लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश में 1975 में लगाए गए आपातकाल का उल्लेख करते हुए लोकतंत्र और कानून के शासन के महत्व पर जोर दिया। लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में संबोधित करते हुए उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और उसके बाद देश में आपातकाल लागू किए जाने की घटनाओं का जिक्र किया।
 
हाईकोर्ट के फैसले के 13 दिन बाद लगी थी इमरजेंसी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस ऐतिहासिक घटनाक्रम की तीसरी महत्वपूर्ण तारीख 25 जून 1975 थी। उन्होंने बताया कि इससे पहले 12 जून 1975 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के रायबरेली लोकसभा चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया था। योगी ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के ठीक 13 दिन बाद देश में आपातकाल लागू कर दिया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का महत्वपूर्ण अध्याय बताते हुए इसके प्रभावों को समझने की जरूरत पर जोर दिया।
कानून का शासन और सत्ता का शासन
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कानून के शासन और सत्ता के शासन के बीच अंतर को रेखांकित किया। उनके मुताबिक, लोकतंत्र में संविधान और कानून सर्वोपरि होने चाहिए तथा किसी भी व्यक्ति या पद को इनके ऊपर नहीं माना जा सकता। उन्होंने आपातकाल के दौरान न्यायपालिका की भूमिका का भी उल्लेख किया और न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति को याद किया। आपातकाल के उस दौर में नागरिक स्वतंत्रताओं, प्रेस की आजादी और मौलिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
 
लोकतांत्रिक संस्थाओं की अहमियत पर जोर
25 जून 1975 को देश में आपातकाल घोषित किया गया था, जो 21 मार्च 1977 तक जारी रहा। इस अवधि को भारत के संवैधानिक और राजनीतिक इतिहास के महत्वपूर्ण दौर के रूप में देखा जाता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए संविधान, न्यायपालिका और कानून के शासन का सम्मान जरूरी है।
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