36 लाख के कर्ज में डूबे कंप्यूटर टीचर ने 10 वर्षीय छात्र का किया अपहरण, फिरौती के लिए की हत्या
बड़ी खबर
Gorakhpur. गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में सर्राफा व्यापारी के 10 वर्षीय पोते वैभव की अपहरण के बाद हत्या के मामले में पुलिस जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपी सर्वेश उर्फ बिट्टू भट्ट ने पूछताछ में अपना अपराध स्वीकार करते हुए बताया कि वह करीब 36 लाख रुपये के कर्ज में डूबा हुआ था। भारी आर्थिक दबाव और कर्ज की किस्तें नहीं चुका पाने की परेशानी के चलते उसने फिरौती के लिए मासूम का अपहरण करने की योजना बनाई। आरोपी ने यह भी दावा किया कि उसने इंटरनेट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से यह जानकारी जुटाई कि कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग किस तरह काम करता है और फिर उसी तरह की रणनीति अपनाने की कोशिश की।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सर्वेश एक कंप्यूटर कोचिंग सेंटर चलाता है और मृतक वैभव का कंप्यूटर शिक्षक भी था। पूछताछ में उसने बताया कि सोमवार को उसने अपहरण की योजना बनाई। स्कूल से लौटने के बाद उसने वैभव को गिफ्ट देने का लालच देकर अपने साथ बुलाया। आरोपी के अनुसार, जब वैभव ने शोर मचाना शुरू किया तो उसने पकड़े जाने के डर से उसका गला दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने मासूम के शव को एक बोरी में भरकर अपने मकान के बेसमेंट में रखे अनाज के पास छिपा दिया।
हत्या के बाद आरोपी ने पहले से खरीदे गए विदेशी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर फिरौती मांगने की योजना को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, उसने इंटरनेट के माध्यम से लगभग 199 रुपये में कंबोडिया का एक वर्चुअल मोबाइल नंबर खरीदा और उसी नंबर से व्हाट्सएप अकाउंट बनाकर वैभव के पिता को कॉल की। कॉल के दौरान उसने एक करोड़ रुपये की फिरौती की मांग की। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने और पुलिस को भ्रमित करने के उद्देश्य से विदेशी नंबर का इस्तेमाल किया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी घटना के बाद खुद को संदेह से बचाने के लिए वैभव के परिवार के साथ बच्चे की तलाश करने का नाटक करता रहा। वह परिजनों के साथ खोजबीन में शामिल हुआ ताकि किसी को उस पर शक न हो। हालांकि पुलिस की तकनीकी जांच और पूछताछ के दौरान उसके बयान में विरोधाभास मिलने पर संदेह गहरा गया और अंततः उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बताया कि उसने एक एनबीएफसी कंपनी से 25 लाख रुपये का ऋण लिया था, जिसकी मासिक किस्त 28,700 रुपये थी। इसके अलावा उसने अपने एक मित्र से 11 लाख रुपये उधार लिए थे। इस तरह उस पर कुल लगभग 36 लाख रुपये का कर्ज हो गया था। आरोपी का कहना है कि वह आर्थिक संकट से बुरी तरह परेशान था और उसके पिता भी लगातार कर्ज को लेकर उसे ताने देते थे। इसी दबाव में उसने फिरौती के लिए अपहरण की साजिश रची।
पुलिस के अनुसार, आरोपी पहले भी आपराधिक मामले में जेल जा चुका है। वर्ष 2024 में बिहार के एक पेपर लीक मामले में उसकी गिरफ्तारी हुई थी और वह लगभग 40 दिन तक प्रयागराज की नैनी जेल में बंद रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि जेल में उसकी मुलाकात कई अपराधियों से हुई थी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं इस घटना की योजना बनाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही। मृतक वैभव चौथी कक्षा का छात्र था। परिवार के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद दुखद है क्योंकि लगभग डेढ़ महीने पहले ही उसकी मां का बीमारी के कारण निधन हुआ था। अब बेटे की हत्या से परिवार पूरी तरह टूट गया है। घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश है और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।
फिलहाल पुलिस आरोपी सर्वेश के पिता, भाई, पत्नी समेत सात लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या परिवार के किसी सदस्य को घटना की जानकारी थी या फिर आरोपी ने पूरी वारदात अकेले अंजाम दी। वैभव के शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी वीडियोग्राफी भी की गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई है। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, मोबाइल रिकॉर्ड, व्हाट्सएप कॉल, बैंक लेन-देन और अन्य तकनीकी पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया जाएगा। इस घटना ने न केवल गोरखपुर बल्कि पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है और बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।