Sundarnagar. सुंदरनगर। सुंदरनगर स्थित परिवार न्यायालय ने वैवाहिक विवाद से जुड़े भरण-पोषण के एक मामले में पत्नी की याचिका स्वीकार करते हुए पति को 20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण राशि अदा करने के आदेश दिए हैं। अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश होशियार सिंह वर्मा की अदालत ने 17 अक्तूबर 2026 को यह निर्णय सुनाया। मामले में पत्नी ने दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 125 के तहत पति से एक लाख रुपये प्रतिमाह भरण-पोषण दिलाने की मांग की थी। पत्नी का पक्ष था कि वह लंबे समय तक एक शिक्षण संस्थान में प्रिंसिपल के पद पर कार्यरत रही, लेकिन मार्च 2022 के बाद उसके पास नियमित रोजगार नहीं रहा। वहीं, पति ने याचिका का विरोध करते हुए पत्नी की शैक्षणिक योग्यता और पूर्व कार्य अनुभव का
हवाला दिया।


भरण-पोषण देने की जिम्मेदारी से इनकार किया। न्यायालय ने माना कि पत्नी उच्च शिक्षित है और उसे शिक्षण क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव है, लेकिन उसकी वर्तमान परिस्थितियों और रोजगार प्राप्त करने में आ रही कठिनाइयों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल उच्च शैक्षणिक योग्यता और पूर्व कार्य अनुभव के आधार पर पत्नी को भरण-पोषण के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। हालांकि, पत्नी द्वारा पति की मासिक आय दो लाख रुपये से अधिक होने के दावे को पर्याप्त साक्ष्यों से प्रमाणित नहीं किया जा सका। इसके बावजूद, न्यायालय ने पति की आजीविका अर्जित करने की क्षमता, पत्नी की आर्थिक स्थिति और मामले की समग्र परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण निर्धारित किया। न्यायालय ने 9 अगस्त 2023 को पारित आदेश को अंतिम करते हुए पति को पत्नी के पक्ष में 20,000 प्रतिमाह अदा करने का निर्देश दिया।
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