सुंदरनगर। जवाहरलाल नेहरू राजकीय इंजीनियरिंग महाविद्यालय सुंदरनगर में शुक्रवार को आयोजित तीसरे राज्य स्तरीय स्मार्ट हैकाथॉन-2026 में विद्यार्थियों के नवाचार को बढ़ावा देने के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने बड़ी पहल की है। तकनीकी शिक्षा, आवास एवं नगर एवं ग्राम नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी ने घोषणा की कि व्यावसायिक संभावनाओं वाले बेहतरीन प्रोजेक्ट्स को स्टार्टअप और उद्यम में बदलने के लिए 10 लाख रुपये तक का नवाचार कोष उपलब्ध करवाने की योजना तैयार की गई है। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे मंत्री ने विद्यार्थियों की ओर से तैयार किए गए तकनीकी प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि करीब तीन साल पहले शुरू हुआ स्मार्ट हैकाथॉन तकनीकी विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और नवाचार प्रदर्शित करने का मंच प्रदान कर रहा है।
इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री और किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उनकी तकनीकी सोच को समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोडऩा है। मंत्री ने बताया कि व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं वाले प्रोजेक्ट्स का विशेषज्ञों से मूल्यांकन करवाया जाएगा। उपयुक्त पाए जाने वाले प्रोजेक्ट्स को स्टार्टअप के रूप में विकसित करने के लिए आर्थिक सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन परियोजनाओं में व्यावहारिक उपयोगिता होगी और जिन्हें धरातल पर लागू करना संभव होगा, उन्हें संबंधित विभागों के सहयोग से लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों के नवाचार को प्रोत्साहन मिलने के साथ आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और जनसुविधाओं में सुधार की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
राज्य स्तरीय स्मार्ट हैकाथॉन-2026 में प्रदेश के विभिन्न इंजीनियरिंग महाविद्यालयों की 16 टीमों ने भाग लिया। विद्यार्थियों ने हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन और संचार से जुड़े तकनीकी समाधान प्रस्तुत किए। आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में ग्लेशियर झीलों की निगरानी, भूस्खलन की पूर्व चेतावनी और मौसम संबंधी आपदाओं के लिए हिम अलर्ट एआई जैसे प्रोजेक्ट्स पेश किए गए। स्वास्थ्य एवं सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के लिए फॉल डिटेक्शन वेस्ट, हेल्थ साथी सार्थक, ओपीडी सेवाओं के लिए सेहत साथी और दृष्टिबाधित व्यक्तियों की सहायता के लिए माई ब्लू हैप्टिक वेस्ट जैसे नवाचार प्रदर्शित किए गए। इसी तरह पहाड़ी क्षेत्रों में आवागमन और संचार को बेहतर बनाने के लिए तीर्थयात्रियों की बिना इंटरनेट ट्रैकिंग हेतु यात्रा कवच, इंटरनेट के बिना संचार के लिए मेश लिंक और संकरी सडक़ों पर यातायात प्रबंधन के लिए हिम घाटी एआई जैसे प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए गए।