चक्रवात 'अर्णब' का पुरी में असर, तेज हवाओं के साथ भारी बारिश, समुद्र में उठीं ऊंची लहरें
चक्रवात
पुरी। ओडिशा में चक्रवाती तूफान 'अर्णब' का असर लगातार देखने को मिल रहा है। प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन नगरी पुरी में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है। शहर के विभिन्न इलाकों में बारिश के कारण सामान्य जनजीवन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। समुद्र तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं और खराब मौसम को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवात अर्णब ने 28 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के तट को पार किया था। इसके बाद तूफान कमजोर होने लगा, लेकिन ओडिशा के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का सिलसिला जारी रहा। पुरी में भी नारियल के पेड़ तेज हवाओं से झूमते नजर आए और बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में मौसम खराब बना रहा।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, चक्रवात अर्णब 29 अक्टूबर को कमजोर होकर दबाव के क्षेत्र में बदल गया। यह मौसम प्रणाली छत्तीसगढ़ और उससे सटे ओडिशा के इलाकों की ओर बढ़ी। हालांकि, चक्रवात की तीव्रता कम होने के बावजूद इसके प्रभाव से कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग ने पहले ही पुरी सहित ओडिशा के कई तटीय जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की थी। पुरी में 27 और 28 अक्टूबर के दौरान प्रतिकूल मौसम की आशंका जताई गई थी।
चक्रवात के प्रभाव से समुद्र की स्थिति भी खराब बनी हुई है। मौसम विभाग के 29 अक्टूबर की रात जारी तटीय बुलेटिन में ओडिशा के समुद्री क्षेत्रों में मध्यम से ऊंची लहरों और बारिश की संभावना जताई गई है। राज्य के सभी बंदरगाहों पर स्थानीय चेतावनी संकेत संख्या तीन जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। समुद्र तट के आसपास रहने वाले लोगों और मछुआरों के लिए विशेष सावधानी बरतना आवश्यक हो गया है। खराब मौसम में समुद्र के भीतर जाने से जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सलाह का पालन करने को कहा गया है।
दूसरी ओर, चक्रवात अर्णब के कारण दक्षिण ओडिशा के गंजाम और गजपति जिलों में स्थिति अधिक गंभीर रही। भारी बारिश से कई निचले इलाकों में जलभराव हुआ, जबकि कुछ स्थानों पर भूस्खलन और सड़क संपर्क बाधित होने की खबरें सामने आई हैं। प्रभावित इलाकों में राहत एवं बचाव कार्य भी चलाए जा रहे हैं। राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां मौसम संबंधी स्थिति पर नजर रख रही हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में राहत दलों को तैयार रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
मौसम विभाग के अनुसार, चक्रवात का मुख्य तंत्र कमजोर पड़ चुका है, लेकिन इससे जुड़े बादल और नमी के कारण कुछ इलाकों में बारिश जारी रह सकती है। इसलिए तूफान के कमजोर होने के बावजूद सतर्कता जरूरी है। पुरी में बारिश और तेज हवाओं ने एक बार फिर तटीय इलाकों में चक्रवाती मौसम से जुड़ी चुनौतियों को सामने ला दिया है। प्रशासनिक एजेंसियों के लिए लोगों की सुरक्षा और मौसम संबंधी चेतावनियों का समय पर प्रसार महत्वपूर्ण बना हुआ है।