तेहरान। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के कथित मिसाइल एवं ड्रोन हमलों के बीच पाकिस्तान, तुर्किए और सऊदी अरब की ईरान के साथ सुरक्षा वार्ता चर्चा में है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, सऊदी अरब के रक्षा मंत्री और तुर्किए के खुफिया प्रमुख की ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत प्रस्तावित है। इस घटनाक्रम ने तीनों देशों के कथित संयुक्त रक्षा समझौते और उसकी प्रभावशीलता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
'मक्का डिफेंस पैक्ट' पर क्यों उठ रहे सवाल?
रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 7 अगस्त को सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था, जिसे 'मक्का डिफेंस पैक्ट' और 'इस्लामिक नाटो' भी कहा गया। बताया गया कि इस समझौते का उद्देश्य तीनों देशों के बीच सामूहिक सुरक्षा सहयोग बढ़ाना था। हालांकि, समझौते की शर्तों और नाटो के अनुच्छेद-5 जैसी व्यवस्था होने की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
हूती हमलों से बढ़ी सऊदी अरब की चिंता
यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है। रिपोर्टों के मुताबिक, हूतियों ने सऊदी अरब के हवाई अड्डों, तेल प्रतिष्ठानों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। दूसरी ओर, सऊदी अरब की ओर से मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की जानकारी दी गई है। इन घटनाओं ने क्षेत्रीय रक्षा सहयोग की व्यावहारिक चुनौतियों को सामने रखा है।
एक सप्ताह में दूसरी बार तेहरान पहुंचे मुनीर?
रिपोर्टों के अनुसार, आसिम मुनीर की एक सप्ताह के भीतर यह दूसरी तेहरान यात्रा बताई जा रही है। पाकिस्तान सेना ने उनकी आधिकारिक यात्रा की जानकारी दी है, हालांकि विस्तृत कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया। इससे पहले मुनीर की ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान सहित वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की खबरें भी सामने आई थीं।
ईरान में चार देशों की उच्चस्तरीय बैठक
26 अक्टूबर को तेहरान में चारों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई। ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रजाई ने इसकी मेजबानी की। बैठक में सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान, पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और तुर्किए के खुफिया प्रमुख इब्राहिम कालिन शामिल हुए। बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में चारों देशों ने क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए आपसी संवाद तथा सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई।
क्या 'इस्लामिक नाटो' नाकाम साबित हुआ?
हूती हमलों के बीच तीनों रक्षा सहयोगी देशों का ईरान से बातचीत करना महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम है। हालांकि, इसे रक्षा समझौते की विफलता या ईरान के सामने आत्मसमर्पण का प्रमाण नहीं माना जा सकता। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत का उद्देश्य तनाव कम करना, क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाना और कूटनीतिक समाधान के प्रयासों को समर्थन देना है। 
अब आगे क्या?
चारों देशों ने बातचीत जारी रखने का फैसला किया है, लेकिन हूती हमलों को रोकने या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष समाप्त करने के लिए किसी अंतिम समझौते की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में तेहरान की इस बैठक को पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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