Hospice. धर्मशाला। अखिल भारतीय आशा कर्मचारी महासंघ यानी कि भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर गुरुवार को धर्मशाला में आशा कर्मियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सुबह से ही बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता पुलिस स्टेशन धर्मशाला के समीप एकत्रित हुई और वहां से कचहरी चौक तक विशाल रैली निकाली। रैली के दौरान आशा कर्मियों ने हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की तथा अपनी मांगों को शीघ्र पूरा करने की मांग उठाई। रैली के उपरांत सभी आशा कर्मी डीसी कार्यालय परिसर पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में धरना-प्रदर्शन व नारेबाजी की गई। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने नियमितीकरण, सम्मानजनक वेतन और सामाजिक सुरक्षा की मांग को लेकर जोरदार नारे लगाए। इसके बाद प्रधानमंत्री, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त कांगड़ा के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया। आशा वर्करों द्वारा कहा गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत आशा कर्मी वर्षों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, स्वच्छता अभियान तथा विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं को सफल बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा और मासिक वेतन नहीं मिल रहा है तथा केवल प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) के आधार पर कार्य कराया जा रहा है। आशा कर्मचारी संघ ने मांग की है कि आशा कार्यकर्ताओं, आशा सहयोगिनियों एवं फैसिलिटेटरों को पदानुसार 26 हजार से 48 हजार रुपये तक मासिक वेतन, वार्षिक वेतनवृद्धि, समान कार्य के लिए समान वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन, सेवा निवृत्ति लाभ, दुर्घटना अथवा मृत्यु की स्थिति में पांच लाख रुपये मुआवजा, सेवानिवृत्ति पर दस लाख रुपये रिटायरमेंट बेनिफिट, पदोन्नति नीति, वर्ष में दो बार वर्दी, यात्रा भत्ता तथा अस्पतालों में विश्राम कक्ष जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही ठेका प्रथा समाप्त करने, निजी एजेंसियों को कार्य सौंपने की प्रक्रिया रोकने तथा टीकाकरण कार्य का प्रोत्साहन मानदेय बढ़ाने की भी मांग की गई। आशा कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।