रखना जरूरी है। किसी वीडियो का सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा होना अपने आप उसकी पूरी पृष्ठभूमि स्पष्ट नहीं करता। इस मामले में भी शिकायत, घटना का समय और स्थान तथा उपलब्ध सामग्री को साथ रखकर ही घटनाक्रम की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर जांच शुरू की है।
विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू
गिरफ्तारी के अलावा आरोपी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध विवरण में किसी अंतिम विभागीय फैसले का उल्लेख नहीं है। ऐसे में निलंबन, बर्खास्तगी या किसी अन्य निश्चित दंड का दावा करना उचित नहीं होगा। आपराधिक मामले की जांच और विभागीय स्तर पर व्यवहार की समीक्षा अलग प्रक्रियाएं हैं। इस प्रकरण में आगे होने वाली कार्रवाई के बारे में आधिकारिक जानकारी आने पर ही स्पष्ट स्थिति सामने आएगी। फिलहाल पुष्टि की गई प्रमुख कार्रवाई आरोपी एएसआई की गिरफ्तारी और उसके खिलाफ मामला दर्ज होना है।
ड्यूटी के दौरान सम्मान और सुरक्षा का सवाल
यह घटना आयोजन स्थलों पर काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल की जरूरत को सामने रखती है। सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किसी भी कर्मचारी या वालंटियर को अपनी जिम्मेदारी निभाते समय अनुचित व्यवहार का सामना नहीं करना चाहिए। शिकायत करने का अवसर और उस शिकायत पर निष्पक्ष कार्रवाई, दोनों महत्वपूर्ण हैं।
इस मामले में महिला ने लिखित शिकायत देकर अपनी बात पुलिस के सामने रखी है। अब जांच के जरिए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण होना है। शिकायतकर्ता की निजता बनाए रखते हुए घटनाक्रम की पड़ताल करना भी जरूरी है। सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री साझा करते समय उसकी पहचान उजागर करने से बचना चाहिए। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। न्यायिक हिरासत, जमानत या किसी अंतिम अदालती आदेश के संबंध में उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट विवरण नहीं है। आगे की स्थिति आधिकारिक जांच और अदालत में होने वाली कार्यवाही से तय होगी।